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Thursday, September 23, 2021

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का बड़ा बयान मुख्यमंत्री पद पर हमारा हक ही नहीं, बल्कि ज़िद भी

शिंदे बने शिवसेना विधायक दल नेता। आदित्य ने किया शिंदे के नाम का प्रस्ताव।एकनाथ शिंदे को शिवसेना विधायक दल का नेता चुना गया है। उनके नाम का प्रस्ताव वर्ली विधायक आदित्य ठाकरे ने रखा। कयास लगाए जा रहे थे कि आदित्य को विधायक दल का नेता बनाया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक उद्धव ठाकरे इसके इच्छुक नहीं थे।

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50-50 पर सीएम के बयान से नाराजगी
ढाई- ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बनाने और सत्ता में 50-50 हिस्सेदारी से जुड़ी शिवसेना की मांग पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बयान से उद्धव ठाकरे नाराज है। उन्होंने कहा कि फडणवीस को इस तरह का बयान नहीं देना चाहिए थे। उसके बाद से दोनों दलों के बीच बातचीत बंद है।

महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन को लेकर सस्पेंस बरकरार है। शिवसेना नई सरकार में 50-50 के फार्मूले पर अड़ गई है। पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को कहा कि सत्ता के लिए आत्म सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि सीएम पद पर हमारा हक ही नहीं, बल्कि जिद भी है।

पार्टी मुख्यालय शिवसेना भवन में विधायक दल की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, कि “हमें भाजपा की ओर से कोई ऑफर नहीं मिला है। आप अफवाहों पर ध्यान ना दें। हम अपने मित्र दलों को शत्रु नहीं मानते। हम तो बस यही चाहते हैं कि गठबंधन के समय जो तय हुआ है, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह उस पर अमल करें। सहयोगी दल ने वादा निभाया तो हम स्थिर सरकार देंगे।”

चाणक्य का शिवसेना को समर्थन का ऑफर
इस बीच कांग्रेस के राज्यसभा सांसद हुसैन दलवई और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने फिर से शिवसेना को समर्थन का ऑफर दिया है।दोनों ही नेताओं ने कहा कि भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए पार्टी शिवसेना का समर्थन कर सकती है। चव्हाण ने कहा कि यदि शिवसेना की तरफ से प्रस्ताव मिला तो पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से बात करेंगे।

पार्टी के रुख में कोई नरमी नहीं
विधायक दल की बैठक से पहले ट्वीट कर शिवसेना नेता संजय रावत ने कहा कि पार्टी के रुख में कोई नरमी नहीं आई है। पार्टी 50-50 फार्मूले पर अमल चाहती है, इससे ज्यादा चाहिए और ना ही कम।

बच्चा पार्टी न समझें–
शिवसेना के मुखपत्र सामना में भी यह कहते हुए भाजपा पर निशाना साधा गया है कि हमें बच्चा पार्टी समझने की भूल किसी को नहीं करनी चाहिए। इधर-उधर की बातें करने के बजाय जो फार्मूला तय हुआ है उस पर ईमानदारी से अमल होना चाहिए।

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