23 C
India
Tuesday, September 21, 2021

आखिर क्यों दिया जाता है भारतीय नौसेना को 4 दिसम्बर को सम्मान, विस्तृत जानकारी

सेना किसी भी देश का अहम हिस्सा होती है। इसकी अलग-अलग शाखाएं देश की सुरक्षा में हमेशा मुस्तैद रहती हैं। समुद्री सीमा वाले देशों में नौसेना की भूमिका ज्यादा बढ़ जाती है। दुनियाभर में तमाम देश अपनी नौसेना के सम्मान में अलग-अलग दिनों पर नेवी डे मनाते हैं। भारत में हर साल 4 दिसंबर को नेवी डे मनाया जाता है।

- Advertisement -

1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान इंडियन नेवी ने पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। इस उपलब्धि की याद में 4 दिसंबर को भारतीय नौसेना जश्न मनाती है। वर्तमान में भारतीय नौसेना अपने विशालकाय और एडवांस फीचर से लैंस युद्धक पोतों, सबमरीन्स के बलबूत दुनिया भर में चौथे स्थान पर आती है।

क्यों मनाया जाता है नेवी डे

नौसेना दिवस 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध जीतने वाली भारतीय नौसेना की ताकत और बहादुरी की याद में मनाया जाता है। 4 दिसंबर 1971 को, भारतीय नौसेना ने ‘ऑपरेशन त्रिशूल’ के तहत पाकिस्तान के कराची नौसैनिक अड्डे को तहस-नहस कर दिया। इस ऑपरेशन की सफलता को ध्यान में रखते हुए, भारत में हर वर्ष 4 दिसंबर को नौसेना दिवस मनाया जाता है।

दरअसल 3 दिसंबर को पाकिस्तान ने भारतीय एयरस्पेस और सीमा क्षेत्र में हमला किया था जिसका जवाब देने के लिए ‘ऑपरेशन त्रिशूल’ की शुरुआत की गई थी।

भारतीय नौसेना की ओर से किए गए इस हमले में 3 विद्युत क्‍लास मिसाइल बोट, 2 एंटी-सबमरीन और एक टैंकर शामिल थे। इस युद्ध में पहली बार जहाज पर मार करने वाली एंटी शिप मिसाइल से हमला किया गया था। इस हमले में पाकिस्तान के कई जहाज नेस्‍तनाबूद कर दिए गए थे। इस दौरान पाकिस्तान के ऑयल टैंकर भी तबाह हो गए थे।

इंडियन नेवी से जुड़ी खास बातों पर ध्यान दे तो

• भारत की सशस्त्र सेना की समुद्री शाखा का इसका नेतृत्व नौसेना के कमांडर-इन-चीफ के रूप में भारत के राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है। 

• 17 वीं शताब्दी में मराठा सम्राट रहे छत्रपति शिवाजी भोंसले को भारतीय नौसेना का जनक कहा जाता है।

• भारतीय नौसेना की स्थापना 1612 में हुई थी। ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी मैरीन (East India Company’s Marine) के रूप में सेना बनाई थी। साल 1686 तक ब्रिटिश व्यापार पूरी तरह से बॉम्बे में स्थानांतरित हो गया। इसके बाद इस दस्ते का नाम ईस्ट इंडिया मरीन से बदलकर बॉम्बे मरीन (Bombay Marine) कर दिया गया। बॉम्बे मरीन ने मराठा, सिंधि युद्ध के साथ-साथ साल 1824 में बर्मा युद्ध में भी हिस्सा लिया।

• साल 1892 में इसका नाम रॉयल इंडियन मरीन कर दिया गया। भारत की आजादी के बाद 1950 में नौसेना का गठन फिर से हुआ और इसे भारतीय नौसेना नाम दिया गया।

• ब्रिटिश द्वारा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस फ्लोटिला और अदन पर कब्जा करने के साथ ही नौसेना की प्रतिबद्धता कई गुना बढ़ गई, जिसके बाद साल 1840 में चीन युद्ध में इसकी तैनाती इसकी दक्षता के लिए पर्याप्त गवाही देती है।

• साल 1863 से 1877 तक इसका नाम बदलकर फिर से बॉम्बे मरीन कर दिया गया और साल 1877 में ये फिर महामहिम इंडियन मरीन कर दिया गया। जिसके बाद साल 1892 में इसे रॉयल इंडियन मरीन (Royal Indian Marine) कर दिया गया। उस समय तक इसमें 50 से अधिक पोत शामिल हो गए थे।

फिलहाल भारतीय नौसेना की ताकत की बात की जाए तो विश्व रैंकिंग मैं भारतीय नौसेना चौथे नंबर पर है सेना में कुल जहाजों की संख्या 285 है
एयरक्राफ्ट कैरियर 1, फ्राइगेट्स 13, विध्वंसक पोत 10, कोर्वेट्स 19, सबमरीन्स की संख्या 16, निगरानी जहाजों की संख्या139, माइन वारफेयर 3 है।

- Advertisement -

Related Articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

112,451FansLike
1,152FollowersFollow
13FollowersFollow

Latest Articles

error: Content is protected !!