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शादी के 15 दिन बाद ही युद्ध पहुंचा,15 गोलियां लगी हाथ भी टूट गया पर आतंकियों को उड़ा दिया

आज पूरा देश कारगिल युद्ध में देश के लिए शहीद होने वाले सैनिकों की याद में कारगिल विजय दिवस मनाता है। कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों ने वीरता की कई मिसालें पेश की। भारतीय सेना ने करगिल युद्ध में पाकिस्तानी सेना को धूल चटा कर विजय ध्वज फहराया था। 60 दिनों तक चले युद्ध में भारत के करीब 527 जवानों ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। इस जीत के हीरो रहे थे सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह यादव। योगेंद्र यादव देश के एकमात्र ऐसे फौजी थे जिन्हें जिंदा रहते परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। जब वह मात्र 19 साल के थे पाकिस्तान आर्मी ने इंडिया पर आक्रमण कर दिया था। योगेंद्र 18 ग्रेनेडियर्स बटालियन के 22 दिन तक चले इस युद्ध में शामिल रहे। इस दौरान उन्हें 15 गोलियां लगी इसके बाद भी वह पाकिस्तानी सैनिकों पर टूट पड़े और टाइगर हिल पर कब्जा किया।

अग्रवाल पब्लिक स्कूल में छात्रों के सामने रोंगटे खड़े कर देने वाली एक ऐसी ही घटना का जिक्र सबसे कम उम्र के परमवीर चक्र पाने वाले सूबेदार मेजर योगेंद्र सिंह यादव ने युद्ध के पलों को बयां किया तो सभा में उपस्थित हर इंसान का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। यादव के पिता करण सिंह यादव भी सेना से रिटायर हुए थे। मैंने भी उनके पद चिन्हों पर चलने का बचपन से ही संकल्प ले लिया था कि मुझे भी पिता की तरह सेना में ही जाना है। क्योंकि मुझ में देश सेवा का जज्बा कूट-कूट कर भरा था। जब मैं 16 साल का था तभी मुझे यह अवसर मिल गया। ट्रेनिंग के कुछ समय बाद मेरी शादी हो गई थी। शादी को 15 दिन ही हुए थे कि मुझे करगिल युद्ध के लिए बुला लिया गया।

परिवार और अपनी नई शादी के बारे में सोचकर योगेंद्र थोड़ा दुखी हुए। लेकिन इस दुख से ज्यादा वह इस बात से खुश थे कि इतनी जल्दी देश सेवा के लिए लड़ने का मौका मिला है। बिना समय गवाएं योगेंद्र सिंह निकल पड़े और अपनी बटालियन ज्वाइन की। जम्मू कश्मीर पहुंचने पर मालूम हुआ कि मेरी बटालियन क्रॉस सेक्टर की सबसे ऊंची पहाड़ी तोलोजिंग पर लड़ाई लड़ रही है।

दुश्मन ने चलाई अंधाधुंध गोलियां
टाइगर हिल पर हजारों मीटर ऊपर बैठे दुश्मनों ने अंधाधुंध गोलियां चलाना शुरू कर दिया था। इन गोलियों से हमारे कई साथी शहीद हो गए थे। अब हमें 18000 फीट ऊंची बिल्कुल खड़ी चट्टान के ऊपर जाना था। अब हमें वहां पहुंचने के लिए अफसरों ने ऐसे रास्तों से दुश्मनों तक पहुंचने का प्लान बताया जिसके बारे में दुश्मन सोच भी नहीं सकता था।

गोलीबारी में शहीद कई साथी
जहां से दुश्मन हमला कर रहे थे हम वहां तक पहुंचने में सफल हुए थे। दुश्मनों पर धावा बोला और उनके बंकरों को पूरी तरह तबाह कर दिया। इस गोलीबारी में हमने हमारे कई साथियों को खो दिया। इस समय मुझे भी तीन गोलियां लग गई थी। जब दुश्मन को लगा पूरी टीम समाप्त हो गई है तो अपनी तसल्ली के लिए आगे बढ़े। हमने दुश्मनों पर हमला बोल दिया लेकिन एक आतंकी ने हमारी टुकड़ी की जानकारी अपने साथियों को दे दी।

मरने का नाटक किया दागा बंकर
दुश्मन छिपकर हमारा इंतजार कर रहे थे। जैसे-जैसे हम पहुंचे दुश्मनों ने गोलियों की बौछार करना शुरू कर दी। मेरे पास ग्रेनेट था। जिससे मैंने दुश्मनों के बंकर को दाग दिया और कई आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया। दूसरे बंकर पर जिसमें चार आतंकी थे उस पर धावा बोला। मैंने अकेले उन्हें मौत के घाट उतारा और मेरे पीछे आ रही मेरी भारतीय बटालिन ने मुझे वहां से निकाला। मुझे 15 गोलियां लगने के बावजूद भी मैं मरने का नाटक करता रहा। क्योंकि दुश्मन मेरे नजदीक आते जा रहे थे।

165000 फीट ऊंचे टाइगर हिल पर पाकिस्तानी फौज ने कब्जा कर लिया था। लेकिन 25 जवानों के साहस और उसमें 25 जवानों की शहादत ने टाइगर हिल पर तिरंगा फहरा दिया। टाइगर हिल पर परचम फहराने वाले योगेंद्र सिंह यादव को उनकी वीरता के लिए परमवीर चक्र से सम्मानित किया।

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