पाकिस्तानी PM इमरान खान ने नरेंद्र मोदी को "टाइम" की सूची से किया बाहर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी मैगजीन “टाइम” की दुनिया के 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में जगह नहीं मिली है। यह लगातार दूसरा साल है जब नरेंद्र मोदी इस सूची में जगह नहीं बना पाए हैं। अमेरिका से निकलने वाली पत्रिका “टाइम” ने 100 प्रतिभाशाली लोगों की सूची जारी की पर इस सूची की खास बात यह है कि इसमें प्रधानमंत्री मोदी का नाम नहीं है। लेकिन भारत के चीर प्रतिद्वंदी और पड़ोसी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान का नाम शामिल है। इस सूची में शामिल राजनेताओं में पहले नंबर पर अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी का नाम है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम दूसरे नंबर पर है। ग्लोबल वार्मिंग के खतरे को लेकर दुनिया को आगाह करने वाले पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटर थैनबर्ग तीसरे नंबर पर है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान 25 वें नंबर पर
इस साल “टाइम” ने मई में मोदी पर कवर स्टोरी प्रकाशित की थी। इस स्टोरी का शीर्षक था, “India’s Divider in Chief” इस कहानी को पत्रकार आतिश तासीर ने लिखा। नरेंद्र मोदी को बहुसंख्यक आबादी ऐसे इंसान के रूप में देखती है जो समाज को विभाजित करने का काम करता है। इस अंक के कवर को ट्वीट करते हुए “टाइम” ने लिखा था

“टाइम्स का नया इंटरनेशनल कवर: क्या दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र मोदी सरकार को आने वाले और 5 साल बर्दाश्त कर सकता है?”

“टाइम” ने अपना यह कवर उस समय बनाया था जब भारत में लोकसभा चुनाव चल रहे थे। भारतीय मीडिया में उन्हें जिताया हुआ दिखाया जा रहा था। आतिश लेखक और पत्रकार तवलीन सिंह के बेटे हैं। केंद्र सरकार ने आतिश तासीर को दिया ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया का स्टेटस इसी महीने वापस ले लिया है। कुछ लोगों का मानना है कि नरेंद्र मोदी सरकार आतिश के लेख से खुश नहीं थी इसी का खामियाजा उन्हें उठाना पड़ा।

लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद “टाइम्स” ने अपनी वेबसाइट पर 28 मई को मनोज लाडवा ने लेख लिखकर नरेंद्र मोदी की तारीफ की थी। लाडवा प्रधानमंत्री मोदी की चुनाव प्रचार टीम का हिस्सा रह चुके हैं उन्होंने प्रधानमंत्री के लिए लिखा मोदी ने जिस तरह से देश को एक किया है उस तरह कोई भी नहीं कर सकता है। जब नरेंद्र मोदी ने प्रचंड बहुमत से ऐतिहासिक जीत हासिल की थी तो नतीजे आने के बाद “टाइम” ने अपने सुर ही बदल दिये। 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में लगातार मोदी दूसरे साल भी इस सूची में स्थान नहीं बना पाए। 2017 में इस सूची में नरेंद्र मोदी को तीसरे नंबर पर रखा गया था।

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