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Monday, October 18, 2021

धार्मिक भावनाएं भड़काने वाले कांग्रेसी विधायक आरिफ मसूद ने कहा फरार ना कहो कोर्ट में कर दूंगा सरेंडर

कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोप में पिछले कई दिनों से फरार चल रहे हैं। हाल ही में आरिफ मसूद के कोर्ट में सरेंडर करने की बात सामने आई थी जिसके बाद कोर्ट परिसर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई थी और बैरिकेडिंग भी कर दी गई थी।

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आरिफ मसूद पर धार्मिक भावनाओं को भड़काने के आरोप लगाते हुए यह कहा गया है कि उन्होंने भोपाल के इकबाल मैदान में हजारों लोगों की भीड़ को इकट्ठा किया और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला भाषण दिया।

आरिफ मसूद ने यह भाषण देश में चल रहे कोरोनावायरस के दौरान दिया था जब भीड़ इकट्ठा करने पर पाबंदी लगाई गई थी मामला सामने आने के बाद आरिफ मसूद सहित अन्य छह के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया गया था। 6 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद से ही विधायक आरिफ मंसूरी फरार है।

कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका

फरार होने के बाद मसूद ने कोर्ट में जमानत याचिका भी दायर की थी। विशेष अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरिफ मसूद की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था और अग्रिम जमानत देने से साफ इनकार करते हुए कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था।

देश और प्रदेश के कई हिस्से में आरिफ मसूद के इस काम को लेकर विरोध किया गया था और लोग उनकी गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। गिरफ्त में ना आने के चलते और फरार हो जाने की वजह से लोग उन्हें फरार विधायक आरिफ मसूद के नाम से पुकारने लगे थे जिस पर यह बात भी सामने आई थी कि आरिफ मसूद का कहना था कि फरार शब्द का उपयोग ना करें मैं कोर्ट में सरेंडर कर दूंगा। विधायक मसूद ने भोपाल कोर्ट से जारी गिरफ्तारी वारंट को जबलपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद ही मसूद आगे फैसला करेंगे। इसे लेकर भोपाल में सरगर्मी बढ़ गई है।

कभी भी हो सकते है सरेंडर

आज इस मामले में सुनवाई होनी थी और आरिफ मसूद के सरेंडर किए जाने के कयास लगाए जा रहे थे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में ढाई घंटे तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने धार्मिक भावनाओं को भड़काने के आरोप में अपना आदेश सुरक्षित कर लिया है। विवेक तन्खा और अजय गुप्ता ने तर्क दिया कि 29 अक्टूबर को पहली एफआईआर जिसमें कलेक्टर के आदेश के उल्लंघन का प्रकरण दर्ज किया गया, चार नवंबर को भड़काऊ भाषण देने का जिक्र किया गया और 153 ए की धारा लगाई गई जो साबित करता है कि सरकार के दबाव में कार्रवाई की गई है।

सिर्फ फ्रांस के खिलाफ प्रदर्शन किया गया था। वहीं सरकार की ओर से बताया गया कि ये आपराधिक प्रवृत्ति के हैं। इनके खिलाफ 29 आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। पूरे प्रदर्शन की वीडियोग्राफी कराई गई है, जिसमें भडकाऊ भाषण देने की बात शामिल है। दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद मप्र हाईकोर्ट के डिविजन बेंच ने फैसला सुरक्षित कर लिया।

कोर्ट से वारंट जारी होने के बाद भी आरिफ मसूद 20 से 25 दिनों से पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं और फरार चल रहे हैं जिसके चलते पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

वहीं इस मामले में पुलिस का कहना है कि विधायक का फोन बंद है हमें जहां उनके होने की सूचना मिल रही है हम वहां पहुंच रहे हैं लेकिन अब तक वह गिरफ्त में नहीं आए हैं। बता दें कि बिहार में अपनी चुनाव पार्टी के लिए प्रचार करने जाने के बाद से ही आरिफ मसूद नहीं दिखाई दिए हैं। पुलिस लगातार उनकी तलाश में जुटी हुई है।

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