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करोड़ो में नीलाम होता है अभिनेता का उतारा हुआ सूट, फिर क्यों कचरे में फेक देते है शहीदों की वर्दी ओर बूट!

यह बात 16 दिसंबर 1971 को हुए भारत ओर पाकिस्तान के बीच युद्ध की थी। जहाँ इस युद्ध मे हमारे कई साहसी जवानों ने देश की रक्षा के लिए धरती माँ को गले लगा लिया। वही इस युद्द को आज लगभग 48 साल हो गए है फिर भी ज्यादातर लोग वीर जांबाज को नही जानते है, आज उसी परमवीर चक्र विजेता निर्मलजीत सेखों की कहानी आपको बताने जा रहे है।

नौजवान था वह पंजाबी,गजब शेर का रखवाला। देश प्रेम का रस पीकर वह बना हुआ था मतवाला।

एक जाबांज पड़ गया पाकिस्तान पर भारी। 6 पाकिस्तानी विमानों को अकेले ही खदेड़ दिया।

बात 16 दिसंबर 1971 को भारत ओर पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध की है। हमारे कई साहसी जवानों ने देश की रक्षा के लिए बलिदान दिया। उन्ही में से एक निर्मलजीत सिंह सेखों की यह अमर कहानी है। 1971 के पाकिस्तान से हुए इस युद्द को आज लगभग 48 साल हो गए। इसके बाद आज हमारे दिल में उन जवानों के साहस की कहानियां आज भी जिंदा है। किन्तु आज हमारे देश मे चुनिंदा,कुछ लोग ही होंगे जो परमवीर चक्र विजेता निर्मलजीत सिंह सेखों के बारे में जानते होंगे।

पिता को देख बचपन में ही एयरफोर्स जॉइन करने की गजब इच्छाशक्ति

उनका जन्म 1943 में पंजाब के लुधियाना में हुआ था। निर्मलजीत सिंह के पिता भी एयरफोर्स में थे। पिता के हौसले व प्रेरणा को देखकर निर्मलजीत ने बचपन में ही एयरफोर्स में शामिल होने का मन बना लिया। 1967 में बतौर पायलट ऑफिसर के तौर पर वायुसेना में शामिल हुए।

1971 युद्ध में जांबाजों की तरह संभाला मोर्चा

1971 में भारत-पाकिस्तान का बॉर्डर युद्धभूमि में तब्दील हो गया। वही पाकिस्तान ने भारतीय वायुसेना के एयरबेसों को निशाना बनाते हुए बम बरसाना शुरू किया। इसी बीच उसके निशाने पर अमृतसर, पठानकोट और श्रीनगर थे। इस दौरान श्रीनगर एयरबेस की जिम्मेदारी 18 स्क्वाड्रन के हाथों में थी। जिसमे निर्मलजीत सिंह की बहादुरी आज भी हमे गौरवान्वित करती है। इस स्क्वाड्रन को बहादुरी के लिए फ्लाइंग बुलेट भी कहा जाता था।

पाकिस्तान का हमला, भारतीय वीर का करारा जवाब।

पाक की नापाक हरकत के बाद जब पाकिस्तानी विमान भारतीय सीमा के श्रीनगर एयरबेस में प्रवेश करते है,उस दौरान भारतीय वायुसेना को इसकी भनक पड़ी तो बिना किसी देर करे इस स्क्वाड्रन को लीड करने वाले बलदीर सिंह घुम्मन (जी मैन) और सेखों अपने विमानों की तरफ तेज रफ्तार से बढ़ते है। दोनों जवानों ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क कर टेक ऑफ की परमिशन ली। किन्तु संपर्क ना होने से दोनों जवानों ने बिना देरी करे उड़ान भरते हुए पाकिस्तानी सेना को नेस्तनाबूत कर खदेड़ दिया। वही इसी बीच रनवे पर पाकिस्तानी सेना ने दो बम गिरा दिए।

वीर सेखों ने पाकिस्तानी विमानों के पीछे बहादुरी दिखाते हुए अपना विमान दौड़ाया तो हक्का-बक्का हो गया पाकिस्तान

सेखों ने जब हवा में अपना विमान दौड़ाया तो इतिहास बन गया। वही दोनों देशों के बीच होने वाली लड़ाई में यह लड़ाई यादगार बन गयी। पाकिस्तान के दो सेबर जेट को देखते ही बिना देरी करें अपना विमान घुमाया और पाकिस्तानी विमानों के पीछे लगा दिया। जिससे यह दोनों देशों की हवा में सबसे बड़ी लड़ाईयों में खुमार हो गई और यही से वीर से परमवीर का सफर आज भी हमे गौरवान्वित कर रहा है।

वीर का परमवीर वार पाकिस्तान को किया ढेर

पाकिस्तान के चंगेजी ने सेखों का विमान दोनों पाकिस्तानी विमानों के पीछे देखा तो उसने अपने सैनिकों से निकलने को कहा। तब तक सेखों का वार पाकिस्तान के जेट को नेस्तनाबूत कर चला। अकेले ही 4 पाकिस्तानी विमानों का सामना करते हुए। सेखों ने एक-एक कर तीन सेबर जेट विमानों को ढेर कर दिया। इसी बीच उन्होंने अपने सहयोगी को एक संदेश दिया कि शायद उनके विमान में भी निशाना लग गया है। सेखों ने खुद को इजेक्ट करने की कोशिश की। लेकिन इजेक्ट सिस्टम भी फेल हो गया। जिस कारण सेखों वीरगति को प्राप्त हो गए। इसलिए हमें यह कहना पड़ता है कि नौजवान था वह पंजाबी गजब शेर का रखवाला,देश प्रेम का रस पीकर वह बना हुआ था मतवाला।मात्र 28 वर्ष की आयु में जो काम उन्होंने किया है देश उन्हें हमेशा याद रखेगा।

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