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नवजात को जन्म देने वाले बने उसके दुश्मन, लेकिन एक चमत्कार ने बचाई उसकी जिंदगी

कृष्णवरम गांव के चरवाहों ने नवजात को बचाया. (सांकेतिक फोटो)

गोदावरी जिले (Godavari district) के एक गांव (village) में ऐसा मामला सामने आया है जिसे देखते हुए कहा जा सकता है, ‘जाको राखे साइयां मार सके ना कोय.’

हैदराबाद. गोदावरी जिले के कृष्णवरम गांव (Krishnavaram Village) के पास जंगल (Forest) में चरवाहों को आधा मिट्टी में दफन (Mud burial) एक नवजात (Newborn) मिला. नवजात की रोने की आवाज सुनकर चरवाहे मौके पर पहुंचे और उन्होंने नवजात को मिट्टी से बाहर निकाला. नवजात की गंभीर हालत को देखते हुए उसे लक्ष्मीपुरम स्वास्थ्य केंद्र ले जाकर प्राथमिक उपचार दिलाया. उसके बाद नवजात को डॉक्टर की सलाह पर नजदीकी राज्य तेलंगाना के भद्राचलम हॉस्पिटल में भर्ती कराया. डॉक्टरों के अनुसार फिलहाल नवाज का स्वास्थय एकदम ठीक है.

दरअसल कृष्णवरम गांव के चरवाहे अपने जानवरों को चराने के लिए रोज की तरह जंगल में गए. इस दौरान उन्हें बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी, पास जाकर चरवाहों ने देखा तो एक नवजात बच्चा आधा मिट्टी में दफन है और जोर-जोर से रो रहा है. चरवाहों ने नवजात को मिट्टी से निकाला और गांव लेकर पहुचें. जहां गांव की महिलाओं ने नवजात के मुंह में से मिट्टी निकाली और उसे पानी से साफ किया.

मिट्टी में दफन करने के दौरान नवजात के हाथ और पैर में मामूली चोटें आई. जिसका इलाज कराने के लिए ग्रामीण नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टर ने नवजात को नजदीकी राज्य तेलंगाना के भद्रचलम हॉस्पीटल में रेफर कर दिया. डॉक्टरों के अनुसार नवजात एकदम ठीक है.

वहीं नवजात को बचाने वाले ग्रामीणों ने बताया, ‘जब हमने नवजात के रोने की आवाज सुनी तो हम उस तरफ गए जहां से आवाज आ रही थी. वहां पहुंचने पर एक नवजात आधा मिट्टी में दबा हुआ मिला, इस दौरान हमने आसपास किसी महिला या और किसी को नहीं देखा.’इस बीच, महिला विकास और बाल कल्याण विभाग को जब पूरे मामले की जानकारी मिली तो उन्होंने नवजात के माता-पिता की पहचान करने के लिए एक जांच शुरू की. चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की चेयरपर्सन पद्मावती के निर्देश पर, एक विशेष टीम ने घटना के बारे में जानकारी इकट्ठा करने और जांच करने के लिए गांव का दौरा किया.

इस दौरान टीम ने कुछ दिनों के दौरान गर्भवती महिलाओं और गांव में होने वाले प्रसव के बारे में जानकारी एकत्र की. टीम ने नर्स, आशा कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी कर्मचारियों से जानकारी एकत्र की. टीम ने अपनी जांच के बारे में स्थानीय पुलिस अधिकारियों से भी बात की. सीडब्ल्यूसी टीम ने नवजात शिशु की स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में भी जानकारी ली.


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