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किसानों की पिटाई के बाद बैकफुट पर हरियाणा सरकार, आज गिनाएगी कृषि अध्यादेशों के लाभ Chandigarh-City News in Hindi

चंडीगढ़. केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि अध्यादेशों (Agriculture Ordinance) के खिलाफ ‘किसान बचाओ मंडी बचाओ’ रैली में कुरुक्षेत्र जा रहे अन्नदाताओं की जमकर पिटाई करने के बाद हरियाणा सरकार बैकफुट पर आ गई है. देश भर में इसकी आलोचना से परेशान सरकार ने आज दोपहर बाद 3 बजे वेबिनार करके अध्यादेशों के फायदे गिनाएगी. दरअसल, इन अध्यादेशों के खिलाफ सबसे ज्यादा हंगामा हरियाणा में ही हो रहा है. क्योंकि यहां 80 फीसदी से अधिक लोगों की जीविका कृषि पर ही निर्भर है. इस पिटाई के बाद लोग दुष्यंत चौटाला (Dushyant Chautala) पर निशाना साध रहे हैं, जिनके दादा चौधरी देवीलाल किसानों के मसीहा कहे जाते थे. जब धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में किसानों को दौड़ा-दौड़ाकर पुलिस पीट रही थी तब प्रदेश में उन्हीं का शासन चल रहा था. सीएम मनोहरलाल कोरोना का इलाज करवा रहे थे.

दुष्यंत चौटाला भी खुद को किसान नेता के तौर पर प्रोजेक्ट करते हैं. किसान शक्ति संघ के अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह कहते हैं कि किसान राजनीति करने का दंभ भरने वाली पार्टी के शासनकाल में निहत्थे किसानों की पिटाई होना चिंताजनक है. किसान यदि किसी सुधार पर सवाल उठा रहे हैं तो सरकार बातचीत करे न कि उन पर लाठी चार्ज. हम तो केवल एक गारंटी चाहते हैं कि किसानों की उपज कोई भी खरीदे उसके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य बाध्यकारी हो, वरना उसे जेल भेजने का प्रावधान हो.

कृषि अध्यादेश के खिलाफ हरियाणा के किसानों ने जमकर बवाल काटा.

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि लाठी-गोली चलाकर सरकारों ने जब-जब किसान को दबाने की कोशिश की है,  वो अपने आत्मसम्मान के लिए लड़ा है. पीपली (कुरुक्षेत्र) रैली में जा रहे किसानों से हुई बर्बरता सरकार की कायरता दिखाती है. किसान को अध्यादेश नहीं, सी-2 फार्मूले (Comprehensive Cost) पर अपनी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य चाहिए. वक्त है संभल जाओ, किसान जागा तो आपको सोने नहीं देगा.

भारतीय किसान यूनियन (Bharatiya Kisan Union) के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा है कि सरकार के पास चार दिन का समय है. वो तीनों अध्यादेशों को वापस लें. इस मांग को अनदेखा करने के पर 15 से 20 सितंबर तक जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया जाएगा. 20 के बाद जिलों में जाम लगा दिया जाएगा.

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उधर, इस आंदोलन से परेशान हरियाणा सरकार ने आज 11 सितंबर को 3 बजे एक वेबिनार आयोजित किया है. इसमें किसानों और आढतियों को सरकार अपनी उपलब्धियां बताएगी. साथ ही मोदी सरकार द्वारा पास गए अध्यादेशों के फायदे गिनाएगी. इसें 25 प्रगतिशील किसान, 10 किसान उत्पादक संगठन (FPO- Farmer Producer Organisations) के प्रतिनिधि, 5-5 आढती या व्यापारी, राइस मिलर एवं कॉटन मिल्स के प्रतिनिधि शिरकत करेंगे.

कृषि अध्यादेशों की वजह से क्या खत्म हो जाएंगी मंडियां?

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कृषि विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि  केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए अध्यादेशों (कृषि उपज वाणिज्य एवं व्यापार संवर्धन एवं सुविधा एवं मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान सशक्तीकरण और संरक्षण) से केवल यह परिवर्तन हुआ है कि किसान सरकारी मंडियों के बाहर न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक मूल्य पर किसी भी प्राइवेट एजेंसी को अपनी फसल बेच सकता है. सरकार ये वादा कर रही है कि अध्यादेश के बावजूद किसानों को एमएसपी मिलता रहेगा और मंडियां बंद नहीं की जाएंगी.


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