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जिसने राफेल पर कटघरे में खड़ा किया, उस बीमार आलोचक की खैरियत पूछने पहुंचे पीएम मोदी

इस वर्ष हुए लोकसभा में राफेल सबसे बड़ा मुद्दा बना था। मोदी सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से लेकर चुनावी रैलियों तक, हर जगह माहौल बनाने की कोशिश की गई थी। इन सब में प्रमुख नाम भाजपा के दो पूर्व दिग्गजों का था। पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा। इन दोनों को मीडिया के तमाम पोर्टल्स मे जगह मिली और उनके बयानों को प्रकाशित किया जाने लगा। यह दोनों मोदी सरकार के प्रखर आलोचकों में से थे। आज जब अरुण शौरी बीमार पड़े तो PM मोदी ने पुणे पहुंचकर अपने पुराने साथी का हालचाल जाना।

78 वर्षीय वरिष्ठ नेता शौरी रात को अचानक से गिर पड़े थे। उसके बाद परिजन आनन-फानन में उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे। शौरी एक सप्ताह से हॉस्पिटलाइज्ड हैं। उन्हें पुणे के अस्पताल में भर्ती किया गया है। डॉक्टर ने विभिन्न परीक्षण के बाद कहा कि उनकी हालत स्थिर है। PM मोदी अरुण शौरी से मिलने 8 दिसंबर 2019 को पुणे गए थे। जहां उन्होंने आपस में कई तस्वीरें साझा की। PM मोदी ने लिखा कि,

“अरुण शौरी के स्वास्थ्य की जानकारी लेकर अच्छा लगा तथा काफी समय तक बातचीत भी की”

रविवार को पीएम मोदी से मुलाकात के बाद तिखे आलोचक अरुण शौरी काफी खुश थे। लेकिन कुछ समय पूर्व तक, शौरी, प्रशांत भूषण और यशवंत सिन्हा के साथ नरेंद्र मोदी के खिलाफ प्रचार कर रहे थे। अरुण शौरी ने PM मोदी और व्यवसाई अनिल अंबानी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्यवाही की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए मजबूर किया गया क्योंकि सरकारी दबाव के कारण CBI मामला दर्ज नहीं कर रही थी। यह वही अरुण शौरी है जिसने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को त्रुटिपूर्ण बताते हुए खारिज कर दिया था। जिसमें मोदी सरकार को राफेल मामले में क्लीन चिट दी थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी, उन्होंने एक समीक्षा याचिका दायर की थी और अधिकारियों पर सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए एक याचिका भी दी थी।

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