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भ्रष्टाचार पर योगी आदित्यनाथ का वार: घोटाले में शामिल 2 सीनियर IPS सस्पेंड

लखनऊ: यूपी के बहुचर्चित पशुधन विभाग में हुए करोड़ों के घोटाले पर सीएम योगी ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए दो अधिकारियों को सस्पेंशन लेटर थमा दिया है. सस्पेंड होने वाले दोनों अधिकारी डीआईजी रैंक के हैं. DIG रूल्स और मैनुअल दिनेश दुबे और DIG, PAC अरविंद सेन पर कार्रवाई की गई है.  इन दोनों अधिकारियों का नाम पशुधन विभाग में फर्जी टेंडर दिलाने के मामले में आया था, जिसमें हुई जांच के बाद उन्हें निलंबित किया गया है. 

क्या है पशुधन घोटाला?

पशुधन घोटाला अपने आपमें अनोखा मामला था. इसमें शामिल आरोपियों ने सरकार की नाक के नीचे सचिवालय में ही एक अलग से विभाग बना रखा था. इस विभाग में बैठकर इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड आशीष राय लोगों को अपने जाल में फंसाता था. 9 करोड़ के इस घोटाले का राज तब फाश हुआ जब इंदौर के एक व्यापारी मंजीत भाटिया को भी फर्जी विभाग के जरिये टेंडर दिलाने का झांसा दिया गया.

पशुधन विभाग में फ़र्ज़ी टेंडर के जरिये मध्य प्रदेश निवासी मंजीत भाटिया से 9 करोड़ 27 लाख की रकम की ठगी गई थी. हेड कॉन्स्टेबल दिलबहार ने ही 31 मार्च, 2019 को पीड़ित मंजीत भाटिया को अन्य सिपाहियों के साथ उठाकर नाका कोतवाली में उसे खूब धमकाया था. इस बात की शिकायत मंजीत भाटिया ने पुलिस से की. मामले में शासन और प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया. बाकी आरोपियों के खिलाफ SIT जांच कर रही है. इस घोटाले को लेकर विपक्ष सरकार पर खूब हमलावर रहा है. 

पशुधन घोटाले में हुईं कई गिरफ्तारियां

इस मामले में पशुधन राज्यमंत्री जयप्रताप निषाद के निजी प्रधान सचिव रजनीश दीक्षित, निजी सचिव धीरज कुमार देव, पत्रकार आशीष राय, अनिल राय, कथित पत्रकार एके राजीव, रूपक राय और उमाशंकर को 14 जून को गिरफ्तार किया गया था. बाराबंकी में हेड कांस्टेबल रहे दिलबहार सिंह को सस्पेंड भी किया गया था. मंजीत भाटिया की शिकायत थी कि उसी ने उन्हें कार में बिठाकर धमकाया और मारपीट की थी. 

SP के खिलाफ जांच सही पाई गई

एसटीएफ के मुताबिक पीड़ित मंजीत ने सीबीसीआईडी के तत्कालीन एसपी (अब डीआईजी) पर इन लोगों से मिलीभगत कर धमकाने का आरोप लगाया था. उस समय इस पद अरविन्द सेन थे, जो इस वक्त डीआईजी हैं और पीएसी सेक्टर आगरा में तैनात हैं.

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