भिखारी की ट्रेन की टक्कर से मौत झोपड़ी में मिला लाखों का खजाना देख कर उड़ गए होश

हम किसी भिखारी को देख कर उसके गरीब होने का अनुमान नहीं लगा सकते हैं। राह चलते स्कूल और स्टेशन के पास बैठे भिकारी को लोग कुछ पैसे दे देते हैं। कभी-कभी भिखारी का हुलिया देखकर हम उसके वास्तविक स्थिति को समझने में भूल कर बैठते हैं और उसे कुछ आर्थिक मदद कर भी देते हैं। जबकि वास्तव में वह भिखारी भी ना हो, क्योंकि बड़े शहरों में लोगों ने इसे पेशा भी बना रखा है। कुछ लोग सवेरे सवेरे परिवार सहित भिखारी का भेष बनाकर निकल पड़ते भीख मांगने और शाम को इतना पैसा एकत्र कर लेते हैं कि आजीविका भी चला सके और कुछ बचत भी कर सके। यह परिवार शाम को घर आकर ऐशो आराम की जिंदगी भी जीते हैं, इनके पास बैंक बैलेंस, बंगला, कार और नौकर चाकर आदि सब सुख सुविधाएं होती है। इनके बच्चे भी अच्छे स्कूल और कॉलेजों में पढ़ रहे होते हैं।

इसी तरह का एक वाकया हमारे सामने आया है, मुंबई में गोवंडी रेलवे स्टेशन पर एक भिखारी की लोकल ट्रेन की टक्कर से शुक्रवार को मौत हो गई। जब पुलिस को उसकी मौत की सूचना मिली और उसके घर पहुंचे तो उनके होश उड़ गए।

रेलवे पुलिस को झोपड़ी में पैसों से भरी बोरियां और थैलियां मिली जिसमें लगभग ₹200000 के सिक्के और और केश थे, जिन्हें गिनने में पुलिस को 8 घंटे लगे। फिलहाल जीआरपी पुलिस ने भिखारी की पहचान बीरधीचंद आजाद के रूप में की है, जो राजस्थान का रहने वाला है। पुलिस भिखारी के बेटे की तलाश में जुटी है और जीआरपी ने एक्सीडेंट का केस भी दर्ज किया है। आजाद वर्षों से स्टेशन पर ट्रेनों में भीख मांगता था, आजाद झोपड़ी में रहता था। पुलिस की छानबीन के बाद पता लगा कि उसका बेटा और परिवार भी साथ रहते थे, लेकिन बाद में उसको छोड़ कर चले गए और गुजारे के लिए उसे भीख मांगने के लिए मजबूर होना पड़ा।

परिजनों को सूचना देने की कार्यवाही चल रही है

शुक्रवार को रेलवे लाइन क्रॉस करते वक्त उसकी ट्रेन की टक्कर से मौत हो गई थी। रेलवे पुलिस को भिखारी आजाद की झोपड़ी से आधार कार्ड, पैन कार्ड और सीनियर सिटीजन कार्ड मिला है, जिस पर राजस्थान का पता लिखा है। इतना ही नहीं भिखारी के घर से बैंक की पासबुक भी मिली है जिसमें कुल ₹877000 जमा कराने की रसीद भी मिली है।

स्टील के डब्बे में रखे थे पैसे

वही आजाद की झोपड़ी खोजने वाले जीआरपी के सब इंस्पेक्टर प्रवीण कामले ने कहा वहां हमें चार डिब्बे मिले जिसमें एक, दो, पांच व दस रुपये के सिक्के से भरे पैकेट रखे गए थे।
कागजात के आधार पर पता चला कि आजाद का जन्म 27 फरवरी 1937 को हुआ था। पिछले कुछ सालों से वह शिवाजी नगर के बैंगन वाड़ी में रह रहा था। इसके अलावा झोपड़ी में आजाद से जुड़े कुछ और भी कागजात मिले, जिसमें अलग-अलग बैंकों के पासबुक भी मिले हैं। जिसमें एक मैं 8 लाख 770000 का फिक्स डिपॉजिट और अलग-अलग बैंक के बचत खाते में कुछ ९६ हजार रुपए जमा है। फिलहाल पुलिस ने भिखारी के घर से पैसों को जप्त कर लिया है और आधार कार्ड पर दिए पते के आधार पर उसके परिवार वालों को खोजने के लिए जीआरपी रवाना हो गई है।

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