जानिए कौन है यह आयशा नाम की लड़की, जिसने जामिया हिंसा में निभाया अहम रोल

सोशल मीडिया पर जो वीडियो और फोटो वायरल हो रही है उसमें सबसे ज्यादा चर्चा आयशा की हो रही है। हालांकि साथ में रही लड़की लदीदा फरजाना की भी बात सोशल मीडिया पर चल रही है। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक घर से पुलिसकर्मी एक लड़के को बाहर खींच कर ला रहे हैं और आयशा लड़के को बचाने की कोशिश कर रही है। लेकिन पुलिस वाले उसे बाहर खींचने में कामयाब हो जाते हैं और लाठियों से काफी पीटते हैं। यह सब वायरल वीडियो में नजर आ रहा है।

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बता दे, देश नागरिकता संशोधन कानून को लेकर उबल रहा है। देश भर की यूनिवर्सिटी में छात्र इस कानून के विरोध में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन ज्यादा उबाल जामिया यूनिवर्सिटी में रविवार को देखा गया। जब शांति से हो रहा धरना प्रदर्शन उग्र हुआ और कुछ असामाजिक तत्वों ने DTC की 3 बसों समेत अन्य वाहनों को आग के हवाले कर दिया। इन सब के पीछे एक लड़की जिसका हाथ है उसका नाम है आयशा। उसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हम बात करते हैं आयशा की। वीडियो में जिस छात्र ने हिजाब पहना है उसका नाम आयशा रैना और उसके पीठ के पीछे है लदीदा फरजाना। वहीं जिस लड़के को पुलिस पीट रही है उसका नाम है शाहीन अब्दुल्ला।

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दरअसल आयशा जामिया यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग में पोस्ट ग्रेजुएशन की छात्रा है। जिसकी उम्र 22 साल है। आयशा के अनुसार शाम के लगभग 5:30 बजे उन्होंने कुछ लोगों को भागकर आते हुए देखा। पुलिस वाले लाठियां बरसा रहे थे। ऐसे में वह एक घर में घुस गए लेकिन गेट पर गाड़ी खड़ी थी और वह गेट बंद नहीं हो पाया। वहीं पुलिस ने उन्हें बाहर आने को कहा लेकिन जब वह बाहर नहीं आए तो पुलिस वालों ने अब्दुल्ला को बाहर खींचकर उसे खूब पीटा। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि आयशा जामिया की छात्रा नहीं है बल्कि यश फाउंडेशन में काम करती है। वहीं जिस घर में घुसे थे वहां के आसपास के लोगों का कहना है कि जिस लड़के को छुपाने की यह लोग कोशिश कर रहे थे वह पुलिस से बचकर इस घर में आया था।

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वहीं दूसरी तरफ पुलिस वाले की मानें तो वो प्रदर्शनकारियों में शामिल था। वहीं आयशा की एक ऐसी फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। जिसमें वह अलग-अलग जगह पर अलग-अलग कपड़े में प्रदर्शन कर रही है। आपको बता दें, आयशा स्टूडेंट नहीं है। केरल की रहने वाली हैं, और यश फाउंडेशन में काम करती है। यह फाउंडेशन कश्मीर और केरल सहित अन्य राज्यों में इस्लामी मदरसे और स्कूल चलाता है। स्टूडेंट ना होने के बावजूद आयशा 3 दिन तक लगातार जामिया के छात्रों के प्रदर्शन में शामिल रहीं। जब आयशा के पुरुष साथी पत्थर मारकर घर में घुस गए, पुलिस ने पकड़ लिया तो आयशा और उनकी महिला साथी अपने पत्थर बाज पुरुष साथी को बचाने आई। इन सबकी सोच भी समझ लीजिए। जब आतंकी याकूब को फांसी दी गई तो उसने फेसबुक पर लिखा याकूब मेमन माफ करना मैं इस फासिस्ट देश में असहाय हूं।

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