एक साथ मां और कांस्टेबल की ड्यूटी निभा रही पुलिसकर्मी, ऐसी क्या थी मज़बूरी

अमेरिकी राष्ट्रपति की गिनती दुनिया के सबसे रसूख वाले इंसानों में की जाती है। यही वजह है कि डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे को लेकर भारत में पूरे जोर-शोर से तैयारियां की गई। उनके साथ उसकी पत्नी मेलानिया ट्रंप, बेटी इवांका ट्रंप और दामाद जैरेड कुशनेर भी मुख्य अतिथि होंगे।ट्रंप परिवार आज भारत पहुंच चुका है। गुजरात के अहमदाबाद में ट्रंप पीएम नरेंद्र मोदी के साथ भव्य रोड शो करते हुए यहां मौजूद दुनिया की सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम “मोटेरा” का उद्घाटन भी करेंगे। VVIP मूवमेंट की वजह से अहमदाबाद में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा के मद्देनजर हजारों सुरक्षाकर्मियों को ड्यूटी पर तैनात किया गया है। सुरक्षा कर्मियों के काफिले में शामिल अहमदाबाद के विसात में एक महिला कांस्टेबल ने अपने कर्तव्य और घरेलू दायित्व को एक साथ संभालकर अनूठी मिसाल पेश की है।

एक साल के बच्चे को संभालना कोई आसान काम नहीं। इसके बारे में उन मांओं और परिजनों से पूछिए जो नन्हे मासूम को संभालने में मशक्कत करते हैं। ऐसे में एक साल के मासूम को साथ में लेकर ड्यूटी करने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। हालांकि गुजरात के अहमदाबाद में एक मां इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही है। गुजरात पुलिस में कांस्टेबल संगीता परमार के सामने एक चुनौती तो कानून व्यवस्था को संभालने की दूसरी अपने एक साल के बच्च को पालने-पोसने की। अपनी ड्यूटी निभाते हुए रोजाना इस चुनौती से पार पाती है। दरअसल यह महिला अपने 1 साल के बेटे को साथ लेकर ड्यूटी करेंगी। संगीता परमार नाम कि महिला गुजरात पुलिस में कांस्टेबल के पद पर तैनात है। संगीता ने खुद इस बारे में बात करते हुए कहा हां यह थोड़ा मुश्किल है, लेकिन यह मेरी जिम्मेदारी है। मैं मां और बतौर कांस्टेबल अपने कार्य का निर्वहन पूरी ईमानदारी के साथ करूं।

कांस्टेबल संगीता परमार का कहना है, “यह मुश्किल है लेकिन मेरी जिम्मेदारी एक मां और एक पुलिसकर्मी दोनों के रूप में है।संगीता परमार अपने काम को लेकर कितनी सजग है इस बात का अंदाजा इससे हो सकता है कि फिलहाल मुझे ड्यूटी को निभाना है। मेरा बच्चा भी ठीक नहीं है इसलिए मुझे अपने साथ लेकर आना पड़ता है। मैं उसे यहीं पर अपना दूध पिलाती हूं।सोशल मीडिया पर लोग संगीता के जज्बे को सलाम कर रहे हैं।

संगीता ने बताया कि अमदाबाद जब आई तो पहले बेटे को तैनाती स्थल से 24 किलोमीटर साकेत गांव में एक रिश्तेदार के यहां छोड़ा ।एक दिन बेटे को वहां छोड़ा था। वह अभी छोटा है। उसे कई बार फीडिंग कराना होता है। मेरे बिना वह दिन भर रोया। इसके बाद में उसे अपने साथ ही लाने लगी। मैं यहां सुबह 8 बजे आती हूं और रात 9 बजे चली जाती हूं। कोशिश करती हूं कि दोनों जिम्मेदारियों को ठीक से निभा लूं।

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