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चांद से नहीं पाकिस्तान से आ रहे आतंकी

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के इंडिया के फैसले को यूरोपियन यूनियन (ईयू) में अपार समर्थन मिला है, और इंडिया का समर्थन करने के साथ ही कई देशों ने पाकिस्तान की कड़ी निंदा भी की है। ईयू संसद में बुधवार को कश्मीर पर चर्चा हुई, इस दौरान पोलैंड और इटली ने पाकिस्तान का जोरदार विरोध किया। ईयू की संसद ने कहा कि इंडिया- पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दे का हल द्विपक्षीय तरीके से करना चाहिए।

पाक से आए आतंकी

ग्रुप ने अपने वक्तव्य में आगे कहा कि हमें ये समझना होगा कि हिंदुस्तान में आतंकी चाँद से नहीं आए। वे इंडिया के ही पड़ोसी देश से आ रहे हैं। ऐसे में, हम पूरी तरह इंडिया का समर्थन करते हैं।

क्या कहा इटली ने?

इटली की यूरोपियन पीपुल्स पार्टी के नेता फुलवियो मार्तुसिएलो ने कहा कि पाकिस्तान हमेशा परमाणु हथियार इस्तेमाल करने की धमकी देता है। पाक एक ऐसी जगह है, जहां से आतंकी
यूरोप पर हमला करने की योजना बनाते हैं। उन्होंने पाक में मानवाधिकार उल्लंघन और माइनॉरिटीज के खिलाफ हो रहे अत्याचारों का भी मुद्दा उठाया है।

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संसद ने दी पाक को नसीहत

संसद ने पाक को नसीहत देते हुए कहा कि नागरिकों के अधिकार एलओसी के दोनों तरफ सुरक्षित होने चाहिए। चर्चा के दौरान पोलैंड के यूरोपियन कंजर्वेटिव एंड रिफॉर्मिस्ट ग्रुप ने कहा कि भारत
दुनिया का सबसे महान लोकतंत्र है। हमें आतंकी गतिविधियों को देखना होगा जो जम्मू-कश्मीर में हो रही हैं।

कश्मीर पर क्या कहना है देशों का?

  • कश्मीर से विशेष दर्जा हटाए जाने के बाद रूस ने इसे इंडिया का आंतरिक मसला बताया था।
  • इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और पड़ोसी बांग्लादेश भी इसे इंडिया का अंदरूनी मामला कह चुके हैं।

हाल ही में जी-7 समिट में अमेरिका के प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप, ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन और फ्रांस के प्रेसीडेंट इमैनुएल मैक्रों ने भी पीएम मोदी से मुलाकात के दौरान इंडिया का साथ दिया था।
खास बात यह भी है कश्मीर मामले पर ज्यादातर साउथ एशियन और पड़ोसी देशों ने भी इंडिया का ही सपोर्ट किया था।

यू एन ने क्या बोला मामले पर?

  • जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान ने यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल (यूएनएससी) को चिट्ठी लिखकर हस्तक्षेप की मांग की थी।
  • हालांकि, यूएन महासचिव गुटेरेस ने शिमला समझौते का जिक्र करते हए कहा कि इस मुद्दे पर कोई भी तीसरा पक्ष मध्यस्थता नहीं कर सकता।
  • उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के अनुसार, जम्मू-कश्मीर को लेकर कोई भी फैसला शांतिपूर्ण तरीकों से ही किया जाना है।
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