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कंगना के बंगले में बीएमसी की कार्रवाई, कार्यकर्ताओं ने की आलोचना

बीएमसी ने बुधवार को कंगना रनौत के बंगले के अवैध निर्माण को गिरा दिया. (फाइल फोटो)

Kangana Ranaut Property Demolition: बीएमसी ने बुधवार को अभिनेत्री कंगना रनौत के बांद्रा स्थित बंगले में ‘अवैध निर्माण ‘ को गिरा दिया. हालांकि बॉम्बे हाईकोर्ट ने आगे की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है.

मुंबई. अभिनेत्री कंगना रनौत (Kangana Ranaut) के यहां स्थित बंगले में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (Brihanmumbai Nagarpalika) द्वारा बुधवार को अवैध निर्माण ढहाये जाने की कार्यकर्ताओं ने आलोचना करते हुए कहा कि शहर में हजारों अन्य अवैध ढांचे हैं, लेकिन नगर निकाय उनके प्रति आंखें मूंदे हुए है. अधिवक्ता एवं गैर सरकारी संगठन वाचडॉग फाउंडेशन (Watchdog Foundation) के न्यासी गोडफ्रे पीमेंता ने कहा कि बीएमसी को अभिनेत्री को नोटिस का जवाब देने के लिये कम से कम 48 घंटे तो देने चाहिए थे, जैसा कि उनके वकील ने कहा है. उन्होंने कहा , ‘‘शहर में हजारों अवैध ढांचे हैं. कानून सभी नागरिकों पर एक समान लागू होना चाहिए. चुनिंदा तरीके से कार्रवाई नहीं होनी चाहिए.’’

एक अन्य कार्यकर्ता सुभाष गुप्ता ने कहा कि यदि बीमएसी ने इतनी ही सतर्कता अवैध झुग्गियों को हटाने में दिखाई होती तो मुंबई शहर इतना अस्तव्यस्त नहीं होता. उन्होंने दावा किया, ‘‘हजारों बांग्लादेशी नागरिक कलानगर (जहां मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे रहते हैं) से कुछ ही दूरी पर अवैध झुग्गियों में रहते हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘क्या यह (बीएमसी को) नहीं दिखता है? ’’

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“अदालत के आदेश का उल्लंघन उसकी अवमानना”कार्यकर्ता जितेंद्र गुप्ता ने कहा कि बीएमसी ने बंबई उच्च न्यायालय (Bombay High Court) के आदेश का उल्लंघन कर अदालत की अवमानना की है. अदालत ने कोविड-19 महामारी (Covid-19 Pandemic) के मद्देनजर सितंबर तक निर्माण कार्य नहीं ढहाने को कहा था.

सामना ने कंगना पर साधा निशाना
इस बीच शिवसेना के मुखपत्र सामना ने मुंबई की तुलना पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (Pakistan Occupied Kashmir) से करने को लेकर कंगना पर निशाना साधा. इसने कहा कि मुंबई की तुलना पीओके से करना और शहर की पुलिस को माफिया बताना एक ‘‘बहुत ही खराब मानसिकता’’ का संकेत है.

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सामना ने कहा कि महाराष्ट्र के लोगों को यह महसूस करना चाहिए कि शहर का इस तरह का अपमान ‘‘देशद्रोह’’ जैसा है. इसमें कहा गया है, ‘‘106 शहीद (एकीकृत महाराष्ट्र राज्य के लिये 1950 के दशक में हुए आंदोलन के दौरान मारे गये) उस वक्त अवश्य ही आंसू बहा रहे होंगे जब राष्ट्रवादी मोदी सरकार के गृह मंत्री ने इस तरह के अपराध करने वाली को सुरक्षा मुहैया की. ’’

शिवसेना ने आरोप लगाया, ‘‘महाराष्ट्र गुस्से में है लेकिन भाजपा उन लोगों का समर्थन कर रही है जिनहोंने मुंबई और राज्य के मुख्यमंत्री का अपमान किया है. ’’


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