पाक शरणार्थी हिंदू: हम भारत में भीख मांग कर भी खुश, कांग्रेस सरकार में तो यह भी मुमकिन नहीं होता

लोकसभा में दिनांक 9 दिसंबर 2019 को नागरिकता संशोधन विधेयक बहुमत से पास होने के बाद आज ऊपरी सदन में इसे पारित कराने के लिए बहस जारी है। माना जा रहा है कि आज शाम में या देर रात तक उस पर फैसला आ जाएगा। सारी तस्वीर साफ हो जाएगी। पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश के अल्पसंख्यक समुदाय के लोग इस फैसले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इनका मानना है कि केंद्र सरकार के इस कदम से इन सबके जीवन में उजाला आ जाएगा। इससे पहले 9 दिसंबर 2019 को लोकसभा में नागरिकता बिल पास होने के बाद पाकिस्तान से आए शरणार्थियों में खुशी की लहर दौड़ गई थी। दिल्ली में बसे पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थी ने मजनू के टीले पर जमकर जश्न मनाया। इस दौरान लोगों ने पीएम मोदीऔर गृहमंत्री अमित शाह जिंदाबाद के नारे लगाए। साथ ही “जय श्री राम” से भी इलाका गूंजाया गया। लोगों ने मिठाई बांटी और पीएम मोदी की तस्वीर को अपने घरों की दीवारों पर भी लगा दिया।

इन्हीं लोगों में गुलशन नाम का एक युवक है जो इसी वर्ष 14 मई को अपने तीन बच्चों के साथ भारत आए थे। यहां पर उन्होंने अपने बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिलाने के लिए न्यायिक लड़ाई लड़ी थी और अंत में सुप्रीम कोर्ट के वकील अशोक अग्रवाल की मदद से उन्हें स्कूल में दाखिला दिलवाने में सफल हुए थे। इस खुशी को अभी कुछ महीने ही बीते थे कि मोदी सरकार ने इस विधेयक नागरिकता संशोधन बिल को पेश करके उनके जीवन में एक और तोहफा दे दिया। गुलशन से बात कर जानना चाहा कि एक खुशी के बाद तुरंत मोदी सरकार के प्रयासों से मिलने वाली दूसरी सौगात पर उनकी क्या प्रतिक्रिया है और इस समय कैसा लग रहा है। सवाल सुनते ही गुलशन काफी भावुक हो गए और पूरे मामले पर बात करते हुए उनके शब्दों में उत्साह, भारत के प्रति प्रेम, वर्तमान सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। हम मोदी सरकार की बहुत तारीफ करते हैं। अगर हिंदुओं के प्रति किसी ने कुछ किया है तो वह मोदी सरकार है। वह जो कर रही है बहुत अच्छा कर रही है।

लोग हिंदू-मुसलमान कर रहे हैं

मुसलमानों को बताइये यहां पर क्या दिक्कत है? आपको क्या परेशानी है? पाकिस्तान में हिंदू तकलीफ में है, उन पर अत्याचार होते हैं तभी हम भारत आते हैं? कौन चाहता है अपना घर छोड़ना। हम अपना काम बिजनेस सब अपने धर्म को बचाने के लिए छोड़कर आए हैं। अपने बच्चों के लिए आए हैं। वहां हमारे बच्चे इतने पढ़े-लिखे थे फिर भी बच्चों की पढ़ाई आगे नहीं बढ़ रही थी। यहां आने के बाद हमने धक्के खाए, हमारे पास घर नहीं है, कोर्ट के दरवाजे खटखटाए। हम सिर्फ अपने बच्चों के लिए यहां आए। बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसा नहीं है। लेकिन फिर भी कहते हैं कि, “हम मजदूरी करके भी खुश हैं। हमें इस देश में इज्जत मिल रही है। सारी सुविधा मिल रही है। इससे ज्यादा और क्या चाहिए? हम यहां भीख मांग कर भी खुश हैं।”

मोदी सरकार के इस प्रस्ताव से हम बहुत खुश हैं। हम बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं कि वह हमें हमारा हक दे रहे हैं। हम यहां खुशी से जीना चाहते हैं। खुशी से रहना चाहते हैं। हमारे साथ कोई भेदभाव नहीं है। अब अधिकार मिलेंगे तो हमारे बच्चे आगे बढ़ेंगे, अच्छा करेंगे। हमारे बच्चे भी फौज में जाएंगे, सरकारी नौकरी करेंगे। हमें कोई दिक्कत नहीं है यहां पर। हमारा धर्म है और हम उसे बचाकर ही भारत आए हैं। गुलशेर जैसे बहुत से शरणार्थी हैं जो मुस्लिम बहुल देशों (पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश) में अल्पसंख्यक होने के कारण प्रताड़ना झेलनी पड़ी और आखिरी उम्मीद के साथ भारत आए और अब मोदी सरकार के प्रयास पर उन्हें धन्यवाद दे रहे हैं।

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