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Tuesday, September 21, 2021

गर्लफ्रेंड ने रखी शर्त आईएएस IAS बनोगे तभी करुँगी तुमसे प्यार फिर प्रेमी ने जो किया वो…

आईपीएस मनोज शर्मा की कहानी इस देश के हर युवा के लिए मिसाल है। मनोज शर्मा 2005 बैच के महाराष्ट्र कैडर के आईपीएस है वह फिलहाल मुंबई में एडिशनल कमिश्नर ऑफ वेस्ट रीजन पर तैनात है।
उनकी बचपन की कहानी बेहद संघर्षपूर्ण है । उनका जन्म मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में हुआ था। पढ़ाई के दौरान ही 9वीं ,10वीं और 11वीं में थर्ड डिवीजन से पास हुए थे, वह भी नकल करके लेकिन 12वीं में नकल करने में सफल नहीं हो पाए और 12वीं में फेल हो गए।

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बीते माह उनके ही साथी अनुराग पाठक ने उनके ऊपर किताब लिखी है “12वीं फेल, हारा वही जो लड़ा नहीं” शीर्षक से लिखी इस किताब में मनोज शर्मा का वह संघर्ष है जो एक आम इंसान को तोड़ देता है। लेकिन मनोज शर्मा ने अपनी गर्लफ्रेंड के एक वादे पर ऐसा U-Turn लिया कि IPS बन गए।

एक वीडियो इंटरव्यू में मनोज ने बताया कि मैंने सोचा 12वीं में नकल से पास हो जाऊंगा, उन्हें यह भी पता था कि कहां गाइड रखनी है, कहां पर्ची रखनी है और किस तरह नकल करनी है। 12वीं पास करके टाइपिंग सीख कर कहीं न कहीं जॉब कर लेंगे ताकि जीवन यापन चल सके। जब उन्हें पता चला कि एसडीएम ने नकल करने से रोका है, तो लगा इतना बड़ा और पावरफुल आदमी कौन है, जिसका सब कहना मान रहे हैं। मैंने भी दृढ़ निश्चय कर लिया कि मैं भी इतना ही पावरफुल आदमी बनूंगा।
12वीं में फेल होने के बाद रोजी रोटी के लिए वह और उनके भाई टेंपो चलाते थे। लेकिन एक दिन टेंपो भी पकड़ा गया मैंने सोचा एसडीएम से कह कर छुड़ा सकते हैं, लेकिन उनसे नहीं कह पाया उनसे पूछा आप एसडीएम कैसे बने और तैयारी कैसे की।
कुछ दिन बाद घर से थैला लेकर ग्वालियर आ गया पैसे नहीं होने के कारण मैं भिखारियों के पास सोता था। यहां लाइब्रेरियन कम चपरासी तक का काम किया।कभी-कभी नेताओं और बड़े अफसरों की मीटिंग होती थी तो उसमें दरी बिछाने और कुर्सियां लगाने का काम भी किया।लाइब्रेरी में जब मैं गोर्की और अब्राहम लिंकन को पढ़ता तो ऐसा लगता है कि मैं ऐसा क्यों नहीं बन सकता हूं धीरे-धीरे तैयारी उच्च लेवल पर जाने लगी लेकिन 12वीं फेल का ठप्पा पीछा नहीं छोड़ रहा था। एक लड़की से प्यार करता था लेकिन उसे भी दिल की बात नहीं कह पाता था।

संघर्ष करते-करते दिल्ली आ गए पैसों की जरूरत की वजह से बड़े घरों में कुत्ते टहलाने लगा । कुत्ता टहलाने के ₹400 मिल जाते थे उसी से मैं अपना गुजारा करता । मेरे सर विकास दिव्यकीर्ति ने बिना फीस एडमिशन दे दिया पहले अटेम्प्ट में प्री पास कर लिया पास कर लिया । लेकिन दूसरी और तीसरी बार प्यार हो जाने के कारण प्री में भी नहीं हुआ और चौथी बार में प्री निकाल पाया फिर मेंस देने गया उसमें 100 नंबर का टूरिज्म पर निबंध लिखना था। निबंध तो लिख दिया लेकिन अंग्रेजी काफी कमजोर थी।

जिस लड़की से प्यार करता था, उससे कहा कि यदि तुम हां कर दो तो मैं दुनिया पलट कर सकता हूं, मोहब्बत में जीत के बाद चौथे अटेम्प्ट में IPS बन गया। मनोज शर्मा पर किताब लिखने वाले अनुराग पाठक ने कहा आज के समय में बच्चे फेल हो जाते हैं तो निराश हो जाते हैं वह सोचते हैं कि अब मैं जिंदगी में कुछ भी नहीं कर पाऊंगा लेकिन बार-बार प्रयास करने और अपने हौसले बुलंद रखने पर जरूर सफलता मिलती।

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