“बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” को किया सफल, 3 बेटियों को बनाया IAS और 2 को इंजीनियर

भारत विकसित देशों की श्रेणी में आता है परंतु आज भी भारत के कई क्षेत्रों में बेटियां होने पर परिवार दुखी हो जाता है। सरकार द्वारा समय-समय पर कई तरह की योजनाओं से लोगों को जागरूक किया जाता है ताकि बेटियों को उनका अधिकार प्राप्त हो। सरकार के साथ सामाजिक संस्थान, संगठन निरंतर जागरूक अभियान चलाते रहते हैं। सरकार और संस्थान अपने अपने स्तर पर जनता को जागरूक करती है की बेटी और बेटे में कोई अंतर नहीं है दोनों समान है।

बेटियों ने पूरा किया सपना

लेकिन आज भी कई परिवारों में बेटियां होने पर उसके माता-पिता को ताने दिए जाते हैं। लेकिन जब यही बेटियां परिवार का नाम रोशन करती है तो परिवार चुप हो जाता है। ऐसा ही एक परिवार फरीदपुर तहसील जिला बरेली उत्तर प्रदेश का रहने वाला है जिनके घर पर लगातार पांच बेटियों का जन्म हुआ था। चंद्रसेन सागर और मीना देवी को पहली संतान बेटी हुई थी जिससे पूरे परिवार में खुशी का माहौल था। इसके बाद चंद्रसेन सागर और मीना देवी को एक के बाद एक चार बेटियां और हुई। परिवार में पांच बेटियों के जन्म लेने से चंद्रसेन सागर और उनकी पत्नी मीना देवी को परिवार के ताने सुनने पड़े।

कहते हैं जब भी कहें अच्छा कहे ऐसा ही कुछ चंद्रसेन सागर के साथ हुआ। पांच बेटियों के बाद चंद्रसेन सागर को यह कहा जाता था कि अब क्या बेटियों को आईएएस बनाओगे, तो आज यह बात सत्य साबित हुई और उनकी तीन बेटियों ने यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली है। चंद्रसेन सागर की तीन बेटियों ने यूपीएससी पास की और दो बेटियों ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है।

3 बेटियां आईपीएस, 2 इंजीनियर

Chandrasen Sagar Faridpur Tehsil Bareilly District

चंद्र सिंह सागर बताते हैं कि कैसे उन्होंने पांच बेटियों के बाद समाज के ताने सुने और इन बेटियों को बड़ा किया। वह बताते हैं उनकी पत्नी मीना देवी का इन सब में बहुत बड़ा योगदान रहा है। बेटियों की प्रारंभिक शिक्षा बरेली स्थित सेंट मारिया कॉलेज से हुई और इसके बाद उत्तराखंड, इलाहाबाद और दिल्ली से आगे की पढ़ाई पूरी हुई है। तीन बेटियां ने यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली में रहकर पड़े की है। चंद्रसेन सागर की सबसे बड़ी बेटी अर्जित सागर ने वर्ष 2009 की यूपीएससी परीक्षा अपने दूसरे प्रयास में पास की। अर्जित की शादी आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में हुई है और उनके पति भी आईएएस अफसर है। वर्तमान में अर्जित ज्वाइंट कमिश्नर कस्टम मुंबई में कार्यरत है।

चंद्रसेन सागर की दूसरी बेटी अर्पित को सफलता 6 साल बाद 2015 में मिली, जो अभी डीडीओ के रूप में वलसाड में पोस्टेड है। चंद्रसेन सागर की तीसरी और चौथी बेटी इंजीनियर है। अश्विनी जो कि मुंबई में प्राइवेट कंपनी में जॉब करती है वही अंकिता नोएडा में मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करती है। चंद्रसेन सागर की सबसे छोटी बेटी आकृति ने अपने दूसरे प्रयास में वर्ष 2016 की यूपीएससी परीक्षा पास की है। आकृति सागर अभी जल बोर्ड की डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं।

मामा ने सही मार्गदर्शन दिया

चंद्रसेन सागर और मीना देवी की बेटियों ने बताया कि जीवन में जो कुछ भी उन्होंने प्राप्त किया है उसके लिए प्रेरणा उनके मामा अनिल कुमार से मिली है। चंद्रसेन की बेटियों के मामा अनिल कुमार 1995 बेच के पश्चिम बंगाल केडर के आईपीएस अधिकारी हैं। चंद्रसेन सागर की बेटियां अपने मामा को अपनी प्रेरणा मानती थी और उनका मामा की ही तरह बड़ा अफसर बनने का ख्वाब देखती थी जिसे उन्होंने पूरा भी किया। बेटियां बताती है की मामा अनिल कुमार आईपीएस अधिकारी थे इसलिए यूपीएससी की तैयारी के दौरान सही मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

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