'पाकिस्तान में जासूसी के दौरान' पकडे गए थे अजीत डोभाल, पूछा क्या तुम हिंदू हो, पढ़ें दिलचस्प वाकया

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल एक ऐसा नाम है जिनकी चाल से दुश्मन खौफ खाते हैं।उनकी रणनीति का तोड़ निकालना किसी के लिए आसान नहीं है। 20 जनवरी को अजीत डोभाल का जन्मदिन था। कुछ जानकारी करते हैं अजीत डोभाल के बारे में,
कौन है अजीत डोभाल
अजीत डोभाल केरल केडर के एक IPS अधिकारी है।सेवानिवृत्त होने के बाद वह देश के पांचवे सुरक्षा सलाहकार बनें। डोभाल का जन्म 20 जनवरी 1945 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के गिरिबान सैल्यून गांव में हुआ था। उनके पिता इंडियन आर्मी में थे। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजस्थान के अजमेर सैन्य स्कूल से की। उन्होंने 1967 में आगरा विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री ली थी। स्नातक के बाद उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा की तैयारी शुरू कर दी। डोभाल केरल कैडर 1968 में IPS में शामिल हुए।

एक तेजतर्रार खुफिया अफसर के रूप में स्थापित अजीत डोभाल इंटेलिजेंस ब्यूरो के डायरेक्टर पद से सन 2005 में रिटायर हुए। इसके बाद साल 2009 में अजीत डोभाल विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के फाउंडर प्रेसिडेंट बन गए। इस दौरान न्यूज़पेपर में लेख भी लिखते रहे। अजीत डोभाल ने ज्यादातर समय खुफिया विभाग में ही काम किया। कहा जाता है कि वह 7 साल तक पाकिस्तान में खुफिया जासूस रहे। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद अजीत डोभाल लगातार घाटी के हालात पर नजर रखे हुए थे। माना जाता है कि मोदी सरकार ने अजीत डोभाल को मुख्य रूप से कश्मीर के हालात को सामान्य रखने का जिम्मा सौंपा रखा था। जिस पर वह पूरी तरह से खरे उतरे थे।

अजीत डोभाल के देश की सुरक्षा के कई ऐसे कारनामे है जिन्हें लोग आज भी याद करते हैं ।चाहे वह आप्रेशन ब्लू स्टार हो या पाकिस्तान मैं खुफिया तरीके से रहना हो या फिर भारत का पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक रहा हो, हर जगह डोभाल ने खुद को साबित किया है और देश की सुरक्षा चाक-चौबंद की है। अजीत डोभाल से न केवल पाकिस्तान की हवा खराब रहती है, बल्कि चाइना भी उनकी नीतियों से डरता है। साल 1989 में अजीत डोभाल ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में चरमपंथियों को निकालने के लिए “ऑपरेशन ब्लैक थंडर” का नेतृत्व किया था। उन्होंने मिलकर खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों के दल के साथ मुख्य भूमिका निभाई थी। जम्मू कश्मीर में घुसपैठियों और शांति के पक्षधर लोगों के बीच काम करते हुए डोभाल ने कई आतंकियों को सरेंडर करवाया था।

पाकिस्तान में जासूसी के दौरान एक शख्स ने पकड़ा
NSA अजीत डोभाल 7 सालों तक खुफिया तरीके से पाकिस्तान में जासूसी के तौर पर रह चुके हैं। इसका एक किस्सा काफी फेमस हुआ था। लाहौर में एक मजार के पास एक मुसलमान ने अजीत डोभाल को पहचान लिया था कि वह पाकिस्तानी या एक तरह से कहें मुसलमान हैं ही नहीं। उस मुसलमान ने उनसे पूछा कि क्या तुम हिंदू हो? तो डोभाल चौंक गए और उन्होंने जवाब दिया नहीं। फिर वह उन्हें अपने साथ लेकर गया और एक छोटे से कमरे में दोनों गए। उसने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया और एक बार फिर उसने कहा कि देखो मैं कर रहा हूं, मैं हिंदू हूं। डोभाल ने फिर से ना में जवाब दिया तो उस मुसलमान ने अजीत से कहा था कि तुम्हारे कान छिदे हुए हैं।

अजीत डोभाल 33 साल तक नॉर्थईस्ट जम्मू-कश्मीर और पंजाब में खुफिया जासूस रहे हैं। जहां उन्होंने कई अहम ऑपरेशन में हिस्सा लिया है। 30 मई 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अजीत डोभाल को देश के पांचवे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में नियुक्त किया। ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान उन्होंने एक जासूस की भूमिका निभाई और भारतीय सुरक्षाबलों के लिए महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई। जिसकी मदद से सैन्य ऑपरेशन सफल हो सका।

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