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फैजाबाद, इलाहाबाद के बाद अब "ताजनगरी" आगरा की बारी, अग्रवन हो सकता है नया नाम

उत्तर प्रदेश सरकार ने सबसे पहले मुगलसराय का नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर रखा। इलाहाबाद का नाम प्रयागराज कर दिया, इसके बाद फैजाबाद जिले का नाम अयोध्या कर दिया। अब लगता है, आगरा की बारी है। आगरा का नाम बदला जाना प्रस्तावित है। आगरा का नाम बदले जाने के संबंध में डॉ भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा से साक्ष्य मांगे हैं कि क्या कभी यह अग्रवन था और किन परिस्थितियों में आगरा हो गया। इस पर विचार मंथन चल रहा है। आगरा की डॉक्टर अंबेडकर यूनिवर्सिटी के चांसलर अरविंद दीक्षित ने बताया है कि कुछ दिनों पहले यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी आदित्यनाथ पोर्टल पर आगरा का नाम अग्रवन किए जाने की मांग को लेकर एक संस्था द्वारा पत्र भेजा गया था। साक्ष्य जुटाने के बाद शासन को रिपोर्ट भेज दी जाएगी।

वाइस चांसलर का कहना है कि उन्होंने विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग को इस पत्र का और इससे मांगी जानकारियों के तथ्य जुटाने की जिम्मेदारी सौंप दी है। साथ ही उन्होंने हिदायत दी कि साक्ष्य जुटाने के लिए सभी जानकार लोगों को आमंत्रित किया जाए और वेबसाइट के जरिए भी इस बारे में लोगों और संस्थाओं से जानकारी देने का आग्रह किया जाय। वाइस चांसलर अरविंद दीक्षित ने बताया कि आगरा के प्राचीन इतिहास को खोजने और शासन से आए पत्र का ऐतिहासिक तथ्यों के साथ जवाब देने के लिए साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया और शोध प्रारंभ कर दिया गया है। साक्ष्य जुटाने के बाद शासन को रिपोर्ट भेज दी जाएगी। कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पोर्टल पर आगरा का नाम अग्रवन किए जाने की मांग को लेकर संस्था द्वारा पत्र भेजा गया था। मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से इस पत्र को आगरा की डिस्ट्रिक्ट अथॉरिटी को संदर्भित करते हुए उल्लेखित तथ्यों से संबंधित जानकारी मांगी गई थी। चूंकि यह मामला शहर के प्राचीनतम इतिहास से जुड़ा था। इसलिए डिस्ट्रिक्ट अथॉरिटी ने इस पत्र को विश्वविद्यालय के पास भेज दिया और तथ्य जुटाने का आग्रह किया।

आगरा गजेटियर से मिलता है अग्रवन का उल्लेख
कई विद्वानों का कहना है कि आगरा गजेटियर में अग्रवन का उल्लेख मिलता है। विश्वविद्यालय के इतिहास के प्रमुख प्रोफेसर सुगन आनंद ने बताया, “शासन के पत्र के आधार पर कार्य शुरू कर दिया गया है। प्रमाण खोजे जा रहे हैं कि कोई तथ्य या साक्ष्य उपलब्ध हो जाए।” यहीं कहीं पर अग्रवन का जिक्र भी हो तो उसे भी स्थापित किया जा रहा है। क्योंकि आगरा के नाम को लेकर विभिन्न मत है। लेकिन हम प्रमाण या फिर अभिलेख पर शोध कर रहे हैं।

मुगल काल में हो गया आगरा
मुगल काल में इसे आगरा कहा गया। “तोलमी” पहला व्यक्ति था जिसने इसे आगरा कह कर संबोधित किया था। 1506 में सिकंदर लोदी ने आगरा को व्यवस्थित रुप में बसाया था। आगरा 1526 से 1658 तक आगरा मुगल साम्राज्य की राजधानी रही। वैसे इतिहासकारों के अनुसार आगरा को प्राचीन काल में अग्रवन कहा जाता था। मुगल काल में इसका नाम आगरा का दिया गया।इसके पीछे उनका तर्क है कि ब्रजमंडल में अग्रवन, वृंदावन, निधिवन समेत कई वन थे। आज उनमें से वृंदावन और निधिवन बचे हैं। वहीं कुछ विद्वानों का मत है कि 1000 वर्ष पहले महर्षि अंगिरा हुए थे। महर्षि अंगिरा से संबंधित होने के कारण इस शहर को पहले अंगिरा कहा जाता था। कुछ लोगों का मत है कि आगरा नगर अत्यंत प्राचीन काल में आर्य ग्रह नाम से भी पहचाना जाता था। फिलहाल इन सभी पहलुओं पर मंथन किया जा रहा है।

बीजेपी के पूर्व विधायक ने उठाई थी मांग
आगरा उत्तर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे जगन प्रसाद गर्ग ने योगी सरकार को इस संबंध में प्रस्ताव भेजा था। पिछले साल उनका निधन हो गया। अब योगी सरकार इस प्रस्ताव पर विचार कर ही है। जगन प्रसाद गर्ग ने अपने प्रस्ताव में कहा था कि आगरा में वैश्य समुदाय के लोगों की संख्या सबसे अधिक है। अग्रवन की आगरा में पहचान रही है। यहां अग्रवालों की बहुतायत है और किसी जमाने में यह महाराजा अग्रसेन की राजधानी थी। इसलिए आगरा का नाम अग्रवन किया जाना चाहिए।

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