वामपंथी विचारधारा वाले लोगों के प्रोपेगेंडा को VHP ने जड़ा तमाचा, मंदिरों में 5000 प्रशिक्षित दलित पुजारी

देश में वामपंथी विचारधारा वाले लोग हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अश्लील टिप्पणी करने की वजह से सुर्खियों में रहते हैं. वामपंथियों पर हिंदू और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के भी आरोप लगते आए हैं. हाल ही में वामपंथियों ने आरोप लगाया था कि हिंदू मंदिरों में दलित पुजारी नहीं रखे जाते हैं. अब विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने वामपंथियों के मुंह पर करारा तमाचा जड़ा है. वीएचपी ने बताया है कि 5000 ऐसे पुजारियों को प्रशिक्षित कर विभिन्न मंदिरों में नियुक्त किया है, जो एससी-एसटी (दलित) समुदाय से आते हैं.

वीएचपी ने बताया है कि उसके निवेदन के बाद विभिन्न राज्य सरकारों ने भी अपने पैनल में दलित पुजारियों को जगह दी है. खासकर दक्षिण भारत में संगठन को इस कार्य में खासी सफलता मिली है. अकेले तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में एससी-एसटी (दलित) समुदाय के 2500 पुजारियों को प्रशिक्षित किया गया है.

खबरों में बताया गया था कि विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) की 2 संस्थाओं ने मिल कर इस उल्लेखनीय कार्य को सफल बनाया है. इसके अंतर्गत एससी-एसटी समुदाय के ऐसे लोगों को, जो पूजा-पाठ कराने की प्रक्रिया सीखने में दिलचस्पी रखते हैं, प्रशिक्षित किया जाता है. प्रशिक्षण के बाद उन्हें प्रमाण-पत्र भी दिया जाता है. दक्षिण भारत में ऐसे प्रशिक्षित पुजारियों को तिरुपति बालाजी मंदिर से सर्टिफिकेट दिलाया जाता है.

प्रशिक्षण के बाद जब वो अलग-अलग तरीके से पूजा-पाठ कराने और अलग-अलग अवसरों पर पूजा प्रक्रिया संपन्न कराने में सक्षम हो जाते हैं, तभी उन्हें प्रमाण-पत्र दिया जाता है। विहिप का कहना है कि 1964 में वो अपनी स्थापना के साथ ही जातिगत भेदभाव और छुआछूत को खत्म करने के भगीरथ प्रयासों में रत है. संगठन ने गिनाया कि कैसे जातिगत भेदभाव को खत्म कर के उसने हिंदुत्व की भावना को धरातल पर उतारने का प्रयास किया है.

एससी-एसटी समुदाय के कल्याण में लगा विश्व हिन्दू परिषद

बता दें कि खुद विनोद बंसल भी दिल्ली स्थित ईस्ट ऑफ कैलाश के जिस आर्य समाज मंदिर में रहते हैं, वहाँ भी महिलाएँ ही पूजा-पाठ का सारा कार्य कराती हैं। मीडिया अक्सर उन ख़बरों को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करते हुए हिंदुत्व की बुराइयाँ गिनाने में लग जाता है, जिनमें कहा जाता है कि फलाँ दलित को फलाँ मंदिर में नहीं घुसने दिया गया। बंसल कहते हैं कि विहिप भी इन ख़बरों से चिंतित रहता है।

उन्होंने कहा कि विहिप ने समाज के पिछड़े लोगों को प्रशिक्षित कर पुरोहित का कार्य देकर सामाजिक समरसता के क्षेत्र में कदम उठाया है, जिसमें आगे बहुत कुछ होना है। बता दें कि कुछ ही दिनों पहले अयोध्या के राम मंदिर में भी दलित पुजारी की नियुक्ति की माँग उठी थी। वामपंथी अक्सर हिन्दू समाज पर जातिवादी होने का आरोप लगाते हुए दलित-राग अलापते रहते हैं और कई बार उन्हें भड़काने का भी काम करते हैं।

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