संतों द्वारा एक दलित से करवाया गया था मंदिर का शिलान्यास, दलित ने कही इतनी बड़ी बात

9 नवंबर 1989 यही वह तारीख थी, जब केंद्र की तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी सरकार की अनुमति के बाद 30 साल पहले अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर की नींव पड़ी थी। शिलान्यास के लिए पहली ईंट विश्व हिंदू परिषद के तत्कालीन ज्वाइंट सेक्रेटरी कामेश्वर चौपाल ने रखी थी। चौपाल का नाता बिहार से है, और वह दलित समुदाय से हैं। शिलान्यास के लिए देश से 2 लाख लोगों से ईंटे आई थी। जब उन्होंने राम मंदिर की पहली ईंट रखी थी। तो इसके साथ ही उन्होंने, “राम नहीं तो, रोटी नहीं” का नारा भी दिया था।

बिहार के सुपौल निवासी 65 वर्षीय कामेश्वर ने बताया कि शिलान्यास में पहली ईट रखने वाले पल कों में जिंदगी भर नहीं भूल पाऊंगा। पहली ईंट रखने का वह पल हमें आजीवन गर्व की अनुभूति कराता है। उन्होंने कहा कि संतो द्वारा एक दलित के हाथों से मंदिर का शिलान्यास कराना मेरे लिए श्री राम जी को शबरी द्वारा बेर खिलाने जैसा है। आज का दिन पूरे दलित वर्ग के लिए गौरव का है। समाज मैं दलितों को अछूत माना जाता है।

भव्य राम मंदिर की नींव एक दलित के हाथों रखी गई थी। इसे सामाजिक सौहार्द के नजरिए से किया गया फैसला बताते हैं। जब अयोध्या में राम मंदिर के बनाने का संघर्ष चल रहा था तब विश्व हिंदू परिषद के आह्वान पर राम मंदिर निर्माण के लिए बिहार से कामेश्वर चौपाल भी ईंट लेकर अयोध्या पहुंचे थे। गौरतलब है कि राम मंदिर की नींव के लिए पहली ईंट रखने के साथ ही चौपाल इतने मशहूर हो गए कि वे दो बार बिहार विधान परिषद के सदस्य भी बने। बता दे, भगवान श्रीराम का नाता बिहार से भी रहा है। उनकी पत्नी सीता माता बिहार के सीतामढ़ी की रहने वाली थी। तब से लेकर सीतामढ़ी और अयोध्या के रिश्ते प्रगाढ़ माने जाते हैं।

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