कभी सड़क किनारे परिवार के लिए बेचता था घास अब है दर्जनों बेसहारा बच्चों का सहारा यह शख्स

कभी परिवार खर्च चलाने के लिए बचपन में खेतों से घास काटकर सड़क पर बेचने वाला शख्स आज दर्जनों बेसहारों के लिए सहारा बन गया है। यूपी के अयोध्या के रहने वाले राजन पांडेय एक दर्जन अनाथ बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा रहे हैं। राजन पांडेय के इस कार्य की पूरे क्षेत्र में चर्चा है।

स्कूल से छूटने के बाद बेचते थे घास
राजन ने बताया स्कूल से छूटने के बाद घास काट कर पास के बाजार में बेचने जाया करता था। इससे 10 या 20 पैसे मिलते थे। इस पेसों से खाने के लिए कुछ चीज आ जाती थी। इन सब में इतना टाइम निकल जाता था कि पढ़ाई भी ठीक से नहीं हो पाती थी।

बेहद दयनीय थी घर की आर्थिक स्थिति
राजन पांडेय ने बताया, “फैजाबाद जिले के कुमारगंज थाना क्षेत्र के शिवनाथ पुर गांव का रहने वाला हूं। मेरे पिता राम सरदार पांडेय एक मामूली किसान थे। हम तीन भाई हैं। पढ़ाई से लेकर घर का खर्च काफी मुश्किल से चलता था। जब मैं 6 साल का था तो गांव के प्राथमिक पाठशाला में दाखिला करा दिया। लेकिन घर की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय थी जिससे पढ़ाई – लिखाई ढंग से नहीं हो पाती थी।”

ऐसे मिला रास्ता ओर बदल गई जिंदगी
राजन ने कहा जब मैं 17 साल का था। उस समय मेरी पहचान नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय कुमारगंज के प्रोफेसर डॉ जे. एन. तिवारी से हुई वह मेरी मेहनत देखकर काफी प्रभावित हुए। उस समय यूनिवर्सिटी में निर्माण कार्य के दौरान पेड़ काटे जाने थे। प्रोफेसर के प्रयास से मुझे पेड़ों को कटवाने का ठेका मिला। नीलामी के लिए मुझे 5 हजार रुपए दोस्तों-रिश्तेदारों से उधार लेने पड़े और यूनिवर्सिटी में जमा करे। पेड़ काटकर बेचने पर 30 हजार रुपए मिले उसके बाद मेरी जिंदगी बदल गई।

दिन रात मेहनत कर पूरी की शर्त तो बदली लाइफस्टाइल
राजन का कहना है कि मुझे आज भी याद है 3 मार्च 1998 को प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल डॉ रमेश भंडारी यूनिवर्सिटी आने वाले थे। उसके लिए सड़कों पर हुए गड्ढों में मिट्टी भरवानी थी। जब मुझे पता चला तो मैं वहां के निदेशक निर्माण डॉ आ. एन. दीक्षित से मिला। लेकिन उन्होंने मुझे डांट कर भगा दिया। वजह यह थी कि उस समय तक मुझे कोई जानता नहीं था और काम जल्द पूरा होने के लिए बड़े ठेकेदार को काम दिए जाने की योजना थी। हालांकि काफी मिन्नतों के बाद मुझे काम मिल गया। उस समय मेरे पास शर्त रखी गई की 4 दिन बाद राज्यपाल का दौरा है उससे पहले काम पूरा हो जाना चाहिए। मैंने यह काम 24 घंटे में पूरा कर दिया इसमें मुझे लगभग 1 लाख रुपए का फायदा हुआ था। इसके बाद मेरी इमेज अच्छी बन गई।

लगभग एक दर्जन अनाथ बच्चों का कर रहे हैं पालन
राजन इस समय बीकापुर इलाके के भावापुर में चार, जस रामपुर गांव में 6 अनाथ बच्चों का पालन कर रहे हैं। इन बच्चों के मां-बाप गुजर चुके हैं। इनके अलावा भी वह आधा दर्जन से अधिक गरीब परिवारों की जिम्मेदारी उठाते हैं। इनके पढ़ने-लिखने और खाने-पीने से लेकर सारा खर्च खुद ही उठाते हैं। इनके इस नेक काम में उनकी पत्नी डॉ तृप्ति पांडेय और 3 बच्चे अमित, अंकित और अर्पित मदद करते हैं।

Leave a Comment