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पीएम मोदी के लिए दुखद स्थिति, अपने गुरु के निधन पर भावुक हो संवेदना प्रकट की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वेश तीर्थ स्वामीजी के निधन पर शोक जताया है। उनके निधन पर पीएम मोदी सहित कई राजनीतिक हस्तियों ने भी शोक व्यक्त किया है। पीएम मोदी ने कहा मैं खुद को धन्य मानता हूं कि मुझे विश्वेश तीर्थ स्वामी से सीखने के कई अवसर मिले। हाल ही में गुरु पूर्णिमा के पावन दिन की बैठक भी यादगार रही। उनका ज्ञान हमेशा बना रहा। मेरे विचार उनके अनगिनत अनुयायियों के साथ हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने विश्वेश तीर्थ स्वामी के साथ अपनी तस्वीरें ट्वीट करते हुए लिखा, “स्वामी जी हमेशा उन लाखों लोगों के दिलों दिमाग में रहेंगे जिन्होंने उनको सही राह दिखाई थी।” पेजावर मठ के प्रमुख विश्वेश तीर्थ स्वामी का रविवार को 88 साल की उम्र में निधन हो गया है। कर्नाटक सरकार ने स्वामी जी के निधन पर 3 दिन (29, 30 और 31 दिसंबर) का राजकीय शोक घोषित किया है। उनकी हालत पिछले कई दिनों से गंभीर बनी हुई थी। हालत बिगड़ने के बाद उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर भी रखा गया था। रविवार को ही उन्हें केएमसी अस्पताल से मठ ले जाया गया था और मठ में उनका इलाज जारी रखने की बात कही गई थी। इससे पहले, डॉक्टरों ने कहा था कि स्वामी जी का निमोनिया का इलाज चल रहा था। तटीय क्षेत्र का दौरा कर रहे कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा भी शनिवार को अस्पताल पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से कहा कि, “स्वामी जी का स्वास्थ्य हर पल बिगड़ रहा है और डॉक्टर अपनी ओर से पूरा प्रयास कर रहे हैं लेकिन सुधार नहीं हो रहा है।” मुख्यमंत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि, “स्वामी जी की हालत स्थिर है। डॉक्टर हरसंभव कोशिश कर रहे हैं और अब हमने सब कुछ भगवान कृष्ण पर छोड़ दिया है।”

उडुपी के पेजावर मठ के गुरु परंपरा के 33 वें गुरु थे श्री विश्वेश स्वामी। उनका जन्म 27 अप्रैल, 1931 को पुट्टुर के रामाकुंज में एक शिवाली मध्य ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम नारायणाचार्य और माता का नाम कमलम्म था। 1938 में 7 वर्ष की आयु में ही इन्होंने संन्यास धारण किया था। सन्यासी बनने के पहले इनका नाम वेंकटरामा था और वह भगवान वेंकटेश्वर के अनन्य भक्त थे। पेजावर मठ उडुपी के 8 प्रमुख मठों में से एक है। श्री विश्वेश तीर्थ स्वामी ने श्री भंडारकेरी मठ और पलिमारू मठ के गुरु श्री विद्यामान्या तीर्थ से दीक्षा ली थी। विश्वेश तीर्थ ने श्री विश्व प्रसन्ना तीर्थ को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया है। स्वामी जी ने कई सामाजिक संस्थाओं की नींव रखी थी। उनकी अगुवाई में कई शैक्षणिक और सामाजिक संस्थाओं की स्थापना की गई। स्वामी श्री विश्वेश तीर्थ के हाथों ही गरीब बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाने वाली अखिल भारतीय मध्य महामंडल की स्थापना हुई थी। पूरे देश में उन्होंने कई ऐसे धर्म स्थलों और मठों का निर्माण किया जो तीर्थ यात्रियों की सेवा में लीन है।

रामजन्मभूमि आंदोलन से लेकर गो रक्षा जैसे मुद्दों का इन्होंने पुरजोर समर्थन किया, शायद यही वजह है कि देश के ये “राष्ट्र स्वामी जी” के नाम से भी प्रसिद्ध से हुए। 1964 की शुरुआत से वे वीएचपी से जुड़े रहे और कई वर्षों तक इसके उपाध्यक्ष भी रहे। जब सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या पर राम मंदिर के पक्ष में फैसला दिया तो उन्होंने वहां भव्य मंदिर देखने की इच्छा प्रकट की थी। वह समाज में समरसता की वकालत करते थे और छुआछूत जैसी कुरीतियों के सख्त विरोधी थे। 2017 में उडुपी में धर्म संसद आयोजित कराने के पीछे वह एक प्रबल ताकत थे। मंगलूर के श्रीनिवास यूनिवर्सिटी ने समाज और राष्ट्र की सेवा के लिए स्वामी जी को डॉक्टरेट की मानद उपाधि से भी नवाजा था। बता दें कि पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती खराब स्वास्थ्य के बावजूद पिछले एक हफ्ते से उडुपी में है। 1992 में उन्होंने विश्वेश तीर्थ स्वामी से सन्यास दीक्षा ली थी। रविवार सुबह स्वामी जी के उडुपी श्री कृष्ण मठ पहुंचने की ख़बर मिलते ही वह मठ पहुंची थी। कुछ ही देर बाद स्वामी जी ने अंतिम सांस ली। उमा भारती ने उन्हें समाज के सभी वर्गों के लोगों के श्रद्धेय और दुर्लभतम संत बताया। उमा भारती ने कहा, “मेरे लिए वह न केवल गुरु हैं बल्कि पिता की तरह हैं। उनके स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करती हूं, क्योंकि समाज को स्वामी जी की बहुत जरूरत है। उन्होंने कहा मेरे गुरु एक कर्मयोगी है। और उन्होंने हम सभी को कर्म योगी बनने की शिक्षा दी।”

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