Categories: देश

https://zeenews.india.com/hindi/zee-hindustan/national/now-it-is-necessary-the-top-leaders-modi-and-jinping-should-also-take-part-in-the-peace-process/742708

नई दिल्ली.   कायदे से देखा जाए तो युद्ध कोई नहीं चाहता. सच ये भी है कि आक्रामक तेवरों का दिखावा कर रहा चीन भी युद्ध नहीं चाहता. प्रश्न जीत-हार के विश्वास या भय का नहीं है, प्रश्न विकास की और बढ़ती दुनिया को पीछे ले जाने से बचाने का है. शान्ति प्रहरी भारत का प्रयास पूरा रहा है किन्तु अब तक सर्वोच्च स्तर पर बात नहीं हुई है, हो सकता है इस एक आखिरी कोशिश के बाद कोई फर्क पड़े. युद्ध दोनो ही परमाणु-शक्ति संपन्न राष्ट्रों को दशकों पीछे ले जा सकता है. सर्वोच्च स्तर पर वार्ता के बिना शांति-वार्ता के प्रयास अंततः अपूर्ण हैं.

रक्षामंत्री स्तर पर बात हो गई

मई 2020 से आज सितंबर पांच तारीख तक लगातार देखा गया है कि भारत ने सीमा पर स्थिति को भड़काने के लिए कोई कदम नहीं उठाया. भारत की सेना ने दृढ़ता और तत्परता से देश की सीमा पर देश की सम्प्रभुता और सुरक्षा की रक्षा की है. सैन्य-अधिकारी स्तर पर भारत ने पूरी जिम्मेदारी के साथ शांतिवार्ता में हिस्सा लिया और अब अंत में रक्षामंत्री-स्तर पर भी बात हो गई है. किन्तु चीन के इरादे शान्ति के नज़र नहीं आये. इसलिए कोई फर्क नहीं पड़ा.

अगले हफ्ते मिलेंगे विदेश मंत्री भी

रक्षा मंत्री स्तर पर बातचीत के बाद अब अगले हफ्ते दोनों देशों के विदेश मंत्री भी मिलने वाले हैं. यद्यपि फ़ोन-वार्ता दोनों के बीच पहले भी हुई है. इस तरफ सीमा पर भी दोनों देशों के सेनाधिकारी चुशूल में बैठ कर अभी भी बात कर रहे हैं. और उत्साहजनक समाचार ये है कि बात बातचीत के लिए पहल चीन ने की है.

चीन को ज्ञान की प्राप्ति हुई है

चीन की आक्रामकता के सामने भारत के न झुकने से और भारत की तरफ से युद्ध की पूरी तैयारी होने से चीन को ज्ञान की प्राप्ति हुई है कि भारत तिब्बत, वियतनाम, ताइवान, हांगकांग या भूटान नहीं है. यहां सीधी और टेढ़ी दोनों ही उँगलियों से घी निकालने की कोशिश में ऊँगली और फिर पूरे पंजे का कट जाना तय है. पेंगांग झील की दक्षिणी पहाड़ियों पर भारतीय जवानों ने जो आगे बढ़ कर अधिकार किया है उससे दुश्मन को पता चल गया है कि भारत बैठ कर प्रतीक्षा करने की मुद्रा में नहीं है.

बाहर भी घिरा है चीन

भारत को ले कर चीन सीमा पर और सीमा से बाहर भी घिरा हुआ है. अमेरिका पहले ही चीन पर बुरी तरह से भड़का हुआ है और रोज ही अमेरिका से चीन के विरुद्ध वक्तव्य सुनने को मिलते हैं जिनमें उनके रक्षामंत्री और विदेशमंत्री लद्दाख सीमा पर चीन के विस्तारवाद की कोशिश की बात अवश्य करते हैं. इतनना ही नहीं भारत,अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया का चतुर्भुज भारत पर बाहर से सुरक्षा-कवर तैयार कर चुका है जो अब सामरिक रूप से सक्रियता भी दिखा रहा है.

गलवानी धोखे के बाद बायकॉट

चीन को लगातार नुक्सान हो रहा है और उसके लिए उसका गलवानी धोखा भी बराबर से जिम्मेदार है. इसके बाद भारत ने प्रतिक्रियास्वरूप चीनी उत्पादों, चीनी ऐप्स और चीन के साथ कई समझौतों का बायकॉट कर दिया है. फिर इससे हुआ ये कि अमेरिका और यूरोप के देश भी चीन के विरुद्ध ऐसे कदम उठाने लग गए हैं. कई देश चीन में लगी अपनी पूंजी वापस निकालना चाह रहे हैं.

वायरस और विस्तारवाद नुकसानदेह हैं

चीन के लिए कोरोना वायरस और उसकी विस्तारवादी कोशिशें उसके लिए नुकसानदेह साबित हो रही हैं. इसके कारण चीन की दुनिया के स्तर पर ऐसी ठुकाई हो सकती है कि चीन इतिहास में भुला न सकेगा. रूस उसके साथ है नहीं, दक्षिण कोरिया और पाकिस्तान के साथ मिल कर दुनिया का मुकाबला करना उसके लिए व्यावहारिक रूप से सम्भव न हो सकेगा.

नियंत्रण रेखा वास्तविक बनाई जाए

शान्ति हो जाने के बाद की बात है ये. एलएसी को वास्तविक बनाना होगा ताकि साढ़े तीन हज़ार किलोमीटर की वास्तविक नियंत्रण रेखा पर दोनों तरफ के जवानों को पता रहे कि उनको किस रेखा के आगे नहीं बढ़ना है. और अब अंतिम प्रयास के तौर पर दोनों देशों के सर्वोच्च नेताओं को भी एक बार एक दूसरे से बात करनी चाहिए ताकि युद्ध-जैसी स्थिति न बने और स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त हो सके.

ये भी पढ़ें. कोरिया का तानाशाह बन गया है अपनी बहन के खून का प्यासा

zeenews.india.com

Leave a Comment