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Sunday, October 17, 2021

बेटों ने नहीं बहू ने पूरे किए अरमान, दरोगा बन बढ़ाया परिवार का मान

यदि लगन से कोई काम किया जाए तो सफलता कदमों को चुनती है। विभूतिपुर प्रखंड के सैदपुर वार्ड 15 की रहने वाली कंचन ने भी कामयाबी हासिल की, जिसने न केवल ससुराल का अपितु मायके का भी नाम रोशन किया, और समाज में मिसाल बन गई। कपड़े की दुकान चलाकर परिवार का भरण पोषण करती है। राम भरोसे मिश्रोलिया के तीन बेटे सुमन शिवम और सत्यम है। उनका परिवार एक दम साधारण है, वे चाहते थे कि उनके घर से कोई पुलिस विभाग में पदाधिकारी बने इसके लिए राम भरोसे ने तीनों बेटों को अच्छी शिक्षा दिलाई इतना सब कुछ करने के पश्चात उन्हें निराशा हाथ लगी।

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वर्ष 2016 में अपने पुत्र सुमन की शादी पंचायत के ही सैदपुर वार्ड 15 निवासी अरुण कुमार और शांति सुमन की बेटी कंचन से कर दी। कंचन को पढ़ने का बहुत शौक था, उसने यह बात ससुराल वालों को बताई राम भरोसे जो बहुत महत्वाकांक्षी था, उसने बहू को आगे पढ़ने की स्वीकृति दी और उसका मनोबल बढ़ाया। उसके पति सुमन ने भी उसका साथ दिया उसकी जरूरत को पूरी करने के लिए ट्यूशन, कोचिंग में बच्चों को पढ़ाया। जब मन में ठान लिया जाता है तो जीवन में कोई काम असंभव नहीं होता है। पति व ससुर के सपनों को पूरा करने के लिए उसने दिन रात मेहनत कर सफलता हासिल की। कड़ी मेहनत सच्ची लगन और आत्मविश्वास से लबरेज होने के कारण प्रथम प्रयास में ही दारोगा बन गई, परिवार वालों के सपने साकार हो गए। वह समाज की आई कान बन गई, फिलहाल राजगीर में दरोगा का प्रशिक्षण ले रही है।

पिता ने दी अच्छी शिक्षा

कंचन का जन्म मध्यम परिवार में हुआ था। उसके पिता आटा चक्की चलाते थे व मां ग्रहणी है। कंचन ने प्रारंभिक शिक्षा सैदपुर से उच्च विद्यालय मिश्रौलिया से मैट्रिक जनता महाविद्यालय सीधी बुजुर्ग से इंटरमीडिएट और नालंदा खुला विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। सीमित संसाधनों के बावजूद कंचन के माता-पिता ने संघर्ष कर बेटी को हमेशा सपोर्ट किया, शादी के बाद पति ने सपोर्ट किया और मनोबल बढ़ाया। अब उसका सपना आईपीएस अफसर बनकर समाज की सेवा करना है। नारी सशक्तिकरण के इस दौर में बेटियां बेटों से आगे निकल गई है। सीमित संसाधनों के बावजूद सफलता हासिल करना बहुत मायने रखती है। यह वैसे लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो आज भी बहु को बेटी से कम मानते हैं और घर की दहलीज से बाहर नहीं जाने देते हैं।

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