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NCP के प्रवक्ता नवाब मलिक ने उद्धव ठाकरे को प्रशासनिक अनुभव में कमजोर बताते हुए चेतावनी दी

उद्धव ठाकरे ने मंत्रालय और सचिवालय के कुछ अधिकारियों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में उनके बेटे आदित्य ठाकरे भी मौजूद थे। लेकिन हंगामा इसे लेकर नहीं हुआ क्योंकि आदित्य विधायक भी है। उस बैठक में उद्धव की पत्नी रश्मि ठाकरे के भतीजे वरुण सरदेसाई की मौजूदगी ने सबको हैरान कर दिया। लोगों ने पूछा कि वरुण ने बिना किसी पद पर रहते हुए मीटिंग कैसे अटेंड कि?

“कोई ऐसा व्यक्ति सरकारी बैठक में कैसे भाग ले सकता, जो न तो सरकार का हिस्सा है और ना ही कोई जनप्रतिनिधि? वरुण पर्यटन के विशेषज्ञ भी नहीं है। ऐसे में उनका बैठक में शामिल होने का कोई तुक नहीं है।”

NCP ने भी इसके लिए खरी-खोटी सुनाई। महाराष्ट्र में शिवसेना-NCP-कांग्रेस की सरकार बने अभी 1 सप्ताह भी नहीं हुआ है लेकिन साझेदारों के बीच तल्खी की खबरें आने लगी है। NCP के प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि उद्धव ठाकरे के पास किसी तरह का प्रशासनिक अनुभव नहीं है और वह इससे पहले किसी पद पर भी नहीं रहे इसलिए यह गलती हुई। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री को चेतावनी देते हुए कहा कि इस बात का ध्यान रखें कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा ना हो। कांग्रेस भी वरुण के बैठक में शामिल होने से नाराज दिखी। पार्टी ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार किया है।

शिवसेना ने डैमेज कंट्रोल करते हुए कहा कि वरुण उत्सुकता वश उस बैठक में चले गए होंगे। वरुण सरदेसाई ने सफाई देते हुए कहा कि बैठक में किसी संवेदनशील मुद्दे पर बातचीत नहीं की गई। वरुण ने कहा कि बैठक में किसे बुलाना है और किसे नहीं, यह तय करना CM का अधिकार है। साथ ही उन्होंने बताया कि वो CM उद्धव की तरफ से उस बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। NCP को यह सफाई नहीं पसंद आई। NCP ने कहा भले ही यह बहुत बड़ी गलती नही हो, लेकिन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के अनुभव की कमी साफ दिख रही है।

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