लड़कियों को अमित शाह को CAA विरोध के पोस्टर दिखाना पड़ा महँगा, मकान मालिक ने घर से निकाला

पूरे प्रदेश में नागरिकता कानून और NRC का विरोध बहुत तेजी से बढ़ता जा रहा है। तमाम यूनिवर्सिटी के छात्र और शिक्षक सड़कों पर इस कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। जिसको लेकर PM मोदी और अमित शाह दोनों चिंतित हो गए हैं। उन्हें अब लोगों के बीच इस कानून के बारे में सरकार का पक्ष बताने जाना पड़ रहा है। बीते रविवार शाम को गृह मंत्री अमित शाह साउथ ईस्ट दिल्ली के लाजपत नगर इलाके के घरों और दुकानों में जाकर लोगों को नागरिकता संशोधन कानून के फायदे गिनाने पहुंचे थे। जहां एक मकान से दो लड़कियों ने इस नागरिकता कानून के खिलाफ एक पोस्टर दिखाया।था। दिल्ली के लाजपत नगर में गृहमंत्री अमित शाह की रैली के दौरान नागरिकता कानून का विरोध करने पर दो लड़कियों से मकान खाली करवाया गया। दरअसल, अमित शाह नागरिक कानून समर्थन के लिए जागरूकता अभियान के लिए निकले थे। इस दौरान एक मकान की छत से दो लड़कियों ने अमित शाह को CAA कानून के विरोध में नारे लिखे पोस्टर दिखाएं। दोनों लड़कियों ने अमित शाह की रैली के दौरान बालकनी से “शेम” “आजादी” “जय हिंद” “NRC” और “CAA”जैसे नारे लिखे बैनर लहराए थे।

जिसके बाद सरकार समर्थित भीड़ उनके घर के बाहर हंगामा करने लगी और उन्हें मारने डराने की कोशिश की। उसके बाद लड़कियों को अपने कमरे का दरवाजा बंद कर कई घंटों रूम में बंद रहना पड़ा। बाद में पुलिस के आने के बाद भीड़ को वहां से भगाया। लेकिन मकान मालिक जो कि खुद सरकार समर्थित भीड़ में शामिल था। लड़कियों को मकान खाली करने को कह दिया। जिसके बाद लड़कियों ने डर की वजह से घर खाली कर दिया। जब मकान मालिक से इस संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि कभी उन्हें किराए पर मकान नहीं देना चाहिए था। विरोध जताने वाली दो लड़कियों में से एक पेशे से वकील 27 वर्षीय सूर्या रजप्पन ने कहा, “गृह मंत्री को सीधे सुनाने का हमारे पास एक ही मौका था। यदि उस वक्त में ऐसा नहीं करती तो यह मेरी सबसे बड़ी गलती होती। मुझे पूरी जिंदगी इसका अफसोस रहता।” रजप्पन ने कहा, “वह रविवार को विरोध करने के लिए केवल अपने संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग कर रही थीं। उन्होंने कहा कि उन्हें लगा कि गृह मंत्री के सामने विरोध जताने का यही सही मौका है”।

उन्होंने कहा, “गृह मंत्री ने हमारी ओर देखा भी नहीं, लेकिन मुझे यकीन है कि उन्हें हमारे विरोध का पता चल गया होगा। रजप्पन हाई कोर्ट की वकील और बौद्धिक संपदा अधिकार से जुड़े मामलों की वकालत करती हैं। उनका परिवार दूसरे हिस्से में रहता है और 2 महीने पहले ही वह अपने दोस्त के साथ लाजपत नगर के एक मकान में शिफ्ट हुई थीं। मूल रूप से केरल की रहने वाली रजप्पन ने कहा हमने शाह या सरकार के खिलाफ कोई आपत्तिजनक या व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की। वह कहती है, “नारे लगाने से गलियों से गुजर रहे लोगों का ध्यान हमारी ओर आकर्षित हुआ। वे गालियां देने लगे और चिल्लाने लगे कि ये मीडिया में बनने के लिए ऐसा कर रही हैं।” इसके साथ यह भी कहा, “हम नागरिकता अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का हिस्सा रहे हैं। हमने अधिनियम पूरा पढ़ा है और जानते हैं कि यह देश के लिए अच्छा नहीं है।” लड़कियों ने यह भी दावा किया कि रविवार को अपनी बालकनी में बैनर दिखाने के तुरंत बाद अमित शाह की रैली में मौजूद रहे लोगों ने उन्हें और उनके मकान मालिक को डराया और अभद्र टिप्पणी की। उन्होंने यह भी कहा कि उनका मकान मालिक भीड़ का हिस्सा था। पिछले दिनों नागरिकता कानून का विरोध कर रहे दिल्ली के छात्रों के ऊपर मोदी सरकार पुलिस संगठनों द्वारा रविवार की रात इस कानून का विरोध करने वाले छात्रों, शिक्षकों के ऊपर जानलेवा हमले किए गए।

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