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J&K: स्लो इंटरनेट से छात्रों को ऑनलाइन क्लासेस में हो रही थी दिक्कत, 2 दोस्तों ने बना लिया खास ऐप

श्रीनगर. कश्मीर (Jammu-kashmir) के दो दोस्तों ने एक ऐसा मोबाइल एप्लीकेशन (Mobile App) विकसित किया है, जो ऑनलाइन क्लासेज़ के दौरान इंटरनेट की स्लो स्पीड से जूझ रहे छात्रों की मदद करेगा. इस ऐप का नाम Wise App है, जो 2जी स्पीड को भी 4जी स्पीड की तरह एक्टिव कर देगा. इसके जरिए जूम ऐप को भी आसानी से संचालित जा सकता है. सबसे बड़ी बात इसके लिए किसी को इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी या किसी तरह के सॉफ्टवेयर की जानकारी होना जरूरी नहीं है.

श्रीनगर के हैदरपोरा में रहने वाले मुबीन मसूदी और लखनऊ में उनके साथी बिलाल अबीदी ने इस ऐप को डेवलप किया है. दोनों आईआईटी मुंबई से 2011 में ग्रैजुएशन कर चुके हैं. इसके बाद देश-विदेश की कई नामचीन कंपनियों में नौकरी भी की, लेकिन कश्मीर लौट आए. अब वो यहां प्रतिभावान इंजीनियरों और डॉक्टरों की नई पीढ़ी तैयार करने में योगदान कर रहे हैं.

शाकिर राशीद मुबीन का श्रीनगर में कोचिंग सेंटर हैं. इसमें अभी 76 स्टूडेंट्स हैं. मुबीन की हर सुबह इन्हीं बच्चों को पढ़ाने के साथ शुरू होती है और शाम भी इनके साथ ही खत्म होती है. उन्होंने कहा कि कोरोना से पैदा हालात में ऑनलाइन पढ़ाना शुरू किया. इसमें बहुत दिक्कत आ रही थी. जूम और कुछ अन्य ऐप यहां इंटरनेट की 2जी स्पीड पर पूरी तरह काम नहीं करते. लिहाजा मैंने अपने दोस्त के साथ मिलकर कुछ करने का सोचा. कुछ दिनों की मेहनत लग लाई. अब बच्चों के लिए Wise App तैयार है. शाकिर राशीद मुबीन के कोचिंग सेंटर में जम्मू-कश्मीर के करीब सभी जिलों से स्टूडेंट्स ऑनलाइन क्लासेस ले रहे हैं.

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शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने 13 अगस्त के अपने एक ट्वीट में इन दोनों दोस्तों का जिक्र कर चुके हैं. शिक्षा मंत्री ने लिखा था, ‘आईआईटी बंबई के दो ग्रेजुएट्स स्टूडेंट ने ऑनलाइन लर्निंग को टू-जी स्पीड पर भी सक्षम बनाने के लिए एक एंडरॉयड ऐप तैयार किया है. ये यूजर्स के लिए बहुत अनुकूल है. ये ऐप पूरी तरह से फ्री है और बिना की ऐड के आता है.’ लॉन्चिंग के एक महीने के अंदर अब तक इस ऐप को 3,000 से ज्यादा बार इंस्टॉल किया जा चुका है.

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में मसूदी बताते हैं, ‘मैं कश्मीर में पिछले आठ वर्षों से पढ़ा रहा हूं. इन सभी वर्षों के दौरान मैंने छात्रों, स्कूलों, स्थानीय गैर सरकारी संगठनों और सरकार के शिक्षा विभाग के साथ सीधे काम किया है. इस समय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मैथ्स और केमेस्ट्री के स्टूडेंट्स के साथ बीतता है.’

उनके मुताबिक, एग्जाम में अच्छे परफॉर्मेंस के लिए दोनों सब्जेक्ट्स की रोजाना तैयारी जरूरी होती है. लेकिन कोरोना महामारी की वजह से लगे लॉकडाउन में स्कूल बंद हो गए और पढ़ाई में बाधा आने लगी. जिसके बाद सभी इंस्टीट्यूट्स में पढ़ाई ऑनलाइन कराने में जोर दिया जाने लगा. इससे मेरे साथ साथ कई टीचर्स के सामने बड़ी दिक्कत आ गई. ज्यादातर टीचर्स और स्टूडेंट्स टेक्निकल तौर पर मजबूत नहीं थे.’

मसूदी बताते हैं, ऑनलाइन क्लासेस में सबसे बड़ी दिक्कत तो इंटरनेट की धीमी रफ्तार थी. ऐसे में मैंने अपने लखनऊ के दोस्त आबिदी से बात की और इस बारे में कुछ करने का ख्याल आया. हमें एक ऐसे प्लेटफॉर्म की जरूरत महसूस हुई, जिसमें सभी लोग आसानी से जुड़ सके और बिना की रुकावट के पढ़ाई भी होती रहे. इसी को ध्यान में रखते हुए ये मौजूदा ऐप बनाया गया है.’

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वहीं, बिलाल अबीदी के मुताबिक, ये ऐप बिल्कुल यूजर फ्रेंडली है. इसमें टेक्निकल पार्ट को जितना हो सके आसान बनाया गया है, ताकि हर कोई इस ऐप का आसानी से इस्तेमाल कर पाए.


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