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कोरोना वायरस: भारत में है सबसे कम मौत की दर, क्या है आंकड़ों की असली कहानी?

जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के मुताबिक भारत में कोरोना से मौत की दर 1.7% है.

Coronavirus: भारत में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन मृत्यु दर गिर रही है. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, प्रति 100 मामलों में मृत्यु दर अप्रैल में 4% से अगस्त में 2.15% हो गई, और अब 2% से कम है.

नई दिल्ली. भारत में एक दिन में कोविड-19 (Coronavirus) के 96,551 नए मामले सामने आने के बाद देश में संक्रमण के मामले बढ़कर शुक्रवार को 45 लाख के पार चले गए. वहीं 1,209 और लोगों की मौत के बाद मृतक संख्या बढ़कर 76,271 हो गई है. जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी (Johns Hopkins University) के मुताबिक कोरोना संक्रमित लोगों के मामले में भारत इस वक्त दूसरे नंबर पर है. जबकि मौत के मामले में भारत तीसरे नंबर पर है. खास बात ये है कि भारत में दूसरे देशों के मुकाबले मौत की दर (Mortality Rate) काफी कम है.

मौत की दर
जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के मुताबिक भारत में कोरोना से मौत की दर 1.7% है. वही अमेरिका में ये लगभग 3%, ब्रिटेन में 11.7% और इटली में ये 12.6% है. सरकार का दावा है कि भारत में कम मौत की दर का मतलब है कि कोरोना के संकट को ठीक तरीके से संभाला जा रहा है. प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त में एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा था ‘देश में औसत मौत की दर लगातार नीचे जा रही है. उम्मीद करते हैं कि ये जल्द ही 1% से नीचे पहुंच जाएगी. लेकिन भारत में कुछ वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि मौत की संख्या अधूरी और भ्रामक है.

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भारत में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन मृत्यु दर गिर रही है. स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, प्रति 100 मामलों में मृत्यु दर अप्रैल में 4% से अगस्त में 2.15% हो गई, और अब 2% से कम है. लेकिन कुछ विशेषज्ञों का दावा है कि ये संख्या सही तस्वीर नहीं बता रही है. उनका मामना है कि भारत में कमजोर सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा है, और वर्षों से ये अपने ही नागरिकों की मौतों को सही ढंग से दर्ज करने में विफल रहा है. आंकड़ों के मुताबिक केवल 86% मौतें सरकारी प्रणालियों में पंजीकृत हैं. डॉक्टर हेमंत शेवाडे ने कहा कि सभी पंजीकृत मौतों में से केवल 22% मौत की आधिकारिक वजह बताई जाती है. इसके पीछे मुख्य वजह है कि भारत में अधिकांश लोग घर या दूसरे स्थानों पर मरते हैं, अस्पताल में नहीं, इसलिए डॉक्टर आमतौर पर मृत्यु का कारण बताने के लिए मौजूद नहीं होते हैं.


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