पाक फिर हुआ नाकाम, कश्मीर शारदा पीठ में 72 साल बाद दिया जला, हांगकांग रहवासी हिंदू दंपति ने की पूजा-अर्चना

पाकिस्तान की धरती पर 1947 के बाद से हिंदू धर्म से जुड़े तीर्थों और ऐतिहासिक स्थलों को खत्म करने में पाकिस्तानी सरकार ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है।इसीलिए पाकिस्तान की सरजमीं पर स्थित सभी विशेष महत्त्व के हिंदू तीर्थ खंडहर में तब्दील हो गए हैं। ऐसा ही एक तीर्थ पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित है, यह तीर्थ है मां शारदा पीठ। जहां पर 72 साल बाद नवरात्रों के दौरान किसी हिंदू ने पूजा अर्चना की।

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित मां शारदा पीठ में 72 साल बाद पहली बार पूजा-अर्चना हुई, यह पूजा हिंदू श्रद्धालुओं ने की है। हांगकांग से पहुंचे वेंकटरमन और उनकी पत्नी सुजाता को खंडहर हो चुके शारदा पीठ तक पहुंचने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। भारतीय मूल का होने के कारण पाक प्रशासन ने उन्हें शारदा पीठ तक जाने की अनुमति ही नहीं दी थी। कई दिन की पूछताछ के बाद एनओसी जारी की पूजा के लिए “सेव शारदा कमेटी” और पीओके के लोगों ने सहयोग दिया।

पाकिस्तान ने हाल ही में इसका रास्ता खोला

पीटी वेंकटरमन और उनकी पत्नी सुजाता को पीओके में शारदा पीठ का वीजा मिला था। दुर्गा अष्टमी के दिन वह यहां आए और विधिवत मां शारदा की पूजा अर्चना की। दंपत्ति हांगकांग से ही अपने साथ माँ शारदा और स्वामी नंद लाल जी की फोटो लेकर आए थे। इस दंपत्ति के आने से पहले बीते 3 दिनों में पीओके के लोगों ने जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाने के विरोध में नियंत्रण रेखा के पास मार्च किया था। ऐसे में भारतीय अधिकारियों ने पीओके कि सिविल सोसाइटी से वेंकटरमन दंपत्ति की सुरक्षा मुहैया करने की अपील की थी। बताया जा रहा है कि हांगकांग से यहां पहुंचे दंपत्ति ने माता के सभी शक्तिपीठ के दर्शन कर लिए थे। इसके बाद उन्हें पता चला कि 1 शक्तिपीठ पीओके मैं स्थित है। इसके बाद यह दंपति वहां जाने का प्रयास करने लगे।

बता दे कि पीओके में मां शारदा शक्तिपीठ पर आजादी के बाद से आज तक कोई नहीं जा सका था। हांगकांग से पहुंचे हिंदू दंपत्ति ने शक्तिपीठ की पूजा के बाद पाकिस्तान के कब्जे वाले किशनगंगा नदी के तट पर भी गए और वहां भी पूजा अर्चना की। शारदा मंदिर पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुका है और सरहदी क्षेत्र होने की वजह से यहां पर आए दिन गोलीबारी होती रहती है। नियंत्रण रेखा पर बढ़ते तनाव के बीच उस रात भी शारदा क्षेत्र में गोलीबारी हुई। वहां से सुरक्षित निकलने में दो स्थानीय लोगों ने उनकी मदद की। रविंद्र पंडित और अन्य लोगों ने कहा कि करतारपुर की तरह ही शारदा पीठ को फिर से खोले जाने की मांग की जाएगी।

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