क्या आपके बच्चे भी मोबाइल के दीवाने है तो हो जाये सावधान, भूलकर भी नहीं करें ये गलती

आज के जमाने में टेक्नोलॉजी बहुत आगे पहुंच गई है, इस टेक्नोलॉजी के चलते सबसे ज्यादा चलन स्मार्टफोन का हो गया। इस फोन की लत हमें कई घंटों मोबाइल स्क्रीन पर देखने को मजबूर कर देती है। जहां एक तरफ इस स्मार्टफोन के कुछ नुकसान है जो हमारी जिंदगी को बर्बादी के कगार पर पहुंचा देती है। हमारे मोबाइल फोन से निकलने वाले हानिकारक किरणें हमारी आंखों के लिए अच्छी नहीं होती है। खासकर बच्चों की आंखों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

कुछ मामलों में यह बातें सिर्फ आंखों के चश्मे तक ही सीमित नहीं रहती बल्कि कुछ गंभीर परिणाम भी हो सकते हैं। ऐसा ही कुछ थाईलैंड में रह रहे एक पेरेंट्स के साथ हुआ। दरअसल थाईलैंड के रहने वाले Dachar Nuysticker Chuayduna की 4 साल की बेटी को अधिक स्मार्टफोन देखना महंगा पड़ गया।

उनकी बेटी 2 साल की थी तब से ही मोबाइल फोन देखती थी। ऐसे में जब 4 साल की हुई तो उसकी आंखों में इस मोबाइल की वजह से समस्या पैदा हो गई। समस्या से निपटने के लिए पहले चश्मा लगा दिया गया लेकिन इससे कोई बात नहीं बनी। क्योंकि बच्ची को “लेजी आई “नाम की एक गंभीर बीमारी हो गई थी। यह एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज चश्मा लगाने के बाद भी संभव नहीं है। इस बीमारी की वजह से हमारा दिमाग आंखों को देखने वाली तस्वीर को सेंस नहीं कर पाता है। नतीजतन हमें आंख से कम या ना के बराबर दिखता है।

पिता ने इस पूरी घटना को फेसबुक पर शेयर कर कहा कि हमें लगा बेटी की आंखें चश्मा लगाने के बाद ठीक हो जाएगी। लेकिन बाद में पता चला कि इसकी सर्जरी करनी पड़ेगी साथ ही यह भी लगा कि यह सब मोबाइल का परिणाम है। सर्जरी करवाई उसके बाद उम्मीद है कि बेटी की रोशनी पुनः आ जाए। अतः सभी पेरेंट्स से अनुरोध है कि बच्चों को मोबाइल से जितना दूर रखा जा सके रखने का प्रयास करें।

कहीं आपकी एक गलती उसका पूरा भविष्य अंधकारमय न कर दे

नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों को आमतौर पर 1 या 2 घंटे से ज्यादा मोबाइल नहीं देखने देना चाहिए। मोबाइल से बच्चों की आंखों और दिमाग पर गलत असर पड़ता है। क्योंकि कुछ माता-पिता की आदत होती है कि जब वह काम करते हैं तो बच्चों को मोबाइल देकर बिठा देते हैं, जो कि सबसे खतरनाक है। अपने बच्चों के लिए पेरेंट्स को ही सजग और सतर्क रहना होगा।

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