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किराने की दुकान पर किया काम, सड़कों पर गोलगप्पे भी बेचे, विराट कोहली की राह पर है यूपी का यह लड़का

यूपी के भदोही के यशस्वी जायसवाल ए लिस्ट क्रिकेट के मैच में दोहरा शतक लगाने वाले विश्व के सबसे युवा खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने बेंगलुरु में विजय हजारे ट्रॉफी में खेलते हुए 154 गेंद में दोहरा शतक लगाया है। मुंबई की टीम से खेलते हैं और सबसे बड़ी बात है कि उन्होंने गोलगप्पे बेचते हुए क्रिकेट में सितारा बनने का ख्वाब देखा। क्रिकेट की पिच के साथ उन्होंने जीवन की पिच को संघर्षों से खेला है। साल 2020 में दक्षिण अफ्रीका में होने वाली आईसीसी अंडर-19 विश्व कप के लिए बीसीसीआई ने 15 सदस्यीय भारतीय टीम की घोषणा कर दी है। इसमें यूपी के भदोही के यशस्वी जायसवाल का सिलेक्शन हुआ। यशस्वी ने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया। उनके पिता पेंट की दुकान चलाते हैं। यशस्वी ने किराने की दुकान में काम किया और सड़कों पर गोलगप्पे बेचे। यशस्वी के पिता चाहते हैं कि वह एक दिन विराट कोहली के साथ खेले और भारत को विश्वकप दिलाए। बता दे, विराट कोहली भी अंडर-19 विश्व कप में अच्छे प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम में सिलेक्ट हुए थे।

यशस्वी ने ऐसे पाया मुकाम
क्रिकेट में यशस्वी को यह उपलब्धि ऐसे ही नहीं मिली। क्रिकेट की पिच से जीवन की पिच पर उन्होंने मुश्किलें मैदान से बाहर करने की कोशिश की। कम उम्र में क्रिकेट का सपना देखना मुश्किल नहीं है लेकिन अभावों में सपने देखना मुश्किलों को बढ़ाने जैसा है। लेकिन यशस्वी ने हिम्मत दिखाई अपने सपनों को जुनून देने के लिए इस खिलाड़ी को मुंबई में टेंट में कीड़े-मकोड़ों के बीच सोना पड़ा। खर्च के लिए गोलगप्पे भी बेचे। यशस्वी उत्तर प्रदेश के सबसे छोटे जिले में शुमार भदोही के सरियावां बाजार में रहने वाले हैं। यशस्वी के पिता भूपेंद्र कहते हैं बचपन से ही बेटा क्रिकेटर बनना चाहता था। इसी के चलते 10 साल की उम्र में ही वह मुंबई चला गया। वहां एक रिश्तेदार के यहां रह कर उसने आजाद मैदान में प्रैक्टिस शुरू की। शुरुआत में ग्राउंड से बाहर ही दूसरे बच्चों के साथ खेलना पड़ा। नेट तक नहीं पहुंच पाया। आजाद ग्राउंड का ग्राउंडमेन रिलेटिव का परिचित था। उसने वहां रहने की व्यवस्था करवाई। करीब 3 साल तक यशस्वी टेंट में रहा और क्रिकेट की बारीकियां सीखी। इन तीन सालों में उसने बहुत संघर्ष किया। मात्र 17 साल की उम्र में यशस्वी अब घरेलू क्रिकेटर टीम में दोहरा शतक लगाने वाले दुनिया के सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने। लेकिन यशस्वी के लिए यह सब इतना आसान नहीं था। महज 10 साल की उम्र के उत्तर प्रदेश के भदोही से निकल मुंबई में भारतीय क्रिकेट के दिग्गजों के बीच अपनी पहचान बनाने के लिए यशस्वी को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। क्रिकेटर बन कर देश की तरफ से खेलने के सपने ने उनके सामने कई चुनौतियां पेश की। लेकिन वे अपने लक्ष्य को लेकर अडिग रहे और अपना काम करते रहे।

पिता ने कहा ताना मारने वाले आज खिंचवाते हैं फोटो
भूपेंद्र कहते हैं एक समय ऐसा था जब बेटे ने किराने की दुकान पर काम किया और गोलगप्पे भी बेचे। लेकिन उस समय जो लोग मुझे पागल कहते थे वह आज साथ में फोटो खिंचवाते हैं। पेपर हाथ में लेकर आते हैं फ़क्र से कहते हैं यशस्वी हमारा बच्चा है, बेटे ने मेरा सपना पूरा किया।

विजय हजारे में बना डाला वर्ल्ड रिकॉर्ड
यशस्वी अब तक विजय हजारे ट्रॉफी 2019 में मुंबई की तरफ से खेलते हुए एक दोहरा शतक सहित तीन शतकों की मदद से 5 मैचों में 504 रन बना चुके हैं। उन्होंने बुधवार को झारखंड के खिलाफ 149 गेंदों में अपना पहला दोहरा शतक लगाया और सबसे कम उम्र में ऐसा करने वाले दुनिया के सबसे पहले बल्लेबाज बन गए हैं। विजय हजारे ट्रॉफी की एक पारी में सबसे ज्यादा 12 छक्के लगाने वाले खिलाड़ी बन गये। यशस्वी ने इससे पहले एशिया कप में शानदार खेल दिखाया था और जमकर रन बटोरे थे।

भारतीय अंडर-19 टीम
प्रियम गर्ग,यशस्वी जयसवाल, तिलक वर्मा, दिव्यांश सक्सेना, शाश्वत रावत, दिव्यांग जोशी, शुभम हेगड़े,रवि बिश्नोई, आकाश सिंह, कार्तिक त्यागी, अर्थव अंकलेश्वर, कुमार कुशाग्र, (विकेट कीपर) सुशांत मिश्रा, विद्याधर पाटिल,धुरेल चंद जुरेल (उप कप्तान)

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