Categories: देश

हो गई मुलाकात, मान लिया राजनाथ सिंह ने चीनी समकक्ष का आग्रह

नई दिल्ली. भारत ने अपनी गरिमा का ध्यान रखा और अपने आत्मविश्वास का मुखर प्रदर्शन किया. चीन से सीमा पर तनाव घटाने के लिए बातचीत के चीनी आग्रह को भारत ने स्वीकार किया जिसके बाद मॉस्को में मिले भारत और चीन के रक्षा मंत्री और दोनों में हुई ढाई घंटे की बातचीत.

बिना-शर्त भारत चाहता है शांति

पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर पिछले लगभग एक सौ बीस दिनों से चल रहा सैन्य तनाव भारत ईमानदारी से खत्म करना चाहता है किन्तु चीन चालबाज़ी से इसका समाधान चाहता है. भारत की दृढ़ता और साहस के सामने चीन की चालबाज़ी काम नहीं आई. प्रत्युत्तर में भारत ने सीमा पर पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयारी कर ली है और भारत की जल, थल तथा नभ की सेनाएं निरंतर रेडी मोड पर हैं. ऐसे में चीन को समझ में आ गया है कि भारत को झुकाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है. 

सैन्य-स्तरीय वार्ता रही विफल

भारत और चीन के बीच पिछले चार माह से सेनाधिकारी स्तर पर हो रही बातचीत लगातार बेनतीजा रही. इसकी वजह सीधे तौर पर चीन की धूर्तता ही रही क्योंकि चीन की कथनी और करनी में जमीन आसमान का अंतर है. ऐसे में भारत ने भी तैयारी कर ली थी कि विवाद चाहे जितना लंबा चले, भारत किसी कीमत पर अपने कदम पीछे नहीं खींचेगा. फलस्वरूप शान्ति की राह अब चीन तलाश रहा है और उसकी भारत के साथ उच्च-स्तरीय वार्ता का आग्रह भारत ने अंततः स्वीकार कर लिया.

शुक्रवार रात हुई मुलाक़ात

मॉस्को में शुक्रवार 4 सितंबर की रात दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की अगुआई में हुई बातचीत करीब ढाई घंटे चली. इस बैठक में भारतीय रक्षा सचिव अजय कुमार और रूस में भारत के राजदूत डीबी वेंकटेश भी सम्मिलित हुए. चीन का रवैया बदला हुआ नज़र आया और दोनों शीर्ष नेताओं के बीच लद्दाख के मौजूदा तनाव तथा इसके समाधान के संभावित उपायों पर गहराई से वार्ता हुई. इसके बाद अब गुरुवार 10 सितंबर दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की भी वार्ता का मार्ग प्रशस्त हो गया है.

ये भी पढ़ें.  चीन-ताइवान के बीच कभी भी बढ़ सकता है तनाव

                                             

zeenews.india.com

Leave a Comment