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श्रीलंका में जल्द लग सकता है गोहत्या पर प्रतिबंध, PM राजपक्षे की पार्टी ने प्रस्ताव को दी मंजूरी

श्रीलंका में जल्द ही गोहत्या पर प्रतिबंध लग सकता है

रामबुकवेला (Rambukwella) के बयान की पुष्टि कई आधिकारिक सूत्रों ने की. बौद्ध-बहुल श्रीलंका (Buddhist-majority Sri Lanka) में, लगभग 99% लोग मांस खाने वाले हैं. लेकिन बहुसंख्यक हिंदू और बौद्ध (majority Hindus and Buddhists) गोमांस नहीं खाते हैं.

बेंगलुरु. श्रीलंका (Sri Lanka) जल्द ही गोहत्या पर प्रतिबंध (ban slaughtering of cows) लगा सकता है. पिछले महीने संसदीय चुनावों (parliamentary elections) में दो-तिहाई बहुमत से जीतने वाली सत्तारूढ़ श्रीलंका पोडुजना पेरमुना (Sri Lanka Podujana Peramuna- SLPP) ने पूरे द्वीपीय राष्ट्र में गायों की हत्या पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है. हालांकि गोमांस के आयात की अनुमति दी गई है. प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे (Prime Minister Mahinda Rajapaksa) ने मंगलवार को अपने SLPP संसदीय समूह के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की.

कैबिनेट प्रवक्ता और मीडिया मंत्री (Media Minister) केहलिया रामबुकवेला के हवाले से स्थानीय मीडिया (Local Media) ने बताया कि राजपक्षे ने एक प्रस्ताव पेश किया है और उन्होंने कहा है कि उन्हें “(इस) पशु के वध पर प्रतिबंध (ban cattle slaughter) लगाए जाने की उम्मीद है.” उनके हवाले से यह भी कहा गया था कि राजपक्षे फैसला करेंगे कि वह सरकार को प्रस्ताव (proposal to the government) कब सौंपेंगे.

बौद्ध-बहुल श्रीलंका में, लगभग 99% लोग मांस खाने वाले
रामबुकवेला के बयान की पुष्टि कई आधिकारिक सूत्रों ने की. बौद्ध-बहुल श्रीलंका में, लगभग 99% लोग मांस खाने वाले हैं. लेकिन बहुसंख्यक हिंदू और बौद्ध गोमांस नहीं खाते हैं. प्रभावशाली बौद्ध भिक्षु, जो कि ज्यादातर राजपक्षे की अगुवाई वाली SLPP के समर्थक हैं, लगातार सरकारों पर धार्मिक कारणों से गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने का दबाव बनाते रहे हैं.बहुसंख्यक सिंहला-बौद्ध समुदाय से अपनी अधिकांश ताकत हासिल करने वाली SLPP ने खुले तौर पर कहा है कि उसे सत्ता में बने रहने के लिए अल्पसंख्यक धार्मिक या जातीय समूहों का तुष्टीकरण करने की जरूरत नहीं है.

गोमांस का नियमित रूप से सेवन अल्पसंख्यक मुसलमान और यूरोपीय ईसाई करते हैं
गोमांस का नियमित रूप से अल्पसंख्यक मुसलमान और वे ईसाई सेवन करते हैं, जो मुख्यत: यूरोपीय मूल के हैं. ये दोनों समूह राष्ट्र की राजनीति में बहुत प्रभावशाली नहीं हैं और सत्तारूढ़ दल ने उन्हें अपने चुनाव अभियानों में शामिल नहीं किया है.

प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने कहा कि “(इसके लिए) कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं रखा गया था और निश्चित तौर पर निकट भविष्य में इस तरह के प्रतिबंध को लागू करने के लिए कोई कैबिनेट पत्र तैयार नहीं किया गया है.”

दो साल पहले इस मांग को लेकर हुए थे प्रदर्शन
दो साल पहले, तमिलों के वर्चस्व वाले उत्तरी इलाके में हिंदुओं के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी. इसे सिंहली बौद्ध बहुल दक्षिणी श्रीलंका में भी अच्छा समर्थन मिला था.

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अप्रैल 2019 के ईस्टर बम विस्फोटों के बाद से सिंहली लोगों के बीच मुस्लिम विरोधी भावनाएं मजबूत हो रही हैं.


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