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Birthday : मोहन भागवत, जिनके दौर में संघ मजबूत हुआ और नई तकनीक से लैस भी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) के प्रमुख मोहन भागवत ( Mohan Bhagwat) का आज जन्मदिन है. आज वो 70 साल के हो गए. वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ऐसे प्रमुख हैं, जिनके दौर में ये संगठन ना केवल मजबूत हुआ बल्कि नई तकनीक से लैस भी. इसी दौर में वो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आया.

भागवत इस उम्र में भी अनुशासन का जीवन जीते हैं. जल्दी उठते हैं. जमकर मेहनत करते हैं. यात्राएं करते हैं और सोशल मीडिया पर भी नजर रखते हैं. उनका जीवन सादा है और प्रेरणादायक भी. भागवत के बारे में कहा जाता रहा है कि वो तकनीक को लेकर काफी सेलेक्टिव हैं लेकिन संघ ने उन्हीं के कार्यकाल में इंटरनेट और सोशल मीडिया पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई.

भागवत को ऐसे संघ प्रमुख के तौर पर जाना जाता है, जिन्होंने पिछले कुछ सालों में संघ को विस्तार देने के साथ नए जमाने के लिहाज से इसे मजबूती भी दी. जानते हैं भागवत के बारे में…

1. परिवार तीन पीढ़ियों से संघ से जुड़ा हैमोहन मधुकर भागवत का जन्म महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में हुआ. उनका परिवार तीन पीढ़ियों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा है. पहले उनके बाबा नानासाहेब इससे जुड़े रहे. वो संघ संस्थापक केबी हेडगेवार के साथ मिलकर काम करते थे. इसके बाद उनके पिता मधुकर राव भी संघ से सक्रिय तौर पर जुड़े रहे. वो गुजरात के प्रचारक भी बने. मां मालती संघ के महिला विंग की सदस्य थीं. भागवत परिवार के बारे में कहा जाता है कि वो टकराव की बजाय लोगों का दिल जीतने में ज्यादा विश्वास रखते हैं.

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2. रोजाना शारीरिक अभ्यास करते हैं
भागवत की उम्र भले ही 70 साल है लेकिन संघ के सूत्र बताते हैं कि वो न केवल सुपर फिट हैं बल्कि सुपर कूल भी. रोजाना शारीरिक अभ्यास जरूर करते हैं. वो संघ के राष्ट्रीय शारीरिक प्रमुख भी रह चुके हैं. उन्हें आमतौर पर नाराज होते हुए शायद ही किसी ने देखा हो. वो किसी की भी बात बहुत ध्यान से सुनते हैं और उसका जवाब देते हैं.

मोहन भागवत के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अध्यक्ष बनने के बाद इसके कार्यकर्ताओं की संख्या में जबरदस्त बढोतरी हुई तो इसकी शाखाएं भी बढ़ीं.

3. सुबह की शुरुआत तड़के चार बजे होती है
संघ के अन्य स्वयंसेवकों और पदाधिकारियों की ही तरह भागवत के दिन की शुरुआत तड़के चार बजे से होती है और अक्सर रात 12 बजे तक वो कार्यों और गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं. खानपान उनका एकदम सादा है. वो कम की बजाय यथोचित मात्रा में भोजन करते हैं.

4. खूब यात्राएं करते हैं और काफी पढ़ते हैं
उन्हें ऐसे संघ प्रमुख के रूप में जाना जाता है, जो खूब यात्राएं करता है. उन्होंने देश ही नहीं विदेशों की भी काफी यात्राएं की हैं. लेकिन इतनी यात्राओं के बीच भी वो अपने जीवन को संतुलित करना बखूबी जानते हैं. यात्राओं के दौरान वो काफी पढ़ते रहते हैं, लेकिन क्या पढ़ना है क्या नहीं-इसे लेकर भी वो सेलेक्टिव हैं.

5. वेटनरी डॉक्टर का काम छोड़ संघ से जुड़े
मोहन भागवत चार भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं. उनकी शुरुआती पढ़ाई चंद्रपुर में ही हुई. फिर उन्होंने नागपुर के गवर्नमेंट वेटनरी कॉलेज से वेटनरी साइंस एंड एनिमल हसबेंड्री में बीएससी की. छह महीने तक उन्होंने पशु चिकित्सक के तौर पर चंद्रपुर के ग्रामीण इलाकों में काम भी किया लेकिन फिर पूरी तरह से संघ से जुड़ गए.

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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत (गेट्टी इमेज) (File Photo)

6. प्रचारक से संघ प्रमुख तक का सफर
वो अकोला में आरएसएस के प्रचारक बने. फिर विदर्भ और बिहार में संघ के कामों को देखा. धीरे-धीरे उनका ओहदा और स्थिति दोनों मजबूत होते गए. वर्ष 2000 में वो संघ के सरकार्यवाह (महासचिव) बनाए गए. इस पद पर उन्होंने तीन टर्म पूरे किए. इसके बाद 21 मार्च 2009 में सरसंघचालक (प्रमुख) बने. उन्हें सीधा सपाट शख्स माना जाता है. आपातकाल के दिनों में वो भूमिगत होकर संघ के कामों को अंजाम देते रहे. भागवत के कुछ भाषण विवादित भी हुए.

7. इस तरह चुने गए संघ प्रमुख
वर्ष 2009 में जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में बड़े बदलाव का दौर आया. वरिष्ठ पदाधिकारी अपने दायित्व से अलग हो रहे थे. तब संघ परिवार के सामने पहली पंक्ति की नई टीम चुनने की चुनौती थी. जब मार्च 2009 में संघ परिवार के पदाधिकारी नागपुर में मिले, तो उन्हें नया सरकार्यवाह चुनना था. क्योंकि सुदर्शनजी अपने तीन टर्म पूरा कर चुके थे.

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अखबारों में छपी रिपोर्ट के अनुसार चुनाव अधिकारी एमजी वैद्य जब सरकार्यवाह के चुनाव की प्रक्रिया शुरू ही करने वाले थे, तभी तत्कालीन संघ प्रमुख सुदर्शनजी ने उन्हें रोका. उन्होंने उनके हाथ से माइक्रोफोन लेते हुए कहा-उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है. वो मोहन भागवत का नाम नए सरसंघचालक के रूप में प्रस्तावित करते हैं.

भागवत कुशल वक्ता हैं लेकिन वो नपीतुली और साफ बातें करते हैं. उनके भाषणों में कोई लागलपेट नहीं होता. File Photo: Getty Images

8. सबसे कम उम्र में संघ प्रमुख बने
जब भागवत सरसंघचालक बने तो 59 साल के थे. तब वो आरएसएस के सबसे कम उम्र के संघ प्रमुख बने. संघ में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को दायित्वों का स्थानांतरण की योजना बहुत सोचसमझ कर तैयार की गई थी. हालांकि हेडगेवार ने 25 साल की उम्र में संघ की स्थापना की थी.

9. 75 साल की आयुसीमा तय की
भागवत ने ही परिवार के पदाधिकारियों के लिए 75 साल की आयुसीमा तय की. उन्होंने अपने तरीके से परिवार को नई शक्ल दी. उसी दौरान 52 साल के नितिन गडकरी को भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया. तभी प्रवीण तोगड़िया विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख बनाए गए.

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10. आम लोगों को जोड़ने की शुरुआत
भागवत के प्रमुख बनने के बाद कैडर आधारित संघ परिवार की ओर आम लोगों को जोड़ना शुरू किया. उनके दरवाजे निचले स्तर पर काम करने वाले नेताओं के लिए खुल गए.

आमिर ख़ान को फ़िल्म ‘दंगल’ के लिए दीनानाथ मंगेशकर अवॉर्ड देते हुए (फाइल फोटो)

11. खाकी नेकर की जगह पैंट
भागवत के ही कार्यकाल के दौरान संघ के खाकी नेकर की जगह पैंट की शुरुआत की गई. संघ से जुड़ना छात्रों और दूसरे लोगों के लिए आसान हो गया. संघ परिवार ने इंटरनेट और सोशल मीडिया पर गहरी पैठ बनाई. उन्हीं के कार्यकाल में बीजेपी ने वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव जीता. केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनी.


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