अयोध्या विवाद का फैसला: 15 नवंबर को "जय श्री राम" के जयकारे

सुप्रीम कोर्ट में श्री राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद से जुड़े अयोध्या मामले में सुनवाई अपने आखिरी पड़ाव की ओर है। कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने की अंतिम तारीख 18 अक्टूबर निर्धारित कर दी है। अब यह लगभग तय हो गया है कि मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई के रिटायरमेंट से पहले देश के सबसे पुराने और संवेदनशील विवाद में फैसला आ जाएगा।

रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं। 17 नवंबर को रविवार और 16 को शनिवार है, इसलिए 2 दिन की छुट्टी की वजह से सुप्रीम कोर्ट ने रंजन गोगोई के कार्यकाल के आखिरी दिन 15 नवंबर को अयोध्या मामले की सुनवाई करने वाली संविधान पीठ फैसला सुनाएगी। फैसला चाहे राम मंदिर के पक्ष में आए या मस्जिद पक्ष में एक बात तय है कि उस दिन “जय श्री राम” का उद्घोष जरूर होगा। अभी से दोनों पक्षों के लोगों में इस बात की उत्सुकता है, कि फैसला किसके पक्ष में आएगा।

हिंदू पक्ष कार रामलला विराजमान निर्मोही अखाड़ा हिंदू महासभा श्री राम जन्मभूमि समिति और गोपाल सिंह विशारद की तरफ से 16 दलीलें दी गई। हिंदू पक्ष से पूर्व अटॉर्नी जनरल के परासरन वरिष्ठ, सीएस वैद्यनाथन, सुशील जैन, पीएन मिश्रा और हरिशंकर जैन ने विवादित जमीन पर मंदिर होने के पौराणिक ऐतिहासिक पुरातात्विक सबूत पेश किए। हिंदू पक्षों के मुताबिक विवादित स्थल की खुदाई के दौरान मिले खंभों में श्री कृष्ण शिव तांडव और श्री राम के बाल रूप की तस्वीरें भी कोर्ट के सामने पेश की थी। यही नहीं कमिश्नर की रिपोर्ट का हवाला दिया गया कि एएसआई के द्वारा कराई गई खुदाई में मिले पाषाणो के ऊपर भी जन्मभूमि यात्रा लिखी है। हिंदू पक्ष की दलील के अनुसार यह दलील दी गई कि दुनिया के करोड़ों लोगों की आस्था है कि अयोध्या ही श्रीराम का जन्म स्थान है।

मुस्लिम पक्ष द्वारा राम के अस्तित्व पर कोई संदेह नहीं है, विवाद तो जन्म स्थान को लेकर

हिंदू पक्ष के वकीलों ने साबित करने की कोशिश की कि विवादित जमीन यानी जिस पर बाबरी मस्जिद थी, वही श्री राम का जन्म स्थान है। मुस्लिम हिंदुस्तान को सारे जहां से अच्छा बताते हैं, अल्लमा इकबाल की तरह भी भगवान राम को इमामे हिंद मानता है, राम के अस्तित्व को भी मानता है। लेकिन हिंदू पक्ष को इस बात पर एतराज है कि मस्जिद वाली जगह ही राम की जन्मभूमि है। मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन, जफरयाब जिलानी, मीनाक्षी अरोड़ा, शेखर नाफड़े सब ने हिंदू पक्ष के दिए सबूतों को नकार दिया। पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट और सबूत जिसके दम पर हिंदू उस विवादित जमीन पर दावा कर रहे हैं, उस रिपोर्ट को ही खारिज कर दिया। कोर्ट को तय करना है कि किस पक्ष का अनुमान और राय ज्यादा विश्वसनीय है।

मुस्लिम पक्ष का दावा है कि बाबरी मस्जिद किसी मंदिर को तोड़कर नहीं बनाई गई। दोनों पक्षों में किसी के पास भी पुख्ता सबूत नहीं है। दोनों अपनी अपनी राय और अनुमान के अनुसार दावा कर रहे हैं। किसी भी पक्ष का अनुमान विश्वसनीय नहीं है दलील के अनुसार पुराने वक्त से बादशाह की ओर से वह मस्जिद के मुतवल्ली को मस्जिद की देखरेख के लिए ₹302 सालाना मिलता था। मुस्लिम पक्षकार कोर्ट में मस्जिद के पक्ष में एक साथ खड़े दिखे हैं, लेकिन इनकी समस्या है कि अपनी दलीलों को लेकर कई बार यु टर्न की नौबत आ गई। देश के सबसे संवेदनशील और पुराने विवाद अयोध्या भूमि विवाद में 18 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी हो जाने की उम्मीद है। हिंदू पक्ष से जुड़े नेताओं के बयान से लग रहा है, कि हिंदू पक्ष ने मान लिया है कि नवंबर में फैसला राम मंदिर के पक्ष में ही आएगा। ऐसे 27 अक्टूबर को इस बार अयोध्या में मनाई जाने वाली दिवाली विशेष होगी।

इसे भी पढ़े : –

Leave a Comment