काम्या कार्तिकेयन एशिया के बाहर सबसे ऊंची चोटी पर फहराया तिरंगा, मोदी ने किया सलाम

देश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। खासकर लड़कियां जिस तेजी से अपना नाम बना रही है। वह काबिले तारीफ है। हौसलों में उड़ान हो तो पंख की जरूरत नहीं होती, यह कर दिखाया है एक 12 साल की काम्या ने। भारत की रहने वाली 12 साल की छात्रा काम्या कार्तिकेयन ने एशिया के बाहर की सबसे ऊंची चोटी एकांकगुआ पर जीत हांसिल की। इस माउंट पर्वत पर पहुंच कर उन्होंने तिरंगा फहराया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को “मन की बात” में काम्या कार्तिकेयन का जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं आपके साथ 12 साल की बेटी काम्या कार्तिकेयन की उपलब्धि की चर्चा जरूर करना चाहूंगा।

काम्या ने सिर्फ 12 साल की उम्र में ही माउंट एंककागुआ को फतह किया। यह चोटी 7000 मीटर ऊंची है। आखिर कौन है काम्या कार्तिकेयन, जिनकी काबिलियत का जिक्र प्रधानमंत्री मोदी ने “मन की बात” कार्यक्रम में किया। पीएम मोदी ने “मन की बात” में काम्या की उपलब्धि की चर्चा की। काम्या कार्तिकेयन मुंबई के नवी चिल्ड्रन स्कूल में 7 वीं की छात्रा है। काम्या ने 6952 मीटर ऊंची चोटी पर 1 फरवरी को फतह हांसिल की थी।काम्या इससे पहले भी कई कीर्तिमान स्थापित कर चुकी है। बता दें कि माउंट एकंकागुआ दक्षिण अमेरिका के अर्जेंटीना में स्थित एंडीज पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी है। नौसेना के अधिकारियों ने बताया कि काम्या ने इस मुकाम को अपने कठिन संघर्ष से हासिल किया है।उनके लंबे समय की शारीरिक मानसिक और साहसिक खेलों में उनकी नियमित भागीदारी से उन्होंने यह जीत हासिल की है।

3 साल की उम्र में ही काम्या ने माउंटेनियरिंग का अभ्यास करना शुरू किया था। उस दौरान वह लोनावला में बेसिक ट्रैक पर जाती थी। इसके बाद 9 साल की उम्र में काम्या ने उत्तराखंड में कई पहाड़ों पर चढ़ाई की थी। इसके बाद 10 साल की उम्र में उन्होंने नेपाल में 5346 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद एवरेस्ट बेस कैंप पर चढ़ाई की थी। बता दें कि काम्या माउंट स्टोर कांगड़ी पर पहुंचने वाली सबसे कम उम्र की माउंटेनियर भी रही हैं। काम्या के पिता एस. कार्तिकेयन भारतीय नौसेना में कमांडर है। वहीं उनकी माता शिक्षक है। अधिकारियों ने बताया कि काम्या के अंदर माउंटेनियरिंग के लिए काम्या के अंदर बचपन से ही जुनून रहा है। उनके इस जुनून ने उन्हें आगे बढ़ाया। इससे पहले काम्या ने कई ऊंचे पहाड़ों पर चढ़ाई की है। इससे पहले उन्होंने साल 2019 में लद्दाख की 6260 मीटर ऊंची माउंट मेटाॅक कांगड़ी दो पर भी जीत प्राप्त की थी।

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