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कांग्रेस के नए बदलाव में दिख रही राहुल गांधी की छाप, युवाओं के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी

नई दिल्ली. कांग्रेस (Congress) ने आज संगठन में बड़ा फेरबदल किया. सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) को असिस्ट करने के लिए पांच सदस्यीय कमेटी से लेकर, संगठन प्रभारी महासचिव, वर्किंग कमिटी सदस्य और कई कमेटियों का गठन किया गया. हालांकि 2019 लोकसभा चुनाव में हार के बाद राहुल गांधी (Rahul gandhi) के इस्तीफे के बाद से ही बड़े बदलाव की बात कही जा रही थी, लेकिन पिछले दिनों 23 नेताओं के पत्र के बाद हुई CWC की बैठक में ये साफ हो गया था कि कुछ बड़ा होना है.

कांग्रेस के इस बदलाव को राहुल गांधी की वापसी से जोड़कर देखा जा रहा है. कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में ये फैसला हुआ था कि सोनिया गांधी को असिस्ट करने के लिए कमिटी बनाई जाएगी. वर्किंग कमेटी के सदस्यों ने बैठक में प्रस्ताव पास पर ये अधिकार सोनिया गांधी को दिया कि को पार्टी में किसी भी तरह का बदलाव कर सकती है. जिसके तहत सोनिया गांधी को असिस्ट करने के लिए पांच सदस्यीय कमिटी बनाई गई. जिसमें UPA सरकार के वक्त सोनिया के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल, वरिष्ठ नेता ऐ के एंटनी, मुकुल वासनिक और राहुल गांधी के करीबी केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला को जगह दी गई.

वहीं, बड़े स्तर पर राज्यों के प्रभारी भी बदले गए. पुराने नेताओं में गुलाम नबी आजाद, अंबिका सोनी, मोतीलाल वोरा, मलिकार्जुन खड़गे को संगठन की जिम्मेदारी से हटाया गया. वहीं, युवा नेताओं को न सिर्फ राज्यों की जिम्मेदारी दी गई बल्कि वर्किंग कमेटी के भी सदस्य बनाया गया. नए चेहरों में जीतिन प्रसाद, राजीव शुक्ला, माणिक टैगोर, देवेंद्र यादव, विवेक बंसल को संगठन में राज्यों के प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है.

नए बदलाव में राहुल गांधी की छापजानकारों की मानें तो ये बदलाव भले सोनिया गांधी के कलम से हुआ है लेकिन इनके पीछे पूरी झलक राहुल गांधी की देखी जा रही है. UPA 2 में मंत्री रहे राहुल गांधी के टीम इसमें नहीं दिख रहे लेकिन जो नई ब्रिगेड राहुल गांधी ने खड़ी की वो सब इसमें देखे जा सकते हैं. बताया ये जा रहा है कि G-23 नेताओं का CWC बैठक में जिन नेताओ ने काउंटर किया उनका प्रमोशन किया गया.

सचिन पायलट को कोई जिम्मेदारी नही दी गई
राजस्थान में सियासी संकट के खत्म होने और सचिन की वापसी के बाद ये बात कही जा रही थी कि सचिन पायलट को केंद्र में संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है लेकिन आज के बड़े फेरबदल में सचिन कही नज़र नही आए.

G-23 सदस्यों को दरकिनार किया गया

इस बदलाव में जहां एक तरह सोनिया गांधी को पत्र लिखने वाले नेताओं में कइयों को दरकिनार किया गया. जिसमें गुलाम नबी आजाद,आनंद शर्मा,मनीष तिवारी,कपिल सिब्बल शामिल हैं. वहीं, दूसरी तरह पत्र लिखने वाले नेताओं में मुकुल वासनिक और जीतिन प्रसाद को बड़ी जिम्मेदारी भी दी गई. सूत्रों की माने तो जीतिन प्रसाद का कंपरमाइज़ मोड या यूपी में ब्राह्मण फेक्टर उनकी वापसी का कारण माना जा रहा है. वही मुकुल वासनिक को सोनिया गांधी को असिस्ट करने वाली कमेटी में लेने के पीछे ये तर्क दिया जा रहा है कि वो अहमद पटेल के करीबी माने जाते हैं.


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