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"जो श्री राम का नहीं, वो किसी काम का नहीं" बालासाहेब के सैनिक ने शिवसेना से दिया इस्तीफा

“जो श्री राम का नहीं है, वह मेरे किसी काम का नहीं है। जब जहाज डूबता है, तो सबसे पहले चूहे कूद कर भागते हैं लेकिन मैं तब जा रहा हूं जब मेरी पार्टी उभर रही है।” महाराष्ट्र की राजनीति में 28 नवंबर को ठाकरे परिवार से कोई मुख्यमंत्री बना। इस बीच शिवसेना का एनसीपी और कांग्रेस से हाथ मिलाना कुछ शिवसैनिकों को रास नहीं आ रहा है। रमेश सोलंकी ने मंगलवार को शिवसेना की युवा सेना इकाई से इस्तीफा दे दिया है। रमेश सोलंकी शिवसेना की कई युवा सेना की आईटी सेल कोर कमेटी के मेंबर थे। इसके अलावा वह युवा सेना की आईटी सेल कोर कमेटी के मुंबई सेक्रेटरी और गुजरात राज्य संपर्क प्रमुख भी थे। उन्होंने यह भी साफ किया कि उनका इस्तीफा विशुद्धतः विचारधारा के आधार पर है न कि राजनीतिक मौका परस्ती, क्योंकि वे पार्टी तब छोड़ रहे हैं जब शिवसेना महीने भर से चल रहे सत्ता संघर्ष में विजयी होकर उभर रही है। उन्होंने युवा सेना के मुखिया और उद्धव के बेटे आदित्य ठाकरे का धन्यवाद भी किया।

रमेश सोलंकी ने एक और ट्वीट करते हुए कहा, “पिछले कुछ दिनों से लोग मुझसे मेरे पक्ष के बारे में पूछ रहे हैं। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि जो श्री राम का नहीं है, (कांग्रेस) वह मेरे किसी काम का नहीं है।” उन्होंने कहा कि 1992 में 12 साल की उम्र में बाला साहेब ठाकरे के फायरब्रांड हिंदुत्व, करिश्माई व्यक्तित्व और निडर नेतृत्व से प्रभावित होने के बाद 1998 में अधिकारिक रूप से जुड़कर शिवसेना का सैनिक बना। इस दौरान हिंदुत्व विचारधारा का अनुसरण करते हुए उन्होंने कई पदों पर काम किया। सोलंकी ने महाराष्ट्र में बने नए गठबंधन के प्रति रोष जताया है। उन्होंने कहा कि कई चुनावों में उतार-चढ़ाव आए लेकिन वह बृहन्मुंबई महानगरपालिका से लेकर लोकसभा चुनावों तक हिंदू राष्ट्र और कांग्रेस मुक्त भारत के सपने के लिए काम करते रहे।

सोलंकी ने आगे कहा, “इस दौरान उन्होंने किसी पद या टिकट की मांग नहीं की। महाराष्ट्र सरकार बनने और शिवसेना के मुख्यमंत्री चुने जाने को लेकर बहुत बधाई। मगर मेरी आत्मा मुझे कांग्रेस के साथ काम करने की अनुमति नहीं देती है। मैं आधे-अधूरे मन से काम नहीं कर सकता। यह मेरे पद ,मेरी पार्टी और साथियों के लिए सही नहीं होगा।” उन्होंने कहा “इसीलिए बहुत ही भारी मन से मैंने जिंदगी का सबसे मुश्किल फैसला लिया है”। जाते- जाते उन्होंने कांग्रेस पर भगवान श्री राम का विरोधी होने का आरोप लगाया और कहा “जो मेरे श्री राम का नहीं है वह मेरे किसी काम का नहीं है।”

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