भारतीय संत जो कि प्रेरणा है फेसबुक फाउंडर मार्क जकरबर्ग और एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स के

अगर आपको कहा जाए कि दुनिया के सबसे बड़ी सोशल मीडिया नेटवर्क यानी फेसबुक और दुनिया से सबसे महंगे ब्रांड एप्पल की कामयाबी के पीछे भारत के एक साधु का हाथ है तो आप पहली बार में यकीन नहीं कर पाएंगे लेकिन ये सच है। फेसबुक के फाउंडर मार्क जकरबर्ग और एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स प्रेरणा लेने भारत के महान संत नीम करौली बाबा के आश्रम आए हैं।

दरअसल, भारत का योग और जीवनदर्शन हमेशा से पश्चिमी जगत के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। भोग और विलास में डूबे पश्चिम को जब-जब आध्यात्मिक ऊर्जा और प्रेरणा के ज़रुरत महसूस हुई तो उन्होंने भारत के किसी साधु-संत का रुख किया है। ऐसे ही एक संत हैं उत्तराखंड के कैंचीधाम वाले संत महात्मा नीम करौली महराज।

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के गांव अकबरपुर में जन्मे नीम करौली महराज बहुत प्रसिद्ध संत रहे हैं। 11 सितंबर 1973 को उन्होंने महासमाधि ली थी। नीम करौली बाबा के विदेश में भी भक्त थे इन भक्तों में एप्पल कंपनी के संस्थापक स्टीव जॉब्स, फेसबुक के मालिक मार्क जकरबर्ग, हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स तक का नाम शामिल है। उत्तरप्रदेश का कैंचीधाम बहुत प्रसिद्ध तीर्थ स्थल हैं ऐसा कहा जाता हैं की यहा पहुंच कर माथा टेकने से सारी मनोकामना पूरी होती हैं।

अब आकर्षित करने वाली बात ये हैं की नीम करौली बाबा स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग के आध्यात्मिक गुरु कैसे बने। दोनों से ही जुडी कहानी हैं-

दरअसल, एप्पल कंपनी के संस्थापक स्टीव जॉब्स 1974 से 1976 के बीच भारत घूमने आए थे। वो यहा टूरिज्म के मकसद से नहीं बल्कि अध्यात्म की खोज में आए थे क्योंकि वो सच्चे गुरु की खोज में थे। इसी खोज में निकले स्टीव हरिद्वार पहुंचे इसके बाद कैंचीधाम पहुंच गए वहा आकर उन्हें पता चला की बाबा समाधि ले चुके हैं। कहा ये भी जाता हैं की Apple Company के LOGO का आईडिया स्टीव को बाबा के आश्रम से ही मिला था। नीम करौली बाबा को कथित तौर पर सेब बहुत पसंद थे यही वजह थी कि स्टीव ने अपनी कंपनी के लोगों के लिए कटे हुए एप्पल को चुना हालांकि ये एक कहानी हैं और इसे सच बता पाना मुश्किल हैं।

ऐसा ही एक किस्सा फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग से भी जुड़ा हुआ हैं। एक समय मार्क इस उहपोह में थे की फेसबुक को बेचा जाए या नहीं तब स्टीव जॉब्स ने उन्हें भारत के एक मंदिर जाने की सलाह दी। जकरबर्ग इस मंदिर मंदिर पहुंचे वो यहा एक दिन के लिए आए थे लेकिन मौसम खराब होने के चलते उन्हें दो दिन वहा रुकना पड़ा। इस मंदिर में मिली आध्यात्मिक शांति ने ही उन्हें ये फैसला लेने की ऊर्जा दी की उन्हें फेसबुक को आगे बढ़ाने पर विचार करना चाहिए। कहा ये भी जाता हैं की मार्क ने खुद ये किस्सा उस वक्त शेयर किया था जब उनके कहने पर 27 सितंबर 2015 को पीएम मोदी फेसबुक के मुख्यालय में गए थे। हालांकि ये कितना सच हैं इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती।

दुनिया के प्रसिद्ध लोगो में शुमार इन दो लोगों से जुड़ी ये कहानी ये सिद्ध करती हैं की भारत दुनिया को अध्यात्म की शक्ति का एहसास दिलाने में सक्षम हैं और अपने अंदर सभ्यता, संस्कृति के खजानों से भरी विरासत समेटे हुए हैं।

नीम करौली बाबा के बारे में कुछ जानकारी:

असली नाम:  लक्ष्मी नारायण शर्मा
उपनाम:  महाराज जी
व्यवसाय: हिंदू गुरु, रहस्यवादी, और हिंदू देवता हनुमान के भक्त
जन्मदिन: 11 सितम्बर 1900
जन्मस्थान: गांव अकबरपुर, फ़िरोज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
उम्र: 11 सितम्बर 1900 से 11 सितम्बर 1973 तक
मृत्यु तारीख: 11 सितम्बर १९७३
मृत्यु का कारण: कोमा
मृत्यु स्थान: वृन्दावन
राशि: कन्या
घर: गांव अकबरपुर, फ़िरोज़ाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत
राष्ट्रीयता: भारतीय
धर्म: हिन्दू
जाति: ब्राह्मण

“उनसे हमें यह शिक्षा मिलती है, कि मनुष्य के पास अपार शक्ति और धन-सम्पति होने के बावजूद भी अहंकार नहीं होना चाहिए! और साधारण जीवन जीना चाहिए!”

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