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भाई की मृत्यु पर भी बहन थी प्रियंका गांधी की सुरक्षा में मुस्तैद, फिर भी कांग्रेस ने लगाए ऐसे आरोप

यूपी पुलिस अपने काम के लिए जवाबदेह होती है अच्छा हो या बुरा। लेकिन उनका भी परिवार होता है। जनता की सुरक्षा के साथ-साथ परिवार की सुरक्षा भी उतनी ही मायने रखती है। ऐसे में उनके लिए ड्यूटी करते करते परिवार के सदस्य को खो देने से बड़ा झटका शायद ही कोई और हो। ऐसा ही कुछ हुआ लखनऊ की सीओ डॉक्टर अर्चना सिंह के साथ। अर्चना सिंह शनिवार को काफी सुर्खियों में रही। प्रियंका गांधी की ड्यूटी में तैनात सीओ अर्चना सिंह ने जब उनके काफिले को रोका तो उसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं को समझाते-समझाते थक गई। सोशल मीडिया व टीवी चैनलों में उनके वीडियो वायरल होते देखे जा सकते हैं। बाद में प्रियंका गांधी का पैदल मार्च करना और अंत में मीडिया से सीओ पर बदसलूकी का आरोप लगाना सब ने देखा। कुछ पल के लिए अर्चना फिर से योगी पुलिस की बदनाम श्रेणी में शामिल हो गई। लेकिन बाद में एसएसपी ने सभी आरोपों का खंडन किया। प्रियंका के आरोप अर्चना को बेहद आहत व भावुक कर गए। लेकिन वह कुछ ना कर सकी।

ऐसा ही कुछ हुआ लखनऊ की सीओ डॉक्टर अर्चना सिंह के साथ। अर्चना सिंह शनिवार को काफी सुर्खियों में रहीं। वजह प्रियंका गांधी वाड्रा जिन्होंने उन पर गला दबाने व धक्का-मुक्की करने का आरोप लगाया। जब अर्चना प्रियंका की सुरक्षा में तैनात थी उसके कुछ क्षण पहले उनके चचेरे भाई की मौत हो चुकी थी। दुख दर्द के सागर में डूबी अर्चना फर्ज से बंधी हुई थी। उन्होंने छुट्टी मांगी थी, लेकिन प्रियंका गांधी की सुरक्षा करना उनका दायित्व था। वह चाहकर भी अपने भाई के अंतिम दर्शन नहीं कर पा रही थी। वह ईमानदारी से अपनी ड्यूटी कर रही थीं। उस पर यदि कोई गला दबा देने जैसा इल्जाम लगाए तो किसी पर क्या बीतती होगी। हालांकि एसएसपी ने इन आरोपों का खंडन करते हुए साफ कहा है की प्रियंका का आरोप गलत है, वह सिर्फ और सिर्फ अपनी ड्यूटी कर रही थी।

अर्चना का भाई दिल्ली के अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा था। अर्चना के भाई को पीलिया हो गया था। लेकिन शनिवार को वह जंग हार गया था और उसकी मृत्यु हो गई थी। प्रियंका की सुरक्षा घेरे में तैनात सीओ अर्चना को जब इसकी सूचना मिली तो मानो उस पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा हो। लेकिन उन्होंने अपनी भावनाओं पर संयम रखा। प्रियंका गांधी का सुरक्षा चक्र न टूटे इसका उन्होंने पूरा ख्याल रखा। अंत में ड्यूटी खत्म होने पर उन्होंने एसएसपी कलानिधि नैथानी को अपने भाई की मृत्यु की जानकारी दी और उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने की इजाजत मांगी। एसएसपी से इजाजत लेकर बिहार के पैतृक गांव में अपने भाई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए निकल पड़ी।

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