सबरीमाला केस सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी बेंच को सौंपा, मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से जुड़ा है मामला

अयोध्या मामले में फैसला सुनाने के बाद देश की सर्वोच्च अदालत आज सबरीमाला और राफेल सौदे के मामले में अपना अंतिम फैसला सुनाएगी। सबरीमाला मामले में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में न्याय मूर्तियों की संविधान पीठ ने फरवरी में बहस पूरी कर ली थी और अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। जिसको आज सार्वजनिक किया जाएगा। दोनों ही मामलों की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश सीजेआई रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पीठ कर रही है। सीजेआई 17 नवंबर को सेवानिवृत्त होंगे। सीजेआई गोगोई, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की पीठ गुरुवार को ही सबरीमाला मामले में पुनर्विचार याचिकाओं पर फैसला सुनाएगी। उसके बाद सीजेआई गोगोई, जस्टिस संजय कृष्ण कौल व जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ रफाल पर पुनर्विचार याचिका पर फैसला देगी।

क्या है सबरीमला मामला
सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी हटा दी थी। साथ ही कहा था कि महिलाओं के सबरीमाला मंदिर में प्रवेश पर पाबंदी असंवैधानिक है। इस फैसले का भगवान अय्यप्पा के अनुयायी भारी विरोध कर रहे। उनका कहना है कि मंदिर के भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी है और 10 से 50 साल की महिलाओं से मंदिर की प्रकृति बदल जाएगी।

सबरीमाला मंदिर: पांच जजों की संबंधित संवैधानिक पीठ ने 4:1के बहुमत से 28 दिसंबर 2018 को केरल के सबरीमला मंदिर में स्त्रियों के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटाते हुए सभी आयु की महिलाओं के प्रवेश को अनुमति दी थी। पीठ ने कहा था, “भक्ति में लैंगिक भेदभाव नहीं हो सकता” । कई धार्मिक संगठनों व राजनीतिक दलों ने इसे परंपरा का उल्लंघन करार दिया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार के लिए19 पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की थी।पीठ ने इन पर फरवरी में सुनवाई पूरी कर ली थी।

रफाल सौदा याचिका पर सुनवाई
लोकसभा चुनाव के दौरान राफेल विमान डील का मामला काफी सुर्खियों में रहा है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल डील को लेकर पीएम मोदी को जमकर घेरा था। उन्होंने इस मामले को लेकर पीएम मोदी को “चौकीदार चोर है” तक कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमान खरीदने को लेकर दो जनहित याचिका दायर की गई थी। जिस पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया था। इसके अलावा लड़ाकू विमान की कीमत करार और कंपनी की भूमिका पर सवाल खड़ा किया था। अटाॅर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल ने पीठ से कहा था, “हमने एक आईजीए पर हस्ताक्षर किया है। उसका पालन करने को मजबूर हैं, राफेल सजावट के लिए नहीं है। यह देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है। दुनिया में कहीं भी ऐसे मामले अदालत में नहीं जाते।”

सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिसंबर 2018 को फ्रांसीसी कंपनी दस्सु उसे 36 रफाल युद्धक विमानों के सौदे की जांच का आदेश देने से इनकार कर दिया था। बाद में अदालत ने कुछ नए तथ्यों के सामने आने की दलील पर पुनर्विचार याचिका स्वीकार की थी। जिस पर मई 2019 में सुनवाई पूरी कर ली थी।
भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी द्वारा राहुल गांधी के खिलाफ दायर मानहानि केस में भी सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना सकती है। पीएम नरेंद्र मोदी के लिए “चौकीदार चोर है” के नारे के प्रयोग को सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जोड़ने के खिलाफ लेखी ने अवमानना याचिका दाखिल की थी।

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