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लोन रिस्ट्रक्चरिंग को लेकर RBI की बड़ी घोषणा, कामथ कमेटी रिपोर्ट को मिली मंजूरी

आरबीआई ने कामथ कमेटी की रिपोर्ट को मंजूरी दे दी है.

RBI ने लोन रिस्ट्रक्चरिंग के लिए के वी कामथ कमेटी रिपोर्ट को मंजूरी दे दी है. कमेटी ने 26 सेक्टर्स के लिए फाइनेंशियल पैरामीटर्स तय किये हैं. एक अनुमान के मुताबिक 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा रकम के कॉरपोरेट और नॉन-कॉरपोरेट लोन रिस्ट्रक्चर किये जा सकते हैं.

नई दिल्ली. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने रिस्ट्रक्चरिंग स्कीम के तहत रिजॉल्युशन प्लान के लिए फाइनेंशियल पैरामीटर्स का ऐलान कर दिया है. करीब एक सप्ताह पहले ही केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (NBFCs) को जल्द से जल्द लोन रिस्ट्रक्चरिंग (Loan Restructuring) प्लान रोल आउट करने को कहा था. RBI ने के वी कामथ कमेटी (K V Kamath Committee) द्वारा तय किए गए फाइनेंशियल पैरामीटर्स को स्वीकृति दे दी है. कमेटी ने 26 सेक्टर्स के लिए सिफारिश किया है. इसमें लिक्विडिटी, कर्ज और सर्विसेबिलिटी जैसे पैरामीटर्स हैं. लोन रिस्ट्रक्चरिंग का ऐलान कोरोना वायरस महामारी से कंपनियों के सामने खड़ी हुई दिक्कत को खत्म करने के लिए किया गया था. पिछले सप्ताह ही के वी कामथ कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सबमिट की थी.

CNBC-आवाज़ को दिए गए इंटरव्यू में RBI गर्वनर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) ने कहा था कि बैंक वन-टाइम रिस्ट्रक्चरिंग के तहत 3, 6 या 12 महीनों के लिए लोन मोरेटोरियम (Loan Moratorium) को बढ़ा सकते हैं. लॉकडाउन के दौरान RBI ने मोरेटोरियम का ऐलान किया था ताकि उधारकर्ताओं को मौजूदा महामारी की वजह से उपजे संकट का सामना करने में मदद मिल सके. केंद्रीय बैंक ने लेंडर्स को अनुमति दी थी कि वो 3 महीने की EMI पर लोन मोरेटोरियम की सुविधा दें. यह 1 मार्च से लेकर 31 मई 2020 के बीच बकाये ईएमआई के लिए था. लेकिन, इसे 3 महीने के लिए और बढ़ाकर 31 अगस्त 2020 कर दिया गया था.

कब तक बैंक शुरू कर सकते हैं रिजॉल्युशन प्लान
इसके बाद केंद्रीय बैंक ने लेंडर्स को लोन अकाउंट को बिना नॉन-परफॉर्मिंग एसेट घोषित (NPA) किए ही वन-टाइम लोन रिस्ट्रक्चरिंग की अनुमति दी है. यह कॉरपोरेट व पर्सनल लोन्स के लिए होगा. इसके लिए वहीं कंपिनयां या व्यक्ति योग्य होंगे,​ जिन्होंने 1 मार्च 2020 तक 30 दिन से ज्यादा का लोन डिफॉल्ट नहीं किया है. कॉरपोरेट उधारकर्ताओं के लिए बैंक 31 दिसंबर 2020 तक रिजॉल्युशन प्लान शुरू कर सकते हैं. इसे 30 जून 2021 तक लागू कर देना होगा. पर्सनल लोन्स के लिए बैंकों के पास 31 दिसंबर 2020 तक रिजॉल्युशन प्लान शुरू करने का विकल्प होगा और इसके 90 दिन के अंदर इसे लागू भी करना होगा.यह भी पढ़ें: दूसरे राहत पैकेज पर काम कर रही मोदी सरकार, मध्यम वर्ग और छोटे कारोबार पर होगा फोकस

रिस्ट्रक्चर किये जा सकते हैं 10 लाख करोड़ से ज्यादा के लोन
रियल एस्टेट, एयरलाइंस, होटल्स ओर कंज्यूमर संबंधित सेक्टर्स के कर्ज का एक बड़ा हिस्सा रिस्ट्रक्चर किया जा चुका है. इसमें सबसे ज्यादा योगदान इन्फ्रास्ट्रक्चर, पावर और कंस्ट्रक्शन सेक्टर का है. वित्त वर्ष 2021 में कॉरपोरेट सेक्टर के रिस्ट्रक्चरिंग मात्रा बैंकिंग क्रेडिट (Banking Credit) का 3.5 फीसदी से 5.8 फीसदी के बीच हो सकता है. इंडिया रेटिंग्स ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि यह रकम करीब 3.3 से 6.3 लाख करोड़ रुपये तक का हो सकता है.

नॉन-कारपोरेट लोन्स की बात करें तो बैंकिंग क्रेडिट का 1.9 फीसदी यानी 2,10,000 करोड़ रुपये का लोन इस घोषणा के बाद रिस्ट्रक्चर किया जा सकता है. इंडिया रेटिंग्स ने कहा है कि अगर इसे रिस्ट्रक्चर नहीं किया जाता है तो संभावना है कि ये गैर-नि​ष्पादित श्रेणी में चले जाएं.

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पिछले महीने RBI ने बनाई थी कमेटी
बता दें कि 7 अगस्त 2020 को RBI लोन रिस्ट्रक्चरिंग के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाने का ऐलान किया था. इसकी अध्यक्षता की​ जिम्मेदारी के वी कामथ को सौंपी गई थी. आरबीआई ने कमेटी से रिजॉल्युशन के लिए फाइनेंशियल पैरामीटर्स के बारे में प्लान पेश करने को कहा था.


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