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Friday, October 22, 2021

सपनों को पूरा करने के लिए छोड़ा माँ-बाप का घर, 7 साल बाद अफसर बन कर लौटी घर

कहते हैं अगर आप में मेहनत और लगन से अपने सपनो को पूरा करने की शक्ति हैं तो एक दिन सफलता आपके क़दम चूमेगी। कुछ इसी तरह अपनी कड़ी मेहनत और लगन से अपने सपनो को पंख दिया हैं संजू रानी वर्मा ने। संजू रानी वर्मा वह लड़की जिस पर कुछ सालों तक घरवाले शादी का दबाव बना रहे थे आज उसने अफ़सर बन कर उन्ही घरवालो का नाम रोशन किया है।

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उत्तर प्रदेश के मेरठ की रहने वाली संजू रानी का अफसर बनने का यह सफ़र आसान बिल्कुल भी नहीं था। इस सफ़र में सबसे बड़ी अड़चन उनका ख़ुद का परिवार था जहाँ लड़कियों को कमतर माना जाता था। परिवार में बेटियों के सपने नहीं बल्कि उनकी शादी महत्त्व रखती थी। संजू रानी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।

जैसे ही परिवार को लगा कि बेटी बड़ी हो गई हैं उसे विदा करना ही बेहतर हैं, उन्होंने संजु पर शादी का दबाव बनाना शुरू कर दिया। यह दबाव संजू पर बारहवीं की परीक्षा पास करने के बाद से ही बनने लगा था। उनकी बड़ी बहन की शादी भी इण्टर पास करते ही कर दी गई थी।

पढ़ाई के लिए किया संघर्ष

शादी के दबाव के बावजूद संजू कहा हार मानने वालों में से थी, उन्होंने किसी तरह घरवालो को बारहवीं के आगे की अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए मना लिया और मेरठ के ही आरजी डिग्री कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वह अपनी आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली चली गयी और वहाँ दिल्ली यूनिवर्सिटी में पीजी में नामांकन लिया। जब वह दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही थी उसी बीच उनकी माँ का देहांत हो गया। माँ के निधन के बाद घरवालो ने फिर से संजू पर शादी का दबाव बनाना शुरू कर दिया।

किया घर छोड़ने का फैसला

संजू ने 2013 में अपने सपने के लिए घर छोड़ने का फ़ैसला लिया। संजू रानी वर्मा कहती है:-2013 मेरे लिए एक बहुत मुश्किल दौर था। उस साल मैंने सिर्फ़ घर ही नहीं छोड़ा था बल्कि दिल्ली यूनिवर्सिटी से अपनी पीजी की पढ़ाई भी छोड़ी थी। यह वाकई में मुश्किल दौर था जहाँ उनके पास अपनी पढ़ाई तो क्या ख़र्च के लिए भी पैसे नहीं थे। तब उन्होंने बच्चों को ट्यूशन देना शुरू किया। कुछ प्राइवेट स्कूलों में भी पढ़ाया और जैसे-तैसे अपने सपने को पूरा करने का संघर्ष जारी रखा।

IAS बनने का सपना

कुछ सालों बाद उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने यूपीपीएससी (UPPSC) की परीक्षा पास कर ली। मुश्किलो से डर कर ना हारने के जज़्बे का ही नतीजा हैं कि संजू रानी आज कमर्शियल टैक्स अफसर हैं। उनके सपने यही नहीं रुकते, उनकी ख़्वाहिश हैं कि वह सिविल सेवा कि परीक्षा पास कर IAS अधिकारी बने और एक दिन वह मेरठ में ज़िलाधिकारी बन के आए।

संजू रानी वर्मा समाज में सफलता का एक उदाहरण हैं। यह वह बेटी हैं जो कुछ समय पहले तक ख़ुद के सपने के लिए लड़ रही थी पर आज वह बड़े सपने देखने वाली लाखो बेटियों की प्रेरणा हैं।

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