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JNU Protest:प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने काटी बिजली, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कहा अब सारी हदें पार

काफी लंबे समय से JNU के छात्र हॉस्टल फीस के बढ़ने से नाराज हैं। दरअसल, JNU में 40% स्टूडेंट्स ऐसे हैं जिनके परिवार की आय ₹12,000 प्रति माह से भी कम है। यह जानकारी यूनिवर्सिटी की वार्षिक रिपोर्ट 2017-18 मैं दी गई है। JNU स्टूडेंट्स यूनियन ने मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल को भी इस बात से अवगत कराया था। स्टूडेंट यूनियन ने कहा था कि फीस में बढ़ोतरी का मतलब है कि 40% से अधिक छात्रों को अपनी शिक्षा बीच में ही छोड़नी पड़ सकती है। हालांकि सरकार ने हॉस्टल फीस कुछ कम की है, लेकिन छात्र इससे संतुष्ट नहीं है। यही कारण है कि छात्र प्रदर्शन कर उग्र हो रहे हैं।

JNU के छात्रों द्वारा यूनिवर्सिटी के अंदर जबरन बिजली काट देने से परीक्षा के रजिस्ट्रेशन काम में बाधा पड़ने का मामला सामने आया है। बता दें कि JNU प्रशासन ने शुक्रवार (3 जनवरी) को कहा कि मुखौटा लगाए हुए कुछ छात्रों ने जबरन बिजली काट दी। जिसके कारण सरवर ने काम करना बंद कर दिया और सेमेस्टर परीक्षा की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया बाधित हुई।प्रशासन ने चेतावनी दी है कि ऐसे छात्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि पिछले साल हॉस्टल की फीस बढ़ने से नाराज चल रहे छात्रों ने यह कारनामा किया है।

मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा, ” 3 जनवरी के दिन करीब 1:00 बजे छात्रों के एक समूह ने अपने चेहरे पर मुखोटे लगाकर जबरन सेंटर फॉर इनफार्मेशन सिस्टम के कार्यालय में प्रवेश किया और बिजली काट दी। जबरन सभी तकनीकी कर्मचारियों को बाहर निकाल दिया और सर्वर को निष्क्रिय कर दिया।” रजिस्टार प्रमोद कुमार ने कहा कि इससे रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया बाधित हुई है। हॉस्टल के शुल्क बढ़ाए जाने के विरोध में 2 महीने से पूरे विश्वविद्यालय का कामकाज प्रभावित करने वाले छात्रों ने परीक्षा रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का बहिष्कार करने का फैसला लिया है। इस पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने अशिष्टता और अनुशासनहीनता की सारी सीमाएं तोड़ दी है। विश्वविद्यालय ने यह भी कहा कि छात्रों ने अपने सहपाठियों के अकादमी हितों का नुकसान करने की भी ठान ली है।

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