न लोहा, ना सीमेंट, जानिए नागर शैली की खासियत जिससे होगा राम मंदिर का निर्माण

अयोध्या के राम जन्मभूमि विवाद का फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा आ गया है। इसके बाद से वहां राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया तेज हो गई है। दरअसल 1989 में ही राम मंदिर के लिए डिजाइन तैयार किया गया था। राम मंदिर का डिजाइन तैयार करने वाले शिल्पकार चंद्रकांत सोमपुरा ने बताया कि अयोध्या में राम मंदिर कैसे बनेगा। यह मंदिर प्रसिद्ध नागर शैली पर बनेगा। उन्होंने यह भी बताया कि इस तकनीक से मंदिर बनने में कितना समय लगेगा। मंदिर आर्किटेक्ट चंद्रकांत भाई सोमपुरा ने तैयार किया मंदिर का मॉडल। अयोध्या का भव्य मंदिर जिसमें चंद्रकांत भाई के अनुसार, 106 खंबे वाला एक दो मंजिला मंदिर होगा। जिसके गर्भ गृह में प्रभु राम विराजमान होंगे इस मंदिर निर्माण में कम से कम 3 साल का समय लगेगा।

चंद्रकांत भाई की तीसरी व चौथी पीढ़ी देश के प्रसिद्ध मंदिरों के निर्माण में अपना योगदान दे रही है। अहमदाबाद के चंद्रकांत भाई का ताल्लुक ऐसे परिवार से जिन्हें पारंपरिक नागर शैली मंदिरों की डिजाइन बनाने में महारत हासिल है। चंद्रकांत भाई के पिता भी देश के जाने-माने आर्किटेक्ट रहे हैं। गुजरात के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के आर्किटेक्ट उनके दादा प्रभाशंकर सोमपुरा थे। राम मंदिर मॉडल बनाने पर चंद्रकांत भाई ने कहा कि राम मंदिर का मॉडल बनाना उनके जीवन काल में मंदिर निर्माण की उपलब्धियों के प्रदर्शन का शानदार अवसर है। उन्होंने कहा राम मंदिर का दर्शन करने वाले उनके इस योगदान की प्रशंसा करेंगे।

उल्लेखनीय है कि देश के लगभग सभी मंदिर करीब-करीब चौकोर आकृति के बनाए जाते हैं। लेकिन प्रस्तावित राम मंदिर का गर्भ ग्रह अष्टकोणिय होगा साथ ही मंदिर की परिक्रमा पथ गोलाई में बनाया जाएगा। हालांकि अधिकांश मंदिर का परिक्रमा पथ चौकोर होता है। नागर शैली में डिजाइन किया गया राम मंदिर का शिखर अष्टकोण है। इस दो मंजिला मंदिर के भुतल में रामलला की मूर्ति होगी और उसके ऊपर तल पर राम दरबार होगा।

2001 में अयोध्या लाया गया राम मंदिर का मॉडल
राम मंदिर का मॉडल 1989 में धर्माचारियों के द्वारा प्रस्तावित किया गया था। राम मंदिर के मॉडल को 2001 में अयोध्या लाया गया। राम मंदिर के मॉडल के अनुसार 106 खंभों और 24 दरवाजे वाला यह भव्य दो मंजिला मंदिर है। जिस के ऊपरी भाग में भी 106 खंबे होंगे, प्रत्येक खंभे में 12 हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियों को उकेरा जाएगा, साथ ही फूल पत्तियों का भी डिजाइन होगा। मुख्य द्वार को सिंह द्वार का नाम दिया जाएगा। चंद्रकांत सोमपुरा को 1997 में सर्वश्रेष्ठ आर्किटेक्ट घोषित किया गया था। उनके द्वारा लंदन में निर्मित अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण मंदिर को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया। सोमपुरा परिवार गांधीनगर के अक्षरधाम मंदिर के साथ-साथ सिंगापुर, पिट्सबर्ग और अमेरिका के मंदिर निर्माण की कई परियोजनाओं में शामिल रहा।

नागर शैली की धरोहर है सोमपुरा परिवार
पद्मश्री से सम्मानित पी.ओ. सोमपुरा की विरासत नागर शैली की धरोहर साबित हुआ। जिसको उनके बेटे और शिष्यों द्वारा आगे बढ़ाया जा रहा है। चंद्रकांत भाई प्रसिद्ध परिवार की तीसरी पीढ़ी है जो मंदिर निर्माण में योगदान दे रही है। उनकी चौथी पीढ़ी भी इस काम में सक्रिय है। आर्किटेक्चर चंद्रकांत भाई ने वास्तु कला में कोई व्यवसायिक प्रशिक्षण प्राप्त नहीं किया इंटरमीडिएट के बाद पिता ने उनकी पढ़ाई बंद करवा दी थी। चंद्रकांत भाई सोमपुरा ने देश-विदेश में अब तक 100 से ज्यादा मंदिर बनाए हैं। लंदन पिट्सबर्ग में सर्व धर्म मंदिर, बैंकॉक में विष्णु मंदिर और अमेरिका में जैन मंदिर बनाया। मंदिर का नक्शा उत्तर भारत की नागर शैली पर बनाया गया है। नागर शैली भारतीय हिंदू स्थापत्य कला की तीन में से एक शैली है। वास्तु शास्त्र के अनुसार नागर शैली में मंदिरों की पहचान आधार से लेकर सर्वोच्च तक इसका चतुष्कोण होना है। नागर शैली की दो विशेषताएं होती है इसकी विशिष्ट योजना और विमान। इसकी मुख्य भूमि आयताकार होती है जिसमें बीच में दोनों और क्रमिक विमान होते हैं। जिसके चलते इसका पूर्ण आकार तिकोना हो जाता है। खास बात यह है कि इन मंदिरों में लोहे और सीमेंट का इस्तेमाल नहीं होता है भुवनेश्वर में स्थित लिंगराज मंदिर नागर शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है इसके अलावा खजुराहो मंदिर भी इसी शैली पर बने हुए हैं विश्व प्रसिद्ध उड़ीसा कोणार्क मंदिर भी नागर शैली में बनाया गया।

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