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टल गई GST काउंसिल की 42वीं बैठक- जानिए नई तारीख, सस्ती हो सकती है ये चीजें

नई दिल्ली. जीएसटी परिषद (GST Council) की 19 सितंबर को होने वाली 42वीं बैठक टल गई है. अब यह बैठक पांच अक्टूबर को होगी. इस बैठक में दोपहियों पर टैक्स घटाने सहित कई अहम मसलों पर चर्चा होने की संभावना है. सूत्रों ने बताया कि परिषद की 42वीं बैठक को टाल दिया गया है, क्योंकि उस दौरान संसद का सत्र चल रहा होगा. केंद्र ने पिछले महीने फैसला किया था कि जीएसटी परिषद की 41वीं और 42वीं बैठक 27 अगस्त और 19 सितंबर को होगी. हालांकि, उस समय तक संसद के मानसून सत्र पर फैसला नहीं हुआ था.

बहुत जल्द सस्ता हो सकता है कार खरीदना, सरकार ने दिये संकेत-केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (Prakash Javdekar) ने बीते हफ्ते संकेत दिया था है कि वाहनों पर लगने वाले जीएसटी दरों (GST Rates) में कटौती हो सकती है. उन्होंने उम्मीद जताई की जल्द ही ऑटोमोटिव इंडस्ट्री (Automotive Industry) के लिए अच्छी खबर आ सकती है.

जावड़ेकर ने बताया कि ऑटो स्क्रैपेज पॉलिसी (Auto Scrappage Policy) तैयार हो चुकी है, सभी स्टेकहोल्डर्स ने इनपुट्स उपलब्ध कराया है. बहुत जल्द ही इसका ऐलान कर दिया जाएगा. व्हीकल सेग्मेंट पर जीएसटी कटौती की संभावनाओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वित्त मंत्रालय इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है. हालांकि, उन्हें इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं है.

जावड़ेकर ने कहा कि दोपहिया, तिपहिया, पब्लिक ट्रांसपोर्ट सर्विसेज और चार पहिया वाहनों के लिए कटौती होने की संभावना है. उन्होंने उम्मीद जताई है कि बहुत जल्द ही इस बारे में कोई अच्छी खबर आ सकती है.

दोपहिया पर 28 फीसदी जीएसटी-वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी पिछले महीने इंडस्ट्रीज से बातचीत के दौरान इस बारे में कहा था. वित्त मंत्री ने कहा था कि जीएसटी काउंसिल द्वारा दरों को रिवाइज करने के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा. वर्तमान में दोपहिया वाहनों पर 28 फीसदी जीएसटी देना होता है.

जीएसटी दरों पर कोई भी फैसला जीएसटी काउंसिल (GST Council) ही लेती है, जिसकी अध्यक्षता वित्त मंत्री करती हैं. जीएसटी काउंसिल की बैठक में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के फाइनेंस और टैक्सेशन मंत्री भी शामिल होते हैं.

GST बैठक में होगा ये मुख्य मुद्दा

जीएसटी परिषद की पांच अक्टूबर को होने वाली बैठक काफी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि केंद्र और राज्यों के बीच जीएसटी संग्रहण में 2.35 लाख करोड़ रुपये की कमी के वित्तपोषण के मुद्दे पर विवाद चल रहा है. केंद्र की गणना के अनुसार इसमें से 97,000 करोड़ रुपये की कमी जीएसटी के कार्यान्वयन से जुड़ी है. शेष 1.38 लाख करोड़ रुपये की कमी राज्यों के राजस्व पर कोविड-19 के प्रभाव की वजह से है. कोरोना वायरस महामारी के कारणा 68 दिनों के देशव्यापी लॉकडाउन व प्रतिबंधों से अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है. कर राजस्व में भारी गिरावट के कारण 2019-20 में इसने 89% की छलांग लगाई है.

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सरकार ने दिए थे कर्ज जुटाने के दो आप्शन
केंद्र ने पिछले महीने राज्यों को रिजर्व बैंक द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली विशेष सुविधा के जरिये 97,000 करोड़ रुपये का कर्ज जुटाने या बाजार से 2.35 लाख करोड़ रुपये जुटाने के दो विकल्प दिए थे. इसके अलावा केंद्र ने विलासिता और अहितकर वस्तुओं पर मुआवजा उपकर को 2022 से आगे बढ़ाने का भी प्रस्ताव किया था, जिससे राज्य कर्ज का भुगतान कर सकें.

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ऐसा रहा राज्यों का रुख
छह गैर-भाजपा शासित राज्यों…. पश्चिम बंगाल, केरल, दिल्ली, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु ने केंद्र को पत्र लिखकर राज्यों द्वारा कर्ज लेने के विकल्प का विरोध किया था. सूत्रों ने बताया कि आठ सितंबर तक सात राज्य अपनी पसंद के विकल्प के बारे में केंद्र को सूचित कर चुके हैं. गुजरात, बिहार, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और त्रिपुरा ने 97,000 करोड़ रुपये का कर्ज लेने का विकल्प चुना है. वहीं सिक्किम और मणिपुर ने दूसरा 2.35 लाख करोड़ रुपये बाजार से जुटाने वाले कर्ज का विकल्प चुना है.


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