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भारत ने दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र को पर्यटकों के लिए खोला तिलमिलाया पाकिस्तान

भारत ने दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र माने जाने वाले सियाचिन को पर्यटकों के लिए खोलने का फैसला लिया है। जिससे पाकिस्तान तिलमिला गया। भारत के एक फैसले पर पाकिस्तान ने आपत्ति जताई है और एक बार फिर से आंतरिक मामले में दखल देने की कोशिश की है। पाकिस्तान ने कहा भारत से किसी सद्भावना की उम्मीद नहीं की जा सकती। पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता डॉ मोहम्मद फैजल ने गुरुवार को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में सियाचिन की स्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “भारत कैसे सियाचिन को पर्यटन के लिए खोल सकता है?यह एक विवादित क्षेत्र है। जिस पर भारत ने जबरन कब्जा जमाया हुआ है। हम भारत से किसी सद्भावना की उम्मीद नहीं करते। हमने हमेशा भारत से अच्छा संबंध चाहा लेकिन हमें कोई जवाब नहीं मिला।”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले महीने 31 अक्टूबर को कहा था कि केंद्र सरकार ने सियाचिन बेस कैंप से कुमार पोस्ट तक के पूरे क्षेत्र को पर्यटकों के लिए खोलने का फैसला किया है। मोहम्मद फैजल ने कहा कि पाकिस्तान को इस मामले में भारत की ओर से कुछ अच्छे या सकारात्मक की उम्मीद नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ने करतारपुर काॅरीडोर के खुलने के बाद श्रद्धालुओं के यहां आने पर भी रोड़े अटकाए। फैजल ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने इसी महीने 9 नवंबर को करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन किया था। यह काॅरिडोर गुरुदासपुरा के डेरा बाबा नानक को पाकिस्तान की गुरुद्वारा करतारपुर साहिब से जोड़ता है। करतारपुर आने के लिए 5000 लोगों को आने की अनुमति दी गई थी। लेकिन वास्तविक संख्या काफी कम ही थी।

मोहम्मद फैजल के बयान से पाकिस्तान की हताशा साफ दिख रही है। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से पाकिस्तान लगातार भारत के खिलाफ बयान बाजी कर रहा है और प्रोपगेंडा चला रहा है। इसके अलावा मोहम्मद फैजल ने एक बार फिर कश्मीर राग अलापा और अनाप-शनाप बयानबाजी की। उन्होंने यह आरोप भी लगाए की तीर्थ यात्रियों के करतारपुर आने में रुकावट पैदा की। लंदन में रह रहे प्रवक्ता मुत्तहिदा कोमी मुवमेंट के एक धड़े के नेता अल्ताफ हुसैन ने भारतीय चैनल को दिए उस इंटरव्यू पर चिंता जाहिर की जिसमें हुसैन ने भारत में शरण की गुहार लगाई थी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इस मामले को देख रहा है और इसका विस्तृत जवाब दिया जाएगा। उन्होंने इस दावे को खारिज किया कि नेपाल में कुछ साल पहले अगवा किए गए पाकिस्तानी सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट कर्नल हबीब जाहिर की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि उनकी मौत की बातें पाकिस्तान और उसके नागरिकों के प्रति शत्रुता रखने वाली एजेंसियों द्वारा चलाए जाने वाले सनसनी फैलाने वाले अभियान का हिस्सा है। प्रवक्ता ने कहा हबीब की मौत का जो सर्टिफिकेट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है वह फर्जी लग रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय सीमा के पास नेपाल में अगवा किए गए हबीब को लेकर उसके परिजन और पाकिस्तान सरकार चिंतित है।

साल 2007 में भी भारत ने इसी तरह का एक फैसला लिया था। उस समय भी पाक की तरफ से इस कदम का विरोध किया गया था। तब पाक के विदेश विभाग की तरफ से भारत के डिप्टी हाई कमिश्नर को तलब कर विरोध दर्ज कराया गया था। भारत और पाक के बीच दो दशकों से सियाचिन जंग का मैदान बना हुआ है। 72 किलोमीटर के दायरे को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत पिछले कई समय से चल रही है। नवंबर 2003 में दोनों देशों के बीच इस पर युद्ध विराम समझौता भी हुआ था लेकिन सेनाओं को यहां से नहीं हटाया गया।

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