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स्वामी अग्निवेश ने चलाया था बंधुआ मजदूरी के खिलाफ अभियान, लेक्‍चररशिप से की करियर की शुरुआत

स्वामी अग्निवेश ने 2011 के भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन में भी हिस्सा लिया था.

स्वामी अग्निवेश का नाम अक्सर विवादों के कारण सुर्खियों में रहा है. अग्निवेश कई बार बीजेपी और उससे जुड़े संगठनों के लोगों पर मारपीट का भी आरोप लगा चके हैं. आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी खास बातें

नई दिल्ली. आर्य समाज की प्रतिष्ठित हस्ती और सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश का शुक्रवार को निधन (Swami Agnivesh Death) हो गया है. स्वामी अग्निवेश को शुक्रवार शाम 6 बजे कार्डियक अरेस्ट हुआ. उन्हें बचाने की भरपूर कोशिश की गई, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका. उन्होंने शाम 6.30 बजे दिल्ली में अंतिम सांस ली.

स्वामी अग्निवेश का नाम अक्सर विवादों के कारण सुर्खियों में रहा है. अग्निवेश कई बार बीजेपी और उससे जुड़े संगठनों के लोगों पर मारपीट का भी आरोप लगा चके हैं. आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी खास बातें…

अग्निवेश का जन्म 21 सितंबर 1939 आंध्र प्रदश के श्रीकाकुलम में हुआ था. वह जब 4 साल के थे तो उनके पिता का निधन हो गया और उनकी परवरिश नाना ने की. अग्निवेश के नाना तत्कालीन रियासत ‘शक्ति’ के दिवान थे.

बड़े होने के बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई लॉ और कॉमर्स में पूरी की. पढ़ाई पूरी करनी के बाद अग्निवेश कोलकाता के प्रसिद्ध सेंट जेवियर्स कॉलेज में मैनेजमेंट के लेक्‍चरर रहे. सब्‍यसाची मुखर्जी के अधीन उन्‍होंने वकालत भी की.

सब्यसाची मुखर्जी के निधन के बाद अग्निवेश भारत के चीफ जस्टिस भी रहे. लंबे समय तक वकालत और फिर चीफ जस्टिस का पद संभालने के बाद अग्निवेश का ध्यान अचानक से आर्य समाज की ओर गया और वो आर्य समाज में शामिल होने 1968 में हरियाणा गए.

आर्य समाज में आने के बाद अग्निवेश ने 1970 में आर्य सभा नाम की राजनीति पार्टी बनाई. 1977 में वो हरियाणा विधासनभा में विधायक चुने गए और हरियाणा सरकार में शिक्षा मंत्री भी रहे. स्वामी अग्निवेश ने बंधुआ मजदूरी के खिलाफ अभियान चलाया था.

राजनीतिक सफर को आगे बढ़ाते हुए अग्निवेश ने 1981 में बंधुआ मुक्ति मोर्चा नाम के संगठन की स्थापना की. उन्होंने 2011 के भ्रष्टाचार-विरोधी आंदोलन में भी हिस्सा लिया था. हालांकि बाद में मतभेदों के चलते वह इस आंदोलन से दूर हो गए थे. उन्होंने 2011 में दिल्ली में हुए अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में भी हिस्सा लिया था. हालांकि मतभेदों के कारण वह अन्ना आंदोलन से जल्द ही दूर भी हो गए थे.


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